उज्जैन। उज्जैन में आयोजित भव्य दीपोत्सव कार्यक्रम में शामिल होने से पूर्व भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के साथ उज्जैन के दो प्रमुख अखाड़ों के वरिष्ठ संतों से आशीर्वाद लेने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने नाव में सवार होकर बड़ा उदासीन अखाड़े के युवा महंत सत्यानंद महाराज और श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा (दत्त अखाड़ा) के गादीपति पीर श्रीमहंत सुंदरपुरी महाराज से पृथक-पृथक मुलाकात की।
उदासीन अखाड़ा: 26 लाख का पैकेज छोड़ संत बने महंत सत्यानंद से मुलाकात
नितिन नवीन ने मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष के साथ बड़ा उदासीन अखाड़े पहुंचकर महंत सत्यानंद महाराज और महंत देवीदास से भेंट की तथा अखाड़े में स्थित जगद्गुरु श्री चंद्र आचार्य जी के मंदिर में पूजन-अर्चन किया: बिहार के सुपौल निवासी 27 वर्षीय युवा महंत सत्यानंद ने 2019 में दीक्षा ली थी। वे ₹26 लाख सालाना के बहुराष्ट्रीय कंपनी (MNC) के जॉब ऑफर को ठुकराकर अध्यात्म के मार्ग पर आए थे। इससे पूर्व वे काशी, गया और हरिद्वार कुंभ मेला प्रबंधन के दौरान महंत पद की जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। महंत सत्यानंद ने बताया कि 20 सितंबर को जगद्गुरु श्री चंद्र भगवान का 532वां जन्मोत्सव समारोह है, जिसके उपलक्ष्य में भाजपा नेताओं ने दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
दत्त अखाड़ा: 3 वर्ष की उम्र में संन्यास लेने वाले पीर सुंदरपुरी महाराज से भेंट
दीपोत्सव से पूर्व भाजपा अध्यक्ष और मुख्यमंत्री ने श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा (दत्त अखाड़ा) के गादीपति पीर श्रीमहंत सुंदरपुरी महाराज से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया: फरवरी 2018 में स्वामी परमानंदपुरी जी के ब्रह्मलीन होने के बाद से अखाड़े की गादी संभाल रहे श्रीमहंत सुंदरपुरी ने मात्र 3 वर्ष की बाल्यावस्था में गृहस्थ जीवन का त्याग कर नागा संन्यास परंपरा ग्रहण की थी।
अखाड़ों के दौरे के पीछे का कूटनीतिक व धार्मिक महत्व
आगामी सिंहस्थ (कुंभ) 2028 की तैयारियों और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पद को लेकर साधु-संतों के बीच चल रहे मतभेदों के बीच इस दौरे को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है: वर्तमान में उदासीन अखाड़ा महानिर्वाणी अखाड़े के पक्ष में है, जबकि दत्त अखाड़ा निरंजनी अखाड़े के महंत रवींद्रपुरी जी को अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष मानता है। अखाड़ों के बीच तालमेल बैठाने और आगामी उज्जैन सिंहस्थ मेले को भव्य व सुचारू रूप से संपन्न कराने के उद्देश्य से भाजपा नेतृत्व ने दोनों अखाड़ों के प्रमुखों से संवाद स्थापित किया। संतों ने भी सभी 13 अखाड़ों की एकजुटता के साथ दिव्य सिंहस्थ आयोजन की प्रार्थना की।




