नई दिल्ली। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में उस समय बेहद हल्का-फुल्का और खुशनुमा माहौल बन गया, जब अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अचानक 'बाबा बागेश्वर' (पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री) का जिक्र कर दिया। जैसे ही प्रधानमंत्री के मुख से बाबा बागेश्वर का नाम निकला, पूरे ऑडिटोरियम में मौजूद युवा छात्र-छात्राएं, प्रोफेसर, केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी हंसी से लोटपोट हो गए और पूरा हॉल ठहाकों से गूंज उठा।

समारोह में देश के युवा वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने आधुनिक तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और इंसानी सोच के अंतर पर अपने विचार व्यक्त किए।


'मन की बात' जानने के संदर्भ में PM ने की मजेदार टिप्पणी

अपने संबोधन के दौरान तकनीक की क्षमताओं और सीमाओं पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि आज का युवा हर सवाल का जवाब गूगल और एआई में ढूंढता है। लेकिन जब बात सामने वाले के 'मन की बात' को बिना कहे जान लेने की आती है, तो लोगों का ध्यान तुरंत तकनीक से हटकर बाबा बागेश्वर की तरफ चला जाता है।

प्रधानमंत्री ने हंसते हुए कहा कि आज के दौर में जहां एल्गोरिदम और डेटा का राज है, वहीं लोग यह जानने के लिए उत्सुक रहते हैं कि पर्ची पर क्या लिखा है और मन में क्या चल रहा है। इस अनोखी तुलना को सुनते ही IIT के छात्र अपनी हंसी नहीं रोक पाए और पूरा परिसर तालियों और ठहाकों से गूंज उठा।


नवाचार और भारतीय मेधा पर दिया जोर

इस खुशनुमा पल के बाद प्रधानमंत्री ने गंभीर विषयों पर भी अपने विचार रखे। उन्होंने दीक्षांत समारोह में उपाधि प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि IIT के युवाओं में न केवल देश की समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता है, बल्कि वे विश्व स्तर पर भारत की मेधा का लोहा मनवा रहे हैं।

उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे तकनीक का उपयोग समाज के अंतिम व्यक्ति के जीवन को आसान बनाने के लिए करें। नवाचार (Innovation) और रिसर्च पर ध्यान केंद्रित करते हुए भारत को 'आत्मनिर्भर' बनाने में अपनी अहम भूमिका निभाएं।