उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने 8 उम्मीदवारों की सूची जारी कर आगामी विधानसभा चुनाव (2027) का रणनीतिक संदेश दे दिया है। विपक्षी गठबंधन के 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) दांव के काट के रूप में भाजपा ने अपने इस उम्मीदवार चयन में पिछड़े, दलित और सवर्ण—तीनों वर्गों को संतुलित साधते हुए सामाजिक संतुलन का मॉडल पेश किया है।
उम्मीदवारों का सामाजिक एवं क्षेत्रीय विभाजन
भाजपा द्वारा घोषित 8 प्रत्याशियों में ओबीसी, दलित, ब्राह्मण, क्षत्रिय और महिला प्रतिनिधित्व को प्रमुखता दी गई है:
पिछड़ा वर्ग (OBC)
- धर्मपाल सिंह: बरेली की आंवला सीट से विधायक और कैबिनेट मंत्री। लोधी समाज में गहरी पैठ के साथ पश्चिम यूपी का मजबूत चेहरा।
- प्रकाश पाल: संगठनात्मक पृष्ठभूमि और क्षेत्रीय पकड़ वाले नेता।
- श्रुति गंगवार: ओबीसी वर्ग का युवा एवं महिला चेहरा।
दलित वर्ग
- प्रियंका सिंह रावत: बाराबंकी की पूर्व सांसद, जो दलित वर्ग के साथ-साथ महिला प्रतिनिधित्व को मजबूती देती हैं।
- विद्यासागर सोनकर: पूर्वांचल से आने वाले वरिष्ठ दलित नेता और पार्टी संगठन के अनुभवी चेहरे।
सवर्ण वर्ग (ब्राह्मण एवं क्षत्रिय)
- गोपी कृष्ण पांडेय व राधाकांत ओझा: दो प्रमुख ब्राह्मण चेहरे, जो राज्य में ब्राह्मण समीकरण को साधने और संदेश देने के लिहाज से शामिल किए गए हैं।
- राम प्रताप सिंह चौहान: प्रदेश महामंत्री और पश्चिम क्षेत्र के प्रभारी, जो क्षत्रिय समाज और संगठन के सक्रिय नेतृत्व का प्रतिनिधित्व करते हैं।
2027 विधानसभा चुनाव के नजरिए से मुख्य सियासी मायने
विपक्ष के पिछड़ा-दलित लामबंदी अभियान का मुकाबला करने के लिए भाजपा ने न केवल ओबीसी और दलितों को बड़ी जगह दी है, बल्कि अपने कोर सवर्ण वोटबैंक को भी पूरी तरजीह दी है। लिस्ट में भारी भरकम नामों की जगह संगठन में काम कर चुके कैडर आधारित चेहरों और पदाधिकारियों को प्राथमिकता देकर कार्यकर्ताओं में सकारात्मक संदेश देने का प्रयास किया गया है। प्रियंका सिंह रावत और श्रुति गंगवार के रूप में दो महिलाओं का चयन 'महिला केंद्रित योजनाओं' और 'आधी आबादी' को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की रणनीति को दर्शाता है। पश्चिम यूपी, रुहेलखंड से लेकर पूर्वांचल तक के सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवारों का चयन किया गया है।












