ढाका। ढाका के जात्राबारी पुलिस स्टेशन के पास हुए विस्फोट के कुछ दिनों बाद पुलिस ने राजधानी के दक्षिण केरानीगंज इलाके में छापेमारी की। इस दौरान देसी बम बनाने में इस्तेमाल होने वाला विस्फोटक सामान और 9,000 कागज के मुखौटे बरामद किए, जिसके चलते एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया। मीडिया रिपोर्टों में यह जानकारी दी गई है।
ढाका ट्रिब्यून के अनुसार, आरोपी की पहचान 30 वर्षीय जाहिद हसन एमोन के रूप में हुई है।
श्यामपुर मॉडल पुलिस स्टेशन के सूत्रों के अनुसार, 19 सितंबर को जात्राबारी पुलिस स्टेशन के सामने एक देसी बम विस्फोट होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस को एमोन की इस घटना में कथित संलिप्तता के बारे में जानकारी मिली। उसे शुक्रवार को बाघापुर इलाके से गिरफ्तार किया गया।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जांचकर्ताओं ने पांच किलोग्राम कंचे, दो किलोग्राम एक इंच की नुकीली कीलें, 20 लाल सेलोफेन टेप और 11 काले सेलोफेन टेप भी जब्त किए।
इसके अलावा, पुलिस ने तीन कार्टन में पैक किए गए 9,000 पेपर मास्क, मास्क पहनने के लिए इस्तेमाल होने वाले इलास्टिक के 30 पैकेट और जैपान ब्रांड का ब्लेंडर और जार बरामद किया है, जिनका कथित तौर पर कच्चे बम बनाने के लिए सामग्री पीसने में इस्तेमाल किया गया था।
19 सितंबर के विस्फोट और आरोपियों की कथित भूमिका की जांच फिलहाल जारी है।
इससे पहले, एक रिपोर्ट में कहा गया था कि बांग्लादेश को एक ऐसे आतंकी खतरे का सामना करना पड़ रहा है जो नव-जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश के सदस्य बोमारू मामून के नेतृत्व वाले पांच सदस्यीय गिरोह से कहीं अधिक व्यापक है, क्योंकि अप्रैल 2026 तक प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों के कम से कम 311 सदस्य अभी भी फरार हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस संख्या में नव-जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश के 16 सदस्य, मूल जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश के 185 सदस्य, अंसार अल इस्लाम के 83 और हरकत-उल-जिहाद-अल-इस्लामी बांग्लादेश के 16 सदस्य शामिल हैं।
'स्ट्रिंगर एशिया' की एक रिपोर्ट के अनुसार, ये महज पुलिस की निगरानी सूची में शामिल कुछ अलग-थलग नाम नहीं हैं, बल्कि जिहादी उग्रवाद की क्रमिक पीढ़ियों को दर्शाते हैं, जिनमें अफगानिस्तान से जुड़े हुजी-आई-बी के दिग्गज, इस्लामिक स्टेट से प्रेरित नियो-जेएमबी के कैडर और अंसार अल इस्लाम के डिजिटल रूप से केंद्रित ऑपरेटिव शामिल हैं।
रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है कि कई वर्षों तक ऐसा प्रतीत होता रहा कि बांग्लादेश ने अपनी जिहादी समस्या का समाधान कर लिया है। सुरक्षा बलों ने नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया था, वरिष्ठ कमांडरों को मार गिराया था या गिरफ्तार कर लिया था, और 2016 के होली आर्टिसन बेकरी हत्याकांड के लिए जिम्मेदार संगठनात्मक ढांचे को ध्वस्त कर दिया था। नव-जमात-उल मुजाहिदीन बांग्लादेश, इस्लामिक स्टेट से प्रेरित वह गुट जिसने कुछ समय के लिए ढाका को अंतरराष्ट्रीय जिहाद के सबसे प्रमुख मोर्चों में से एक बना दिया था, अब बिखरे हुए भगोड़ों और ऑनलाइन हमदर्दों तक सिमट गया प्रतीत होता था। ढाका के आसपास फिर से दिखाई दे रहे बम विस्फोट संकेत देते हैं कि यह जीत उतनी निर्णायक नहीं थी जितनी प्रचारित की गई थी।











