उमरिया, तपस गुप्ता। जिले के पाली जनपद क्षेत्र में निजी कंपनियों की प्रस्तावित कोयला खदानों को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। मरवाटोला-7 कोल माइंस परियोजना के तहत रमा सीमेंट इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड को सतही अधिकार (Surface Right) दिए जाने की प्रक्रिया के विरोध में सोमवार को औढ़ेडा, मालाचुआ सहित कई गांवों के करीब 350 किसान और ग्रामीण एसडीएम न्यायालय पहुंचे। उन्होंने लिखित आपत्तियां प्रस्तुत कर परियोजना से जुड़ी प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
किसानों का कहना है कि प्रस्तावित खदान परियोजना से उनकी कृषि भूमि, आजीविका और भविष्य प्रभावित होगा। उनका आरोप है कि प्रभावित परिवारों के लिए अब तक न तो मुआवजा राशि तय की गई है, न पुनर्वास की स्पष्ट योजना बनाई गई है और न ही रोजगार को लेकर कोई ठोस नीति सामने आई है। ऐसे में कंपनी को सतही अधिकार दिए जाने की प्रक्रिया उचित नहीं है।
आपत्तियों में ग्रामीणों ने भूमि के वास्तविक नुकसान का निष्पक्ष आकलन कराने, ग्रामसभा की सहमति सुनिश्चित करने तथा वनाधिकार अधिनियम (एफआरए) और पेसा अधिनियम के सभी प्रावधानों का पालन करने की मांग की है। साथ ही परियोजना से जुड़े सभी अभिलेख सार्वजनिक करने और प्रत्येक प्रभावित परिवार को वैधानिक लाभ उपलब्ध कराने की भी मांग की गई।
भारतीय किसान संघ के जिला अध्यक्ष अभिषेक अग्रवाल ने कहा कि करीब 340 ग्रामीण परिवारों को नोटिस जारी किए गए हैं, जबकि कई आवश्यक प्रक्रियाएं अभी पूरी नहीं हुई हैं। उनका कहना है कि स्थापना निधि, मुआवजा निर्धारण, पर्यावरणीय स्वीकृतियां और अन्य कानूनी औपचारिकताएं पूरी किए बिना आगे बढ़ाई जा रही कार्रवाई नियमों के अनुरूप नहीं है। इसी कारण किसानों ने एसडीएम न्यायालय में सामूहिक रूप से अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं।
दिनभर एसडीएम कार्यालय में किसानों की भीड़ लगी रही। ग्रामीणों ने कहा कि वे विकास कार्यों के विरोधी नहीं हैं, लेकिन अपनी जमीन और अधिकारों से समझौता नहीं करेंगे। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि सभी आपत्तियों पर निष्पक्ष सुनवाई कर कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाए। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी की गई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।




