नई दिल्ली, 25 सितंबर । यरुशलम की पूर्व डिप्टी मेयर फ्लूर हसन नहौम ने गाजा युद्ध को लेकर संयुक्त राष्ट्र में बढ़ती इजरायल की आलोचना पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र काफी समय पहले ही अपनी विश्वसनीयता खो चुका है, खासकर तब जब उसकी एजेंसियों में से एक यूनाइटेड नेशंस रिलीफ एंड वर्क्स एजेंसी फॉर पालेस्टाइन रिफ्यूजीज इन द नियर ईस्ट' (यूएनआरडब्ल्यूए) पर 2023 में नरसंहार में हिस्सा लेने के आरोप लगे।
आईएएनएस से विशेष बातचीत में फ्लूर हसन नहौम ने कहा कि मुझे लगता है कि गाजा युद्ध के दौरान संयुक्त राष्ट्र की ओर से इजरायल पर कूटनीतिक दबाव पहले ही अपने चरम पर पहुंच चुका है। उन्होंने भुखमरी और नरसंहार को लेकर ऐसे दावे किए, जिन्हें हम गलत मानते हैं। इसके अलावा भी हमारे खिलाफ कई प्रस्ताव पारित किए गए, जबकि दुनिया के दूसरे बेहद घातक संघर्षों को नजरअंदाज किया गया, जिनका गाजा युद्ध से कोई लेना-देना नहीं है। इसलिए मेरी नजर में संयुक्त राष्ट्र लंबे समय से अपनी काफी विश्वसनीयता खो चुका है।
उन्होंने कहा कि खासकर तब, जब खुद उनके यहां आतंकियों को काम पर रखने के आरोप सामने आए। यूएनआरडब्ल्यूए, जो संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों में से एक है, उसके कर्मचारियों पर 2023 के नरसंहार में हिस्सा लेने के आरोप भी लगे थे।
गाजा की वर्तमान की चुनौतियों को लेकर फ्लूर हसन नहौम ने कहा कि मुझे लगता है कि इसके लिए कई चीजें एक साथ करनी होंगी। सबसे पहले हमें हमास के इस्लामिक कट्टरपंथी नेतृत्व को सत्ता से हटाना होगा। उन्हें हथियार छोड़ने होंगे और यह भी सुनिश्चित करना होगा कि वे सत्ता में न रहें या लोगों का खाना चुराकर उससे अपने लड़ाकों को पैसे न दें। गाजा पट्टी में हालात माफिया जैसी भ्रष्ट व्यवस्था के हैं। जब तक इससे नहीं निपटा जाता, तब तक हम पुनर्निर्माण और गाजा के लोगों के बेहतर भविष्य की दिशा में असल में आगे नहीं बढ़ सकते।
उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता कि अमेरिका और ईरान फिलहाल किसी समझौते के करीब हैं। पहले भी ऐसे प्रयास हो चुके हैं। अब राष्ट्रपति ट्रंप को भी समझ आ गया होगा कि उन लोगों के साथ समझौता करना आसान नहीं है, जिन पर हिंसा और तबाही फैलाने के आरोप लगते रहे हैं। अगर कोई समझौता होता भी है, तो वह लंबे समय तक टिकने वाला नहीं होगा। इजरायल चाहता है कि ईरान की जितनी भी संवर्धित (एनरिच्ड) परमाणु सामग्री है, या जिसका संवर्धन किया जाना है, उसे पूरी तरह नष्ट कर दिया जाए, ताकि भविष्य में उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर कोई खतरा न रहे।"
भारत और इजरायल के मजबूत रिश्तों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारत निश्चित रूप से हमारा एक मजबूत साझेदार, बड़ा व्यापारिक साझेदार और दोस्त है। भविष्य कैसा होगा, इसे तय करने में भारत को निश्चित रूप से भूमिका निभाने की स्थिति में होना चाहिए।
हमारे पास कई महत्वाकांक्षी और काफी उम्मीद जगाने वाले प्लान हैं। इनमें आईएमईसी शामिल है, जो भारत, मध्य पूर्व, इजरायल और यूरोप को जोड़ने वाला कॉरिडोर है। इसके अलावा कई दूसरे व्यापारिक समझौते भी हैं। चार देशों का समूह आईटूयूटू भी है, जिसमें इजरायल, अमेरिका, यूएई और भारत शामिल हैं। इसी तरह कई चार देशों वाले और कई देशों के बीच सहयोग के समझौते हैं, जिनके जरिए हम इस पूरे क्षेत्र और वास्तव में दुनिया को आगे ले जा सकते हैं।












