आगरा। विश्व प्रसिद्ध स्मारक ताजमहल परिसर में एक बार फिर बंदरों के आतंक और प्रशासनिक लापरवाही का मामला सामने आया है। रविवार सुबह ताजमहल देखने पहुंची दक्षिण कोरिया (रिपब्लिक ऑफ कोरिया) की महिला पर्यटक किम मेह पर एक बंदर ने हमला कर उन्हें बुरी तरह काट लिया, जिससे उनके हाथ से तेज खून बहने लगा। घटना के बाद करीब एक घंटे तक एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी, जिससे तड़पती पर्यटक को लेकर उनके साथी परेशान होते रहे।


कैसे हुई घटना?

शू-कवर और पानी लेने के दौरान हमला: रिपब्लिक ऑफ कोरिया निवासी किम मेह अपने साथी के साथ रविवार सुबह लगभग 7 बजे ताजमहल देखने पहुंची थीं। उन्होंने ऑनलाइन टिकट ली थी। जब उनका साथी टिकट विंडो के पास स्थित काउंटर से विदेशी पर्यटकों को मिलने वाला निशुल्क शू-कवर और पानी की बोतल लेने गया, तब किम सीढ़ियों के पास खड़ी होकर इंतजार कर रही थीं।


अचानक बंदर ने काटा: इसी दौरान एक आवारा बंदर ने उन पर हमला कर दाएं हाथ में गहरा घाव कर दिया। चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोगों ने बंदर को भगाया, लेकिन तब तक काफी खून बह चुका था।


एंबुलेंस चालक की बड़ी लापरवाही; बैटरी कार से भेजा अस्पताल

1 घंटे तक तड़पती रही पर्यटक: घटना के तुरंत बाद वहां मौजूद केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जवानों और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के कर्मचारियों ने एंबुलेंस चालक राजीव को फोन किया। चालक ने बार-बार 5 और 10 मिनट में आने का बहाना बनाया, लेकिन वह एक घंटे तक मौके पर नहीं पहुंचा।


प्राथमिक उपचार और अस्पताल रवानगी: अत्यधिक दर्द और खून बहने से बेहाल कोरियाई पर्यटक को ताजमहल परिसर में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (डिस्पेंसरी) ले जाया गया, जहां फर्स्ट-एड दिया गया। इसके बाद एंबुलेंस न मिलने पर उन्हें बैटरी चालित कार (ई-रिक्शा) से शांति मांगलिक अस्पताल भिजवाया गया।


सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल और ASI का एक्शन

वायरल वीडियो: घटना से जुड़े दो वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं। 55 सेकंड के पहले वीडियो में एक स्थानीय युवक बंदरों के बढ़ते आतंक और सुरक्षा इंतजामों पर सवाल उठाता दिख रहा है। 15 सेकंड के दूसरे वीडियो में घायल महिला दर्द से कराहती दिख रही है और उनका साथी बेबस होकर लोगों से रास्ता पूछ रहा है।


सीएमओ को भेजी गई रिपोर्ट: वरिष्ठ संरक्षण सहायक (ASI) कलंदर बिंद ने बताया कि ड्यूटी पर मौजूद एंबुलेंस चालक राजीव को बार-बार कॉल करने के बावजूद वह समय पर नहीं आया। इस गंभीर लापरवाही के खिलाफ मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को लिखित रिपोर्ट भेजकर कार्रवाई की मांग की गई है।