बरेली। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने मंगलवार को कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर जमकर हमला बोला और उन्हें गैर-जिम्मेदार बताते हुए उन पर चुनाव आयोग पर जनता का भरोसा तोड़ने की कोशिश करने का आरोप लगाया।नड्डा ने ये टिप्पणियां उत्तर प्रदेश के बरेली में भाजपा की 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता दूर करो' रैली को संबोधित करते हुए कीं। विपक्ष पर निशाना साधते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद ही भारत के चुनाव आयोग और सर्वोच्च न्यायालय को वैश्विक मान्यता मिली है।
उन्होंने कहा कि कुछ गैर-जिम्मेदार दलों, विशेषकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने चुनाव आयोग पर जनता के भरोसे को तोड़ने का प्रयास किया है।
नड्डा ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की आलोचना करते हुए उनकी तुलना उन स्कूली बच्चों से की, जो कम अंक आने पर शिक्षकों को दोष देते हैं। उन्होंने कहा, “जब भी राहुल चुनाव हारते हैं तो चुनाव आयोग को दोष देते हैं, जबकि चुनाव जीतने पर खुद को होशियार समझते हैं।”
केंद्रीय मंत्री ने चुनाव कराने में चुनाव आयोग के प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि चुनाव आयोग ने गुजरात के गिर वन और अरुणाचल प्रदेश के मालोगम में रहने वाले लोगों के लिए मतदान संभव बनाया, भले ही वहां का इलाका दुर्गम है।
भाजपा के पूर्व अध्यक्ष ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के शासनकाल में लागू आपातकाल का जिक्र करते हुए कहा, "इंदिरा गांधी ने बिना किसी मुकदमे के 22 महीने के लिए जितने लोगों को जेल भेजा, उनकी संख्या ब्रिटिश शासन के दौरान जेल में बंद लोगों की संख्या से भी अधिक थी और अब राहुल गांधी लोकतंत्र बचाने की बात करते हैं।"
उन्होंने बताया कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने मतपत्रों से ईवीएम प्रणाली की ओर रुख किया और अब वे खुद मशीनों को दोष दे रहे हैं। राहुल गांधी और अखिलेश यादव आज वैसी ही राजनीति कर रहे हैं, जैसे कॉलेज के छात्र करते थे।
इसके अलावा नड्डा ने दावा किया कि विपक्ष द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) के तहत हटाए गए बताए जा रहे 13 करोड़ मतदाता एएसडीडी (अनुपस्थित, स्थानांतरित, डुप्लिकेट और मृत) थे।
उन्होंने कहा, “बांग्लादेशी घुसपैठिए चुनाव आयोग से डरकर भाग गए। इसलिए जब बीएलओ (मतदान अधिकारी) जनगणना के लिए आए, तो पता चला कि तीन करोड़ मतदाता अनुपस्थित थे, छह करोड़ 30 लाख मतदाता स्थानांतरित किए गए थे और एक करोड़ मतदाता फर्जी थे। दो करोड़ 80 लाख मतदाता मृत थे। यही एसआईआर (अवैध मतदाता सूची) है, जिसका विरोध किया जा रहा है।”
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा अवैध मतदाताओं का पता लगाने, उन्हें सूची से हटाने और निर्वासित करने के निर्देश का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “जबकि कांग्रेस ऐसे मतदाताओं को मान्यता देना और उन्हें औपचारिक रूप देना चाहती है।”
एसआईआर प्रक्रिया को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के साथ इंडिया ब्लॉक की बैठक का जिक्र करते हुए नड्डा ने कहा, “उन्होंने अभी तक कोई सबूत पेश नहीं किया है।”
उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस फैसले को भी याद किया, जिसमें रायबरेली निर्वाचन क्षेत्र से इंदिरा गांधी के चुनाव को अमान्य घोषित किया गया था। उन्होंने कहा, "इसके परिणामस्वरूप इंदिरा गांधी ने कानून में बदलाव किया और प्रतिबद्ध न्यायपालिका की मांग की।"
कांग्रेस पर संविधान का मजाक उड़ाने का आरोप लगाते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा, "राजीव गांधी ने मनमोहन सिंह की अध्यक्षता वाले योजना आयोग को मजाकियों का समूह कहा था। वहीं उनके बेटे राहुल गांधी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आयोग द्वारा लाए गए अध्यादेश को फाड़ दिया था।"
केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने ही चुनाव आयुक्त के चयन में विपक्ष के नेता को शामिल किया था, हालांकि उन्होंने कांग्रेस के नेतृत्व वाली पिछली सरकार पर चुनाव आयोग के सदस्यों, जैसे टीएन शेषन, एमएस गिल और नवीन चावला को अपने पक्ष में फैसले लेने के लिए इनाम देने का आरोप लगाया।
इसके अलावा, जेपी नड्डा ने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि राज्य विधानसभा चुनावों में वह अपने ही निर्वाचन क्षेत्र से हार गईं। इंडिया ब्लॉक की रैली की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें वे नेता शामिल हैं जिन्हें जनता ने सत्ता से बेदखल कर दिया है, जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं और जो जमानत पर बाहर हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, "देश को केवल नागरिक ही चलाएंगे, घुसपैठिए नहीं। घुसपैठियों का समर्थन करने वालों को जनता बाहर निकाल देगी।"













