नई दिल्ली। कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है। धनतेरस का पर्व इस बार 6 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा करने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि धनतेरस पर नई चीजें खरीदने से घर में सुख-समृद्धि आती है और मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। इस बीच कालकाजी पीठाधीश्वर सुरेंद्रनाथ अवधूत ने इसके पीछे की मान्यता के बारे में बताया और शुभ मुहूर्त की जानकारी दी है।

कालकाजी पीठाधीश्वर सुरेंद्रनाथ अवधूत ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि इस बार त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 10 बजकर 30 मिनट से शुरू होगी और अगले दिन 7 नवंबर को सुबह 10 बजकर 47 मिनट तक रहेगी। धनतेरस की पूजा प्रदोष काल में की जाती है, इसलिए यह पर्व 6 नवंबर को ही मनाया जाएगा।

पूजा के शुभ मुहूर्त के बारे में उन्होंने बताया कि 6 नवंबर को शाम 6 बजकर 2 मिनट से रात 7 बजकर 57 मिनट तक पूजा का शुभ मुहूर्त रहेगा। प्रदोष काल शाम 5 बजकर 33 मिनट से रात 8 बजकर 9 मिनट तक रहेगा। इस समय की गई पूजा अत्यंत शुभ फल देने वाली मानी जाएगी। साथ ही इस समय की गई खरीदारी भी अत्यंत शुभ मानी जाएगी।

महंत जी ने कहा कि धनतेरस के दिन लोग सोना-चांदी और जेवर खरीदते हैं। जो लोग सोना-चांदी नहीं खरीद पाते, वे बर्तन खरीदकर भी इस परंपरा को निभाते हैं। इस दिन की गई खरीदारी को समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है।

कालकाजी पीठाधीश्वर ने बताया कि धनतेरस पर देवताओं के चिकित्सक और आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि का समुद्र मंथन के दौरान प्राकट्य हुआ था। इसलिए धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है, क्योंकि स्वास्थ्य ही सबसे उत्तम धन माना जाता है।

उन्होंने कहा कि सभी धर्मों का पालन और सभी अनुष्ठानों को संपन्न करने के लिए स्वस्थ शरीर का होना सबसे जरूरी है। यदि शरीर स्वस्थ नहीं होगा, तो व्यक्ति किसी भी कार्य को ठीक से नहीं कर पाएगा। इसी कारण धनतेरस पर स्वास्थ्य के देवता की पूजा का विशेष महत्व है।