छतरपुर, सुबोध त्रिपाठी। आंगनबाड़ी में नौकरी दिलाने के नाम पर रिश्वतखोरी का मामला सामने आने के बाद छतरपुर के नवागत कलेक्टर मृणाल मीना ने कड़ा रुख अपनाया है। कलेक्टर ने भ्रष्टाचार के आरोप में घिरे महिला एवं बाल विकास (WCD) विभाग के अधिकारी दिनेश दीक्षित के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उनके निलंबन का प्रस्ताव सागर संभाग के कमिश्नर को भेजा था। कलेक्टर की इस सिफारिश पर सागर संभाग के कमिश्नर अनिल सुचारी ने त्वरित संज्ञान लेते हुए अधिकारी दिनेश दीक्षित को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। निलंबन का आदेश जारी होते ही जिले के प्रशासनिक हलके और भ्रष्ट अधिकारियों में हड़कंप मच गया है।
नौकरी के नाम पर रिश्वत मांगने के लगे थे गंभीर आरोप
मिली जानकारी के अनुसार, महिला एवं बाल विकास अधिकारी दिनेश दीक्षित पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका की भर्ती प्रक्रिया के दौरान नौकरी लगाने के बदले रिश्वत मांगने और लेने के गंभीर आरोप लगे थे। शिकायत सामने आने और प्राथमिक तथ्यों की जांच के बाद मामले की सत्यता पाई गई। नवागत कलेक्टर मृणाल मीना ने भ्रष्टाचार पर 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाते हुए कड़ी कार्रवाई की रूपरेखा तैयार की और बिना किसी देरी के निलंबन प्रस्ताव संभाग आयुक्त को प्रेषित कर दिया।
जीरो टॉलरेंस नीति के तहत की गई कार्रवाई
कलेक्टर मृणाल मीना की इस त्वरित और कड़ी कार्रवाई से स्पष्ट संदेश गया है कि जिले में किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार या अनिमियत्तता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कमिश्नर अनिल सुचारी द्वारा निलंबन आदेश पर मुहर लगाए जाने के बाद विभाग में खलबली मच गई है। प्रशासन का कहना है कि शासकीय योजनाओं और भर्तियों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ऐसे सख्त कदम आगे भी जारी रहेंगे।




