कोलकाता। दुर्गा पूजा को लेकर बार-बार अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोप में सीपीआई (एम) के प्रदेश सचिव मोहम्मद सलीम के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
भाजपा ने उत्तरी कोलकाता के ताला पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस के अनुसार, एफआईआर भाजपा की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है। मामले की जांच भी जारी है।
सलीम के खिलाफ शिकायत भाजपा प्रवक्ता और पार्टी नेता सप्तर्षि चौधरी ने दर्ज कराई है।
उनका दावा है कि सीपीआई (एम) के प्रदेश सचिव और पूर्व सांसद ने दुर्गा पूजा को लेकर अपमानजनक टिप्पणी करके हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है।
सप्तर्षि ने सोमवार को कहा कि जिस तरह से वह मां दुर्गा के बारे में लगातार टिप्पणियां कर रहे हैं, उससे हम हिंदू असहज महसूस कर रहे हैं। हिंदू समुदाय के बारे में उनकी बातों से हम स्तब्ध हैं। मैंने मां दुर्गा के बारे में उनकी टिप्पणियों के विरोध में ताला पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। हम पुलिस की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।
चोरेबागान सर्वजनिन दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ में 19 श्रद्धालुओं की मौत को लेकर सलीम ने सत्ताधारी दल और राज्य सरकार पर निशाना साधा है।
सलीम ने कहा कि इतनी मौतें, इतने घायल! हम सब स्तब्ध हैं। कोई नहीं चाहता था कि त्योहार के बीच ऐसा मातम छा जाए। मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करने के लिए शब्द नहीं हैं। अब घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की व्यवस्था की जानी चाहिए। स्थानीय लोगों ने बचाव कार्य में अपनी पूरी कोशिश की। एम्बुलेंस और पुलिस वाहनों की कमी के कारण सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध नहीं था क्योंकि वहां यातायात बंद कर दिया गया था। इसके बावजूद, स्थानीय लोगों ने ओला-उबर बुक करके सभी को अस्पताल पहुंचाया। सरकार को मृतकों और घायलों के परिवारों को शीघ्र और स्पष्ट जानकारी प्रदान करनी चाहिए।
सत्ताधारी दल और राज्य सरकार ने इन सभी आरोपों का खंडन किया है। इससे पहले, सलीम ने एक सरकारी विज्ञापन में दुर्गा प्रतिमा पर एक अतिरिक्त हाथ की मौजूदगी को लेकर भाजपा पर कटाक्ष किया था।
सीपीआई(एम) के राज्य सचिव ने कहा था कि आज तक भाजपा और राज्य सरकार यह तय नहीं कर पाई है कि दुर्गा प्रतिमा के कितने हाथ हैं। नास्तिक भी जानते हैं कि दुर्गा के दस हाथ हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार एक सार्वजनिक त्योहार को सरकारी त्योहार बना रही है। वे सड़कों को रंगवाने, पंडालों के लिए गुजरात से कपड़ा मंगवाने और ठेकेदारों को बुलाने पर करोड़ों रुपए खर्च करके शरद उत्सव को नवरात्रि उत्सव में बदलने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसा क्यों हो रहा है?

















