इंदौर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने इंदौर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव प्रसाद हसानी के पक्ष में एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने डॉ. हसानी को 62 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त किए जाने के राज्य सरकार के आदेश को पूरी तरह निरस्त कर दिया है। न्यायमूर्ति संदीप एन. भट्ट की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए यह साफ कर दिया कि डॉ. हसानी नियमों के तहत 65 वर्ष की आयु तक अपनी सेवाएं जारी रखने के पूर्ण पात्र हैं।
जनवरी 2026 के शासकीय आदेश को डॉ. हसानी ने दी थी चुनौती
डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर राज्य सरकार द्वारा 30 जनवरी 2026 को जारी किए गए उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें 31 जुलाई 2026 को 62 वर्ष की आयु पूरी होने पर सेवानिवृत्त करने के निर्देश दिए गए थे। याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि डॉ. हसानी ने वर्ष 1999 में संविदा ग्रामीण चिकित्सा अधिकारी के रूप में अपने शासकीय करियर की शुरुआत की थी, जिसके बाद वर्ष 2005 में उनकी सेवाओं को नियमित किया गया था। उन्होंने अपने सेवाकाल का एक लंबा समय क्लीनिकल (मरीजों के इलाज) सेवाओं में बिताया और बाद में वे मुख्य ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी तथा वर्तमान में CMHO जैसे उच्च प्रशासनिक पदों पर कार्यरत हुए।
कोर्ट में दोनों पक्षों की दलीलें और पूर्व के फैसलों का हवाला
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि मध्यप्रदेश शासन के मौजूदा नीतिगत फैसलों के अनुसार, मेडिकल अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु को बढ़ाकर 65 वर्ष निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही पूर्व में हुए 'डॉ. कांतिलाल साहू बनाम मध्यप्रदेश शासन' सहित कई अन्य समान मामलों में भी हाईकोर्ट इसी प्रकार के फैसले सुनाकर डॉक्टरों को राहत दे चुका है। दूसरी तरफ, राज्य सरकार के शासकीय अधिवक्ता ने इन तर्कों का विरोध करते हुए दलील दी कि 65 वर्ष की आयु तक सेवा का लाभ पाने के लिए चिकित्सा विभाग के नियमों में कुछ विशेष शर्तें निर्धारित की गई हैं, और याचिकाकर्ता उन तकनीकी शर्तों को पूरी तरह से पूरा नहीं करते हैं।
हाईकोर्ट की टिप्पणी: अनुभवी डॉक्टरों की उपलब्धता बनाए रखना है आयु बढ़ाने का उद्देश्य
हाईकोर्ट की एकलपीठ ने दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने और दस्तावेजों का बारीकी से अध्ययन करने के बाद राज्य सरकार की आपत्तियों को अमान्य कर दिया। अदालत ने माना कि डॉ. हसानी वर्ष 1999 से लगातार स्वास्थ्य विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और उनके मामले के मुख्य तथ्य पूर्व में दिए गए न्यायिक उदाहरणों से पूरी तरह मेल खाते हैं। माननीय न्यायाधीश ने अपने आदेश में विशेष रूप से रेखांकित किया कि सरकार द्वारा मेडिकल अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु को 62 से बढ़ाकर 65 वर्ष करने का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में अनुभवी और वरिष्ठ डॉक्टरों की निरंतर उपलब्धता बनाए रखना था, ताकि आम जनता को इसका लाभ मिल सके।
कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर राज्य सरकार को दिए आवश्यक निर्देश
हाईकोर्ट ने अपने अंतिम फैसले में स्पष्ट तौर पर कहा कि राज्य सरकार द्वारा 30 जनवरी 2026 को जारी किया गया सेवानिवृत्ति का आदेश विधिसम्मत और न्यायसंगत नहीं है, इसलिए इसे तत्काल प्रभाव से खारिज (निरस्त) किया जाता है। इसके साथ ही अदालत ने डॉ. माधव प्रसाद हसानी को उनकी 65 वर्ष की आयु पूरी होने तक गरिमापूर्ण तरीके से शासकीय सेवा में बने रहने की अनुमति प्रदान कर दी है। हाईकोर्ट ने इस याचिका को पूरी तरह स्वीकार करते हुए मध्यप्रदेश शासन को इस संबंध में जल्द से जल्द आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए हैं।


