छिंदवाड़ा, जीशान अंसारी। रक्षाबंधन के दूसरे दिन निकलने वाले ऐतिहासिक भुजलिया जुलूस में रविवार को एक बार फिर छिंदवाड़ा की गंगा-जमुनी तहजीब और कौमी एकता की मिसाल देखने को मिली। छोटी बाजार स्थित बड़ी माता मंदिर से गाजे-बाजे के साथ भुजलिया का भव्य जुलूस निकाला गया। ढोल-नगाड़ों और बैंड की धुन के बीच घोड़ों पर सवार आल्हा-ऊदल और पृथ्वीराज चौहान की सेनाएं जुलूस में शामिल हुईं।
जुलूस छोटी बाजार से शुरू होकर आजाद चौक, करबला चौक होते हुए बड़ा तालाब पहुंचा। जुलूस का सबसे प्रमुख आकर्षण आजाद चौक रहा, जहां हर वर्ष की परंपरा को कायम रखते हुए हिंदू और मुस्लिम समाज के लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर भाईचारे और आपसी सौहार्द का संदेश दिया। मुस्लिम समाज की ओर से जुलूस का फूल-मालाओं से स्वागत किया गया।
जुलूस में शामिल लोककला मंडलियों के कलाकारों के साथ श्री गुप्तु उस्ताद बड़ी माता और छोटी माता व्यायामशाला के अखाड़ों के कलाकारों ने पारंपरिक शस्त्र विद्या और हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया। कलाकारों के करतब देखने के लिए शहर के मुख्य मार्गों पर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ी। इस बार जुलूस में पिछले वर्ष की तुलना में युवाओं की भागीदारी भी अधिक दिखाई दी।
बड़ा तालाब मैदान में जुलूस के समापन के बाद मुख्य समारोह आयोजित किया गया। यहां आल्हा-ऊदल और पृथ्वीराज चौहान की सेनाओं के बीच प्रतीकात्मक युद्ध का मंचन किया गया। इसके बाद बहन चंद्रावली द्वारा भाइयों को रक्षासूत्र बांधने की पारंपरिक रस्म निभाई गई।
समारोह में सांसद बंटी साहू, पूर्व मंत्री दीपक सक्सेना, महापौर विक्रम अहाके सहित कई जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में शहरवासी मौजूद रहे। ऐतिहासिक भुजलिया जुलूस ने एक बार फिर छिंदवाड़ा की सांस्कृतिक परंपरा, वीरता और सामाजिक भाईचारे की तस्वीर पेश की।




