नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है। कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है। पंचांग हिंदू काल-गणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है। 22 सितंबर 2026 को भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि रात 9:43 बजे तक है। इसके बाद द्वादशी तिथि शुरू हो जाएगी। मंगलवार सुबह 6:19 बजे सूर्योदय और शाम 6:19 बजे सूर्यास्त होगा। वहीं, दोपहर 3:43 चंद्रोदय और रात 2:56 बजे चंद्रास्त होगा।
इस दिन परिवर्तनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। भगवान विष्णु (विशेषकर उनके वामन स्वरूप) की पूजा करना सबसे अधिक फलदायी माना गया है। मान्यता है कि इस दिन चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु क्षीर सागर में अपनी करवट बदलते हैं, इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी कहते हैं।
पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्य उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। यह आकाश मंडल का 12वां नक्षत्र है। सिंह राशि के 26 डिग्री 40 मिनट से लेकर कन्या राशि के 10 डिग्री 00 मिनट तक फैला हुआ है। इसके स्वामी सूर्य देव हैं। इस नक्षत्र के देवता अर्यमा (देवताओं और पितरों के प्रमुख) हैं। इस नक्षत्र में जन्मे जातक तेजस्वी, महत्वाकांक्षी, परोपकारी और नेतृत्व क्षमता से परिपूर्ण होते हैं।
मंगलवार शाम 4:29 बजे तक अतिगंड योग रहेगा। ज्योतिष शास्त्र और पंचांग में बताए गए 27 नित्य योगों में से यह छठा योग है, जिसे एक अशुभ और संघर्षकारी योग माना जाता है। जब सूर्य और चंद्रमा की दूरियों का योग 66 डिग्री 40 मिनट से 80 डिग्री 00 मिनट के बीच होता है, तब यह योग बनता है। इस योग के स्वामी चंद्रमा हैं लेकिन इसकी प्रकृति तामसिक और चुनौतीपूर्ण मानी गई है। इस योग के दौरान विवाह, नया व्यापार, गृह प्रवेश या कृषि से जुड़े अहम कार्य करने से बचना चाहिए।
इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:55 से दोपहर 12:43 बजे तक रहेगा। यह दिन का सबसे शुभ और फलदाई समय माना जाता है। आमतौर पर यह लगभग 48 मिनट (या दिनमान के अनुसार गणना किया गया आठवां मुहूर्त) होता है। माना जाता है कि इस मुहूर्त में किए गए कार्यों से सभी प्रकार के अशुभ प्रभाव या दोष स्वतः नष्ट हो जाते हैं। जब सूर्य ठीक सिर के ऊपर रहते हैं तब अभिजीत मुहूर्त की बेला होती है।
मंगलवार को अमृतकाल रात 10:00 से रात 11:44 बजे तक रहेगा। ज्योतिष और पंचांग के अनुसार, अमृतकाल एक अत्यंत शुभ, मंगलकारी और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर समयावधि (मुहूर्त) होता है। इसे अमृत के समान उत्तम फल देने वाला माना जाता है। इस दौरान किए गए कार्यों में सफलता की संभावना सबसे अधिक होती है। नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ, और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए यह समय श्रेष्ठ माना गया है।
इस दिन राहुकाल दोपहर 3:19 बजे से 4:49 बजे तक रहेगा। हिन्दू ज्योतिष के अनुसार, राहुकाल दिन का वह समय होता है जिसे किसी भी नए या शुभ कार्य की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है। राहुकाल को सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच के समय को 8 बराबर भागों में बांटकर निकाला जाता है, जो हर दिन लगभग 90 मिनट का होता है। स्थान बदलने के साथ इसके समय में भी बदलाव हो जाता है। इस दौरान कोई नया काम शुरू नहीं करना चाहिए लेकिन जो काम पहले से चल रहे हैं, उन्हें जारी रखा जा सकता है।
मंगलवार को गुलिक काल दोपहर 12:19 से 1:49 बजे तक रहेगा। गुलिक काल को 'विषैला समय' भी कहा जाता है। यह एक उपग्रह है, इसको अशुभ माना जाता है। माना जाता है कि इस काल में किए गए कार्य नकारात्मक परिणाम देते हैं। इस काल में कोई नया काम शुरू करने से बचना चाहिए लेकिन जो काम पहले से चल रहे हैं, उनको जारी रखा जा सकता है। जो काम बार-बार करना चाहते हैं तो इस काल में किया जा सकता है। बैंक में पैसे जमा करना, दान देना या निवेश करना इस काल में अच्छा माना जाता है।
इस दिन यमगंड काल सुबह 9:19 से 10:49 बजे तक रहेगा। यह समय मृत्यु के देवता यमराज से जुड़ा हुआ माना जाता है। इस समय के दौरान स्वास्थ्य, दीर्घायु या सामान्य दुर्भाग्य से संबंधित बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। इस काल को नए कार्यों की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है। नया व्यापार या नया काम शुरू करने से बचना चाहिए। इस दौरान किसी यात्रा पर भी निकलने से बचना चाहिए और पैसों के लेनदेन से भी बचना चाहिए।
मंगलवार को सूर्य कन्या राशि में स्थित रहेंगे, जब सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करते हैं, तो इसका प्रभाव व्यक्ति के जीवन, कामकाज और बौद्धिक क्षमता पर विशेष रूप से पड़ता है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, इस दौरान व्यावहारिक और योजनाबद्ध तरीके से काम करना लाभकारी माना जाता है।
इस दिन चंद्रमा मकर राशि में स्थित रहेगा। जब चंद्रमा मकर राशि में रहता है तो लोगों की भावनाओं पर मकर राशि के स्वामी शनि का प्रभाव होता है। इससे व्यक्ति का स्वभाव काफी व्यवहारिक और अनुशासित हो जाता है।
मंगलवार को दिशाशूल उत्तर और उत्तर-पश्चिम दिशा में रहेगा। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, दिशाशूल उस अशुभ दिशा को कहते हैं, जिसमें किसी खास दिन यात्रा करना या निकलना अशुभ माना जाता है।




