गुवाहाटी। असम के वन मंत्री जयंत मल्ला बरुआ ने गुरुवार को कहा कि राज्य सरकार बेहाली वन्यजीव अभ्यारण्य के उन क्षेत्रों में तुरंत वन क्षेत्र की बहाली करेगी जहां बड़े पैमाने पर वृक्षों की कटाई की सूचना मिली है। साथ ही उन्होंने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी।
बिश्वनाथ जिले में स्थित अभ्यारण्य का दौरा करने के बाद मंत्री ने कहा कि उपग्रह चित्रों से पता चला है कि लगभग छह महीने पहले घने पेड़ों से आच्छादित वन क्षेत्र को तब से साफ कर दिया गया है।
मल्लाबारुआ ने पत्रकारों से कहा कि हमने उपग्रह चित्रों के माध्यम से देखा कि पिछले कुछ महीनों में वन का एक बड़ा हिस्सा नष्ट हो गया है। इसीलिए मैं यहां व्यक्तिगत रूप से स्थिति का जायजा लेने आया हूं।
उन्होंने कहा कि निरीक्षण के दौरान वन विभाग, असम पुलिस और अन्य एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी उनके साथ थे और नुकसान का विस्तृत आकलन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि हमारी पहली प्राथमिकता वनों का संरक्षण करना है। जहां भी पेड़ काटे गए हैं, वहां हम बिना देरी किए वृक्षारोपण अभियान चलाएंगे। सरकार किसी भी परिस्थिति में वनों के विनाश को बढ़ावा नहीं देगी।
मल्लाबरुआ ने आरोप लगाया कि यह क्षति निजी लाभ के लिए काम करने वाले शरारती तत्वों द्वारा की गई है और उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की ऐसी गतिविधियों में कोई भूमिका नहीं है।
उन्होंने कहा कि कुछ असामाजिक तत्वों ने अपने स्वार्थ के लिए ये कृत्य किए हैं। सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है और वन विभाग एवं पुलिस दोनों ही इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे।
असम-अरुणाचल प्रदेश सीमा का जिक्र करते हुए मंत्री ने स्पष्ट किया कि अंतर-राज्यीय सीमा विवाद को वन विनाश से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सीमा विवाद एक अलग मामला है और गुवाहाटी हाई कोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार क्षेत्रीय समिति तंत्र के माध्यम से इसका समाधान किया जा रहा है। लेकिन सीमा विवाद से परे, वनों और पेड़ों की रक्षा की जानी चाहिए। सीमा विवाद के नाम पर पेड़ों की कटाई को कोई भी उचित नहीं ठहरा सकता।
उन्होंने दोहराया कि सरकार असम के वन संसाधनों की रक्षा करने और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के लिए जिम्मेदार लोगों को न्याय के कटघरे में लाने के लिए प्रतिबद्ध है।




