मंदसौर, ललित शंकर धाकड़। जिले के एक निजी अस्पताल में प्रसव के दौरान कथित चिकित्सीय लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। ग्राम मोनगरा निवासी सुनील कुमार प्रजापति ने कलेक्टर को शिकायत देकर आरोप लगाया है कि शांतिराज हॉस्पिटल में इलाज के दौरान उनके नवजात बच्चे की मौत हो गई, जबकि उनकी 24 वर्षीय पत्नी अंजना की हालत बिगड़ने के बाद दोनों किडनी फेल हो गईं। पीड़ित परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।


शिकायत के मुताबिक अंजना का गर्भावस्था के दौरान स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. कपिल शर्मा के पास उपचार चल रहा था। परिजनों का कहना है कि 2 जुलाई को हुई सोनोग्राफी में मां और गर्भस्थ शिशु दोनों को स्वस्थ बताया गया था। इसके बाद 3 जुलाई को अंजना को अस्पताल में भर्ती कराया गया और 4 जुलाई को सी-सेक्शन के जरिए प्रसव कराया गया।


परिवार का आरोप है कि ऑपरेशन से पहले अंजना का ब्लड प्रेशर लगातार बढ़ रहा था और तबीयत बिगड़ रही थी, इसके बावजूद जरूरी जांच और विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श नहीं लिया गया। गंभीर स्थिति में समय रहते उच्च स्तरीय अस्पताल रेफर नहीं करने का भी आरोप लगाया गया है। परिजनों के अनुसार ऑपरेशन के बाद नवजात की मौत हो गई और अंजना की हालत लगातार गंभीर होती गई।


बाद में महिला को इंदौर के अरविंदो अस्पताल रेफर किया गया, जहां उपचार के दौरान दोनों किडनी फेल होने की जानकारी सामने आई। परिजनों के मुताबिक महिला को कई बार डायलिसिस और वेंटिलेटर सपोर्ट देना पड़ा। लंबे उपचार के बाद फिलहाल उसका इलाज अहमदाबाद के एक अस्पताल में जारी है।


पीड़ित परिवार ने अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल उठाए हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि डिस्चार्ज समरी में महिला का ब्लड ग्रुप गलत दर्ज किया गया और मेडिकल रिकॉर्ड में कथित रूप से छेड़छाड़ की गई। परिवार ने पूरे प्रकरण की 17 बिंदुओं पर विस्तृत जांच की मांग की है।


शिकायतकर्ता ने मांग की है कि जांच मंदसौर, नीमच और रतलाम से बाहर के विशेषज्ञ चिकित्सकों की स्वतंत्र मेडिकल कमेटी से कराई जाए। साथ ही जांच में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित डॉक्टर के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई, अस्पताल का लाइसेंस निरस्त करने और अस्पताल को सील करने की मांग भी की गई है।


फिलहाल ये सभी आरोप पीड़ित परिवार की ओर से कलेक्टर को दी गई शिकायत पर आधारित हैं। मामले में अस्पताल प्रबंधन और संबंधित चिकित्सक का पक्ष सामने आने तथा जांच पूरी होने के बाद ही चिकित्सीय लापरवाही की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।