इंदौर, रविकांत वर्मा। कलेक्टर जनसुनवाई में धोखाधड़ी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। एक युवती द्वारा खुद को अपर कलेक्टर और मुख्यमंत्री निवास में पदस्थ अधिकारी बताकर एक युवक से लाखों रुपये की ठगी करने की शिकायत की गई है। पीड़ित ने मामले की जांच कर कार्रवाई और अपनी रकम वापस दिलाने की मांग की है।


शिकायतकर्ता ने बताया कि वह न्यायालय में वाहन चालक के रूप में कार्यरत है। कुछ समय पहले उसके संपर्क में बाणगंगा क्षेत्र की एक युवती आई, जिसने खुद को प्रशासनिक अधिकारी बताते हुए प्रभावशाली पहचान का दावा किया। युवती ने उसे सरकारी जमीन उसके नाम कराने का झांसा दिया और भरोसा जीतने के लिए जमीन से संबंधित दस्तावेज भी उपलब्ध कराए।


पीड़ित के अनुसार युवती ने पहले काम कराने के नाम पर 5 लाख रुपये लिए और बाद में ढाई लाख रुपये की अतिरिक्त मांग की। जमीन का नामांतरण हो जाने का दावा करते हुए उसने कुछ दस्तावेज भी सौंपे, लेकिन बाद में जांच में सभी दस्तावेज फर्जी निकले और जमीन का कोई नामांतरण नहीं हुआ था।


शिकायतकर्ता ने बताया कि युवती क्षेत्र में बड़े अधिकारी की तरह रौब झाड़ती थी और लोगों को खुद के प्रशासन से जुड़े होने का विश्वास दिलाती थी। उसने अपर कलेक्टर लिखी गाड़ी के साथ फोटो भी खिंचवा रखी थी, जिससे लोग आसानी से उसके झांसे में आ जाते थे।


मामले में एडीएम रोशन राय ने इसे गंभीर अपराध बताते हुए संबंधित थाना पुलिस को जांच के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का मानना है कि आरोपी युवती की गिरफ्तारी के बाद अन्य फर्जीवाड़ों का भी खुलासा हो सकता है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।