वॉशिंगटन। अमेरिका में विज्ञान और तकनीक को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 6 अरब डॉलर से अधिक की योजनाओं का ऐलान किया है। इसके तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, न्यूक्लियर-पावर्ड स्पेस एक्सप्लोरेशन और बायोमेडिकल साइंस में रिसर्च को तेज करने के लिए सरकारी एजेंसियों, टेक्नोलॉजी कंपनियों, यूनिवर्सिटीज और परोपकारी संस्थाओं को एक साथ लाया गया है।'साइंस: ए न्यू गोल्डन एज समिट' में ये घोषणाएं की गईं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से उभरती हुई टेक्नोलॉजी में अमेरिकी लीडरशिप को मजबूत करने के लिए एक बड़े प्रोग्राम की रूपरेखा पेश की गई।
व्हाइट हाउस की एक फैक्ट शीट के अनुसार, इन पहलों में 'जेनेसिस मिशन' के लिए 11 इंडस्ट्री पार्टनर्स से 2.4 बिलियन डॉलर के कंप्यूटिंग रिसोर्स और टेक्नोलॉजी सपोर्ट शामिल हैं। इस मिशन का मकसद वैज्ञानिक खोजों को तेज करने के लिए सुपरइंटेलिजेंस का इस्तेमाल करना है।
एनवीडिया ने 1 बिलियन डॉलर, एएमडी ने 500 मिलियन डॉलर और ओपनएआई ने 200 मिलियन डॉलर देने का वादा किया। एंथ्रोपिक और गूगल ने 150-150 मिलियन डॉलर देने का वादा किया, जबकि अन्य प्रतिभागियों में अमेजन वेब सर्विसेज, माइक्रोन और कई टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां शामिल थीं।
इससे ऊर्जा, हेल्थकेयर, अंतरिक्ष और अन्य क्षेत्रों में वैज्ञानिक चुनौतियों पर काम कर रही 15 से अधिक फेडरल एजेंसियों को सपोर्ट मिलेगा। व्हाइट हाउस के साइंस एडवाइजर माइकल क्रैट्सियोस ने कहा, "आज का दिन अमेरिकी वैज्ञानिक जगत के लिए उतना ही क्रांतिकारी है, जितना कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद फेडरल रिसर्च इकोसिस्टम को फिर से तैयार करने के समय था।"
उन्होंने आगे कहा, "आज घोषित की गई कोशिशें हमारे साइंस इकोसिस्टम में अरबों डॉलर का निवेश करेंगी ताकि अब मौजूद नए वैज्ञानिक अवसरों को साकार किया जा सके।"
प्रशासन ने वैज्ञानिक कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और वर्कफोर्स ट्रेनिंग का विस्तार करने के लिए यूनिवर्सिटी, इंडस्ट्री और जॉर्जिया राज्य को शामिल करते हुए 1 बिलियन डॉलर के निवेश की भी घोषणा की।
10 राज्यों की 14 से अधिक यूनिवर्सिटी एक रीजनल कंप्यूटिंग कंसोर्टियम में भाग लेंगी, जबकि नॉर्थ और साउथ कैरोलिना की पांच यूनिवर्सिटी एक और रिसर्च कंप्यूटिंग हब स्थापित करेंगी। नेशनल साइंस फाउंडेशन और डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी ने एडवांस्ड वैज्ञानिक उपकरणों और ऑटोनॉमस लेबोरेटरी के लिए 100 मिलियन डॉलर से अधिक की घोषणा की।
क्वांटम कंप्यूटिंग के क्षेत्र में, एनर्जी डिपार्टमेंट ने 215 मिलियन डॉलर की एक प्रतियोगिता शुरू की, जिसका मकसद ऐसे फॉल्ट-टॉलरेंट क्वांटम कंप्यूटर विकसित करना है, जो वैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण समस्याओं को हल करने में सक्षम हों। नासा और एनर्जी डिपार्टमेंट ने न्यूक्लियर-पावर्ड स्पेसक्राफ्ट और लूनर एनर्जी सिस्टम विकसित करने की योजनाओं की भी घोषणा की।
इन प्रोजेक्ट्स में 'स्पेस रिएक्टर-1' शामिल है, जो 2028 में मंगल मिशन के लिए एक न्यूक्लियर-पावर्ड स्पेसक्राफ्ट है, और 'लूनर रिएक्टर-1', जो चंद्रमा पर प्रस्तावित न्यूक्लियर फिशन रिएक्टर है। बायोमेडिकल रिसर्च को एक और बड़ा बढ़ावा मिला है। नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ, एनर्जी डिपार्टमेंट और बायोहब ने मिलकर सेल्स और बायोलॉजिकल सिस्टम्स के वर्चुअल मॉडल बनाने के लिए 1.8 अरब डॉलर का एक प्रोग्राम शुरू किया है।
बीमारियां कैसे पनपती हैं, इन प्रोग्रामों से बेहतर ढंग से समझने में आसानी होगी। प्रशासन ने 'जेनेसिस मिशन फेलोशिप' के तहत 100 मिलियन डॉलर देने का भी ऐलान किया है। यह फेलोशिप ऐसे तेज रफ्तार डॉक्टोरल प्रोग्राम्स को सपोर्ट करेगी, जिनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को साइंटिफिक और इंजीनियरिंग विषयों के साथ जोड़ा गया है।
अन्य पहलों में होनहार स्कूली छात्रों, शुरुआती करियर वाले रिसर्चर्स और पारंपरिक रिसर्च संस्थानों से बाहर काम करने वाले वैज्ञानिकों के लिए मौके शामिल हैं।
एक नए 'एक्स-लैब्स कंसोर्टियम' को मल्टी-डिसिप्लिनरी रिसर्च टीमों को सपोर्ट करने के लिए इंडस्ट्री और परोपकारी संस्थाओं से 310 मिलियन डॉलर से ज्यादा की मदद मिलेगी।
व्हाइट हाउस ने कहा कि ये घोषणाएं पहले किए गए फेडरल निवेशों पर आधारित हैं। इनमें 'जेनेसिस मिशन' को सपोर्ट करने के लिए 5 अरब डॉलर की प्रतिबद्धता और स्वतंत्र रिसर्च लैबोरेटरीज के लिए नेशनल साइंस फाउंडेशन की 1.5 अरब डॉलर की पहल शामिल है।
व्हाइट हाउस ने इस प्रोग्राम को सरकार, इंडस्ट्री, यूनिवर्सिटीज और परोपकारी संस्थाओं के बीच एक साझेदारी बताया है। इसका मकसद अमेरिकी तकनीकी नेतृत्व को बनाए रखना और वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की एक नई पीढ़ी तैयार करना है।











