न्यूटाउन। पश्चिम बंगाल के न्यूटाउन में मंत्री दिलीप घोष ने बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की टिप्पणियों, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर राहुल गांधी के बयान, एसआईआर से जुड़ी समस्याओं और दिल्ली में आयोजित विपक्षी इंडी गठबंधन की रैली को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। इस दौरान उन्होंने धार्मिक हस्तियों को अपने बयानों में सावधानी बरतने की सलाह दी, वहीं कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन पर भी निशाना साधा।धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री दिलीप घोष ने कहा कि देश में लगभग हर बात पर विवाद खड़ा हो जाता है। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने विचार रखे हैं, उन्हें किसी पर थोपा नहीं है। धार्मिक हस्तियाँ समाज में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं और बड़ी संख्या में लोग उनकी बातों पर विश्वास करते हैं। ऐसे में उन्हें अपने शब्दों का चयन बेहद सावधानी से करना चाहिए। उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनकी टिप्पणियों से किसी की धार्मिक या सामाजिक भावनाएँ आहत न हों।
वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की टिप्पणी पर दिलीप घोष ने कांग्रेस नेता की आलोचना की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी पिछले 12 वर्षों से लगातार सरकार की आलोचना कर रहे हैं। यदि उन्होंने सरकार की आलोचना करने के बजाय रचनात्मक कार्यों पर ध्यान दिया होता, तो आज कांग्रेस की स्थिति इतनी खराब नहीं होती।
एसआईआर के मुद्दे पर मंत्री ने कहा कि बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जिनके नाम मतदाता सूची में शामिल हैं, फिर भी उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि कई लोगों को अपने माता-पिता से जुड़े दस्तावेज जुटाने में दिक्कत हो रही है। कुछ लोगों के पास अपने दावों को साबित करने के लिए जरूरी कागजात और रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे लोग भी हैं, जिनके पूर्वज लंबे समय से इसी क्षेत्र में रहते थे और मतदान करते थे, लेकिन उनके पास अपने आवश्यक दस्तावेज नहीं हैं। ऐसी समस्याओं का सामना करने वाले लोगों की संख्या हजारों में है। उन्होंने कहा कि इन लोगों की परेशानियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
इसके अलावा, दिल्ली में विपक्षी गठबंधन इंडी की रैली पर तंज कसते हुए दिलीप घोष ने कहा कि इस आयोजन में केवल राहुल गांधी ही नहीं, बल्कि पूरा विपक्षी गठबंधन बेनकाब हो गया। रैली में 10 लाख लोगों के पहुंचने की उम्मीद थी, लेकिन करीब 10 हजार लोग ही जुटे। उन्होंने मल्लिकार्जुन खड़गे और ममता बनर्जी के भाषणों पर भी कटाक्ष किया और कहा कि रैली में लोगों की प्रतिक्रिया विपक्ष की लोकप्रियता पर सवाल खड़े करती है।














