नई दिल्ली। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के सदस्यों ने मंगलवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान, उनके इस्तीफे की मांग की गई और मतदाता सूचियों के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) को रद्द करने की मांग की।आईएएनएस से ​​बात करते हुए सीपीआई नेता डी. राजा ने कहा कि सीपीआई इंडिया गठबंधन के अन्य सहयोगियों और विभिन्न जन संगठनों व वर्ग-आधारित संगठनों के साथ मिलकर एसआईआर के खिलाफ अपना अभियान तेज कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर जो जायज चिंताएं थी, उन पर अब तक कोई ध्यान नहीं दिया गया है।

राजा ने कहा कि इंडिया गठबंधन के एक हिस्से के रूप में हमारी पार्टी पूरे देश में अपना अभियान तेज कर रही है। सीपीआई और अन्य जन संगठन व वर्ग-आधारित संगठन भी पूरे देश में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और अभियान चला रहे हैं क्योंकि वास्तव में कुछ गंभीर मुद्दे मौजूद हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि सीईसी ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा दे देना चाहिए था लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया। पार्टी ने इस मामले को लेकर भारत के राष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है।

उन्होंने कहा कि हमने राष्ट्रपति से संपर्क किया, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की लेकिन कुछ नहीं हो रहा है। इसलिए अब एकमात्र रास्ता यही है कि हम जनता के पास जाएं, उन्हें एकजुट करें और अपने अभियान व संघर्ष को और तेज करें।

राजा ने कहा कि पार्टी सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया का इंतजार करेगी। साथ ही, उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से लगभग 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग पर अपने संवैधानिक दायित्वों को निभाने में विफल रहने का आरोप लगाया।

सीपीआई के राष्ट्रीय सचिव गिरीश चंद्र शर्मा ने पार्टी की मांगों को दोहराते हुए एसआईआर प्रक्रिया को रद्द करने और मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि एसआईआर को रद्द करें और ज्ञानेश कुमार को हटाएं। किसानों, मजदूरों, युवाओं, बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े अन्य मुद्दों के साथ-साथ, ये दो मुख्य मांगें हैं जिनके कारण पूरे देश में असंतोष है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जनता में व्यापक असंतोष होने के बावजूद ज्ञानेश कुमार ने इस्तीफा क्यों नहीं दिया, और एसआईआर पुनरीक्षण प्रक्रिया को रद्द न करने के लिए चुनाव आयोग की आलोचना की।

शर्मा ने बताया कि लोकतांत्रिक और वामपंथी संगठन एसआईआर के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों में लगातार हिस्सा ले रहे हैं। इनमें ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन, ऑल इंडिया यूथ फेडरेशन और नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन विमेन जैसे संगठन शामिल हैं। इस बीच सीपीआई सांसद पी. संतोष कुमार ने मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया में 'फॉर्म 6' के इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई। उन्होंने तर्क दिया कि आवेदन को आगे बढ़ाने के लिए इस फॉर्म में दिए गए सभी कॉलम भरना अनिवार्य था।

उन्होंने कहा कि फॉर्म 6 अनिवार्य था, क्योंकि उन कॉलम को भरे बिना आवेदन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती। इसलिए यह कहना गलत है कि यह अनिवार्य नहीं था। भले ही यह फैसला सर्वसम्मति से लिया गया हो या बहुमत से, इससे 'निर्वाचन पंजीकरण नियम, 1960' के उल्लंघन का आरोप नहीं बदल जाता।