भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मजबूत इच्छाशक्ति के चलते मध्य प्रदेश के शासकीय सेवकों और युवाओं के लिए एक बेहद सुखद और बड़ा फैसला सामने आया है। प्रदेश में पिछले 10 वर्षों से चले आ रहे 'प्रमोन्नति के सूखे' को मुख्यमंत्री के निर्देश पर आखिरकार खत्म कर दिया गया है। तहसीलदारों समेत विभिन्न विभागों के कई संवर्गों के अधिकारियों की लंबे समय से लंबित पड़ी पदोन्नतियाँ अब तेजी से आगे बढ़ रही हैं। मोहन सरकार ने कोर्ट-कचहरी के पेंच के बीच से एक व्यावहारिक और बीच का रास्ता निकालकर एक साथ लाखों कर्मचारियों का हित और प्रदेश के युवाओं का भविष्य दोनों को सुरक्षित करने का काम किया है।
सीनियर प्रमोट होंगे तो जूनियर भर्ती होगी; सिस्टम में आएगी रफ्तार
सरकार के इस ऐतिहासिक फैसले का सबसे बड़ा दूरगामी फायदा यह होने जा रहा है कि जैसे ही सीनियर अधिकारी उच्च पदों पर प्रमोट होंगे, वैसे ही उनके ठीक नीचे के निचले स्तर के हजारों पद स्वतः खाली हो जाएंगे। इस पूरी प्रक्रिया से प्रशासनिक महकमे की रफ्तार तेज होगी और मैदानी स्तर पर सरकारी कामकाज में एक नई जान आएगी। इसके साथ ही, लंबे समय से एक ही पद पर काम कर रहे अधिकारियों की रुकी हुई करियर ग्रोथ को भी अब एक नई गति मिल सकेगी। इस फैसले के बाद से 'प्रभारी' व्यवस्था के सहारे काम चला रहे विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों में भारी उत्साह और खुशी का माहौल देखा जा रहा है।
अब रिक्त पद भरेंगे, फिर नई भर्ती; युवाओं के सपनों को मिली नई उड़ान
मोहन सरकार के इस कदम ने प्रदेश के बेरोजगार युवाओं के सपनों के द्वार भी खोल दिए हैं। पदोन्नति की इस प्रक्रिया से निचले स्तर पर जितने ज्यादा पद खाली होंगे, उतनी ही तेजी से नई शासकीय भर्तियों के द्वार खुलेंगे। इस निर्णय का सीधा मतलब सिर्फ वरिष्ठ अधिकारियों को उच्च पद देना नहीं है, बल्कि पूरे प्रशासनिक सिस्टम में नई भर्तियों और युवाओं के लिए सुनहरे अवसरों की एक नई बाढ़ लेकर आना है। इससे युवाओं को सरकारी नौकरियों में आने के नए और बड़े मौके मिलेंगे, जिससे प्रदेश में रोजगार की स्थिति में बड़ा और सकारात्मक सुधार देखने को मिलेगा।




