बड़वानी। मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के सेंधवा में बुधवार सुबह प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने प्रमुख कपास और जिनिंग कारोबारी अशोक तायल व उनके परिवार से जुड़े कई परिसरों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। ईडी की अलग-अलग टीमों ने सुबह 6 बजे जगन्नाथपुरी कॉलोनी स्थित निवास, पुराने एबी रोड वाले मकान और वरला रोड स्थित 'राजराजेश्वर जिनिंग फैक्ट्री' में पहुंचकर एक साथ जांच शुरू की। सेंधवा पुलिस अधीक्षक पद्मविलोचन शुक्ल ने कार्रवाई की पुष्टि की है।


करोड़ों रुपये के लोन घोटाले से जुड़े मामले में जांच की संभावना

सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय जांच एजेंसी (ED) की यह बड़ी कार्रवाई 'राजराजेश्वर वेंचर्स' से जुड़े करोड़ों रुपये के संदिग्ध लोन और वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित हो सकती है।


कार्रवाई के मुख्य बिंदु

ईडी की टीमों ने तायल बंधुओं के ठिकानों से वित्तीय दस्तावेजों, बैंक खातों और लेन-देन के रिकॉर्ड्स को खंगाला। तायल परिवार का मध्य प्रदेश के अलावा महाराष्ट्र में भी कपास और जिनिंग का बड़ा कारोबार है। निमाड़ एग्रो पार्क का संचालन भी इसी परिवार से जुड़ा हुआ है।


8 महीने पहले CBI ने भी की थी कार्रवाई, 13 करोड़ का लोन फर्जीवाड़ा आया था सामने

सेंधवा में ईडी की इस दबिश के बाद करीब आठ महीने पहले हुई केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की कार्रवाई की चर्चाएं फिर गर्म हो गई हैं। सीबीआई ने 13 करोड़ रुपये के कथित लोन घोटाले में एफआईआर (FIR) दर्ज कर छापेमारी की थी।


सीबीआई जांच के प्रमुख तथ्य

2019 में नाबार्ड की फूड प्रोसेसिंग फंड योजना के तहत 31 करोड़ की एग्रो-प्रोसेसिंग क्लस्टर परियोजना के लिए 13 करोड़ का लोन और खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय से 10 करोड़ का अनुदान लिया गया था। आरोप है कि लोन की रकम का इस्तेमाल तय प्रोजेक्ट पर करने के बजाय फर्जी समझौतों के जरिए अन्य कंपनियों के खातों में ट्रांसफर कर दिया गया। सितंबर 2024 में लोन खाता एनपीए (NPA) घोषित होने के बाद ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर मामला सीबीआई को सौंपा गया था, जिसमें अर्पित तायल, निकुंज तायल, अशोक तायल और अंकित तायल समेत कुछ बैंक अधिकारियों को आरोपी बनाया गया था।


फिलहाल ईडी की टीम जब्त दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल कर रही है, जिसके आधार पर जल्द ही आधिकारिक बयान और आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।