अम्मान। जॉर्डन की सेना ने बताया कि गुरुवार सुबह देश की ओर दागी गई ईरान की आठ मिसाइलों को उसकी एयर डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही मार गिराया।सेना के बयान में कहा गया कि यह कार्रवाई तय रक्षा और सैन्य प्रक्रियाओं के तहत की गई, ताकि देश की संप्रभुता बनी रहे, हवाई क्षेत्र सुरक्षित रहे और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
बयान के मुताबिक, इस घटना में किसी की मौत या घायल होने की खबर नहीं है और न ही किसी तरह के संपत्ति नुकसान की जानकारी मिली है। जहां-जहां मिसाइलों का मलबा गिरा, वहां रॉयल इंजीनियरिंग कॉर्प्स की टीमों ने पहुंचकर उसे सुरक्षित तरीके से हटाया और इलाके को सुरक्षित किया।
सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, सेना ने कहा कि जॉर्डन की सशस्त्र सेनाएं पूरी तरह सतर्क हैं। वे लगातार देश के हवाई क्षेत्र पर नजर रखे हुए हैं और किसी भी खतरे का तय नियमों के अनुसार जवाब देंगी।
इस बीच, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने गुरुवार तड़के (भारतीय समय के अनुसार) बताया कि अमेरिका ने ईरान पर एक और दौर के हमले किए हैं।
सेंट्रल कमांड ने 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए कहा, "अमेरिकी समय के अनुसार दोपहर तीन बजे अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ दूसरे चरण के हमले शुरू किए। इन हमलों का निशाना ईरान की वे सैन्य क्षमताएं हैं, जिनका इस्तेमाल होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों के लिए खतरा पैदा करने में किया जाता है।"
इससे पहले बुधवार (स्थानीय समय) को सेंट्रल कमांड ने बताया था कि सुबह 6 बजे ईस्टर्न टाइम पर ईरान के खिलाफ हमलों का पहला दौर शुरू किया गया।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, करीब 90 मिनट तक चले इस अभियान में अमेरिकी सेना ने ग्रेटर तुंब द्वीप पर मौजूद तटीय रक्षा प्रणालियों और क्रूज मिसाइलों के भंडारण और लॉन्च साइटों पर सटीक हमले किए।
वहीं, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने बुधवार को कहा कि उसने जवाबी कार्रवाई करते हुए बहरीन और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला किया। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, इन हमलों में सैन्य ढांचे, लड़ाकू विमानों के शेल्टर, अहम कमांड सेंटर और रणनीतिक ड्रोन को निशाना बनाया गया।
आईआरजीसी ने अपने बयान में कहा कि उसकी एयरोस्पेस फोर्स ने जॉर्डन के अल-अजराक स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हमला किया। यह कार्रवाई अमेरिका की नई सैन्य कार्रवाई के जवाब में की गई। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए (आईआरएनए) के मुताबिक, इस हमले में उन शेल्टरों को नष्ट कर दिया गया, जहां अमेरिकी एफ-15, एफ-16 और एफ-35 लड़ाकू विमान तथा कई एमक्यू-9 रणनीतिक ड्रोन तैनात थे।




