अयोध्या। राम मंदिर में दर्शन और आरती की व्यवस्था में शरद ऋतु के अनुसार बदलाव किया गया है। दर्शन के समय में परिवर्तन को लेकर राम मंदिर ट्रस्ट की धार्मिक समिति के सदस्य राजकुमार दास ने कहा कि देश के सभी प्रमुख मंदिरों में ग्रीष्मकालीन और शरद ऋतु के लिए दर्शन की अलग-अलग व्यवस्था होती है। यही परंपरा अयोध्या के राम मंदिर में भी अपनाई जा रही है।
उन्होंने कहा कि हमारे ठाकुर श्री रामलला सरकार बाल स्वरूप में विराजमान हैं। बाल रूप में उनकी सेवा का विशेष महत्व है। वैसे तो ठाकुर जी की सेवा कोई नहीं कर सकता क्योंकि वही तो चींटी से लेकर हाथी तक, समस्त संसार का भरण-पोषण करने वाले हैं। वही जगत के पालक और जगत नियंता हैं लेकिन भक्त उन्हें वात्सल्य भाव से देखते हैं और इसी भाव से उनकी सेवा की जाती है।
राजकुमार दास ने बताया कि शरद ऋतु में रातें बड़ी और दिन छोटे हो जाते हैं। इसी मौसमी बदलाव को ध्यान में रखते हुए प्रातःकालीन दर्शन की अवधि को थोड़ा बढ़ाया गया है। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखकर व्यवस्था समिति ने यह निर्णय लिया है।
यह निर्णय ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष पूज्य स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज के निर्देश पर लिया गया है। नई व्यवस्था के अनुसार, जिन श्रद्धालुओं के पास आरती पास है, वे तो दर्शन करेंगे ही, साथ ही जो सामान्य श्रद्धालु बिना पास के आते हैं, वे भी अब आरती के दौरान दर्शन कर सकेंगे। पहले आरती के समय दर्शन रोक दिया जाता था लेकिन अब आरती चलती रहेगी और श्रद्धालु दर्शन करते हुए आगे निकलते रहेंगे, जिससे अधिक से अधिक भक्तों को सुगमता से दर्शन मिल सकेगा।
वहीं, महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को लेकर राजकुमार दास ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि आदि कवि हैं। उन्होंने भगवान राम के चरित्र को महाकाव्य के रूप में विश्व को दिया, जिसे श्रीमद् वाल्मीकि रामायण के नाम से जाना जाता है। उनकी जयंती पहले भी कई जगह मनाई जाती रही है लेकिन रामलला के दिव्य और भव्य मंदिर में स्थापित होने के बाद इस वर्ष यह जयंती विशेष रूप से भव्य रूप में मनाई जाएगी।
उन्होंने कहा कि इस अवसर पर वाल्मीकि रामायण के विशिष्ट विद्वानों का सत्र भी आयोजित किया जाएगा क्योंकि हमारे ठाकुर जी सबको जोड़कर साथ लेकर चलने वाले हैं। गोस्वामी तुलसीदास जी ने लिखा है कि प्रभु जमीन पर बैठे हैं, वृक्ष के नीचे बैठे हैं और उन्होंने बानर-भालुओं तक को अपने समान प्रतिष्ठा दी है।
राजकुमार दास ने कहा कि भगवान राम का रामत्व इसी में है कि उन्होंने स्वयं ईश्वर होते हुए भी कभी यह बोध नहीं होने दिया कि वे ईश्वर हैं। उन्होंने एक आदर्श मनुष्य के रूप में समाज के हर वर्ग को जोड़कर समरसता का संदेश दिया। समाज में समरसता बनी रहे और सभी लोग सौहार्दपूर्ण जीवन व्यतीत करें, यही प्रयास है।

















