सतना। मध्य प्रदेश के सतना केंद्रीय जेल से जुड़ा एक बेहद चौंकाने वाला और सुरक्षा व्यवस्था को तार-तार करने वाला सनसनीखेज मामला सामने आया है। जेल के भीतर बंद कैदियों तक गांजा और शराब जैसी प्रतिबंधित सामग्रियां पहुंचाने और इसके एवज में मोटी रिश्वत लेने की कथित बातचीत का एक ऑडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह हाईप्रोफाइल मामला सामने आने और शुरुआती जांच के बाद पुलिस प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए सहायक उप निरीक्षक (ASI) राजेंद्र चौधरी को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया है। इस बड़ी दंडात्मक कार्रवाई के बाद से ही जेल स्टाफ और स्थानीय पुलिस महकमे में हड़कंप का माहौल है।
सोशल मीडिया पर जो ऑडियो क्लिप जमकर वायरल हो रही है, उसमें जेल के अंदर बंद कैदियों तक नशीले पदार्थ पहुंचाने की पूरी प्लानिंग और पैसों का लेन-देन साफ सुनाई दे रहा है। ऑडियो में कथित तौर पर 100 ग्राम और 25 ग्राम गांजा के साथ-साथ विदेशी शराब की बोतल बैरक के अंदर पहुंचाने की बात हो रही है। इस अवैध काम के एवज में संबंधित व्यक्ति के लिए 5-5 हजार रुपये (कुल 10,000 रुपये) की व्यवस्था करने का सौदा तय किया जा रहा है।
इस पूरी बातचीत के दौरान एक मोबाइल नंबर (9303476507) का भी स्पष्ट उल्लेख आता है। जब साइबर सेल और पुलिस टीम ने इस नंबर की तकनीकी जांच की, तो इसके तार सीधे पुलिस विभाग के एएसआई से जुड़े पाए गए। ऑडियो रिकॉर्डिंग में एक व्यक्ति बड़ी ही बेबाकी और रसूख के साथ जेल के भीतर मादक पदार्थ सुरक्षित तरीके से कैदियों तक लैंड कराने (पहुंचाने) की पूरी जिम्मेदारी लेता सुनाई दे रहा है।
ऑडियो वायरल होते ही पुलिस मुख्यालय और जेल मुख्यालय दोनों में हड़कंप मच गया। सतना सेंट्रल जेल जैसी संवेदनशील जगह पर सुरक्षा व्यवस्था और जेल नियमावली की धज्जियां उड़ते देख वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया। ड्यूटी में घोर लापरवाही, पद के दुरुपयोग और आपराधिक संदिग्ध गतिविधियों में संलिप्तता के प्रथम दृष्टया साक्ष्य मिलने पर उच्च अधिकारियों ने एएसआई राजेंद्र चौधरी को सस्पेंड करने के आदेश जारी कर दिए।
केंद्रीय जेल जैसी अति सुरक्षित जगह पर, जहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता, वहां इस तरह गांजे और शराब की 'होम डिलीवरी' की बात सामने आना जेल प्रशासन की सुरक्षा और चेकिंग व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जेल एसपी लीना कोष्टा ने भी इस पर कड़ा संज्ञान लिया है। पुलिस अब निलंबित एएसआई के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) खंगाल रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि जेल के भीतर और बाहर इस रैकेट की मुख्य कमान किसके हाथ में थी और इसमें कौन-कौन से जेल प्रहरी या अधिकारी शामिल हैं।



