मुरैना, देवेन्द्र सिंह राजपूत। पोरसा थाना क्षेत्र के अंतर्गत एससी/एसटी एक्ट के तहत दर्ज एक मुकदमे को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्राम खोयला के रहने वाले एक बुजुर्ग ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए एसडीओपी अंबाह को लिखित आवेदन सौंपा है। इस मामले में पोरसा थाने में पदस्थ एक पुलिसकर्मी पर कार्रवाई के एवज में और विरोधी पक्ष से कथित तौर पर पैसे लेकर झूठा मुकदमा दर्ज कराने के आरोप लगाए गए हैं।
दस हजार रुपये लेने और झूठी एफआईआर का गंभीर आरोप
शिकायतकर्ता बच्छूलाल जाटव ने एसडीओपी को दिए गए आवेदन में बताया कि ग्राम खोयला में घटी एक घटना के सिलसिले में पोरसा थाने में पदस्थ पुलिसकर्मी सीताराम राजावत ने एससी/एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई करने के नाम पर उनसे कथित रूप से 10,000 रुपये लिए थे। बच्छूलाल का आरोप है कि इसके बाद उन्हें पता चला कि दूसरे पक्ष के राधाचरण शर्मा ने कथित तौर पर 1 लाख रुपये का लेनदेन कर उनके नाती पुष्पेंद्र के खिलाफ यह झूठी एफआईआर दर्ज कराई है। परिवार का कहना है कि पुलिस ने एकतरफा कार्रवाई करते हुए उनके नाती को इस मामले में गलत तरीके से फंसाया है।
एसडीओपी अंबाह से निष्पक्ष जांच की गुहार
अपने नाती को न्याय दिलाने के लिए बच्छूलाल जाटव ने एसडीओपी अंबाह से पूरे घटनाक्रम की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि पुलिसकर्मी द्वारा कथित तौर पर लिए गए पैसों और इस पूरे लेन-देन के आरोपों की सच्चाई सामने आनी चाहिए। साथ ही, पुष्पेंद्र के खिलाफ दर्ज कराई गई एफआईआर की कड़ियों और साक्ष्यों की दोबारा निष्पक्ष पड़ताल कर उचित कानूनी कदम उठाए जाएं।
जांच अधिकारी की भूमिका और आगे की कार्रवाई
इस पूरे मामले के दस्तावेजों के अनुसार, इस प्रकरण की जांच का जिम्मा निरीक्षक जयदीप सिंह भदौरिया को सौंपा गया है। हालांकि, शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए इन गंभीर आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है और न ही अभी तक संबंधित पुलिसकर्मी या दूसरे पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने आया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस विभाग इस अंदरूनी शिकायत पर क्या रुख अपनाता है और निष्पक्ष जांच में क्या नए तथ्य सामने आते हैं।
















