Sunday, November 8, 2026
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दिल्ली-एनसीआर में बारिश से गिरा तापमान, IMD ने जारी किया 'येलो अलर्ट'

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भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी से की मुलाकात

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी से की मुलाकात

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भारत रत्न लालकृष्ण आडवाणी के आवास पर जाकर उन्हें जन्मदिन की बधाई दी। रविवार को पार्टी के वरिष्ठ नेता आडवाणी अपने 100वें वर्ष में प्रवेश कर गए हैं।भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और पार्टी के महासचिव बीएल संतोष भी मौजूद रहे। उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेता आडवाणी के अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना की। नितिन नवीन ने अपने सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म एक्‍स पर तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, "बंटवारे की विभीषिका से लेकर राष्ट्र-निर्माण के सफर तक, आडवाणी जी का सार्वजनिक जीवन 'राष्ट्र सर्वोपरि' के विचार और उसके प्रति अटूट प्रतिबद्धता का एक बेहतरीन उदाहरण रहा है।" उन्होंने कहा, "उनका जीवन दर्शन 'राष्ट्र सर्वोपरि, पार्टी उसके बाद, और स्वयं सबसे अंत में' हमेशा भाजपा की संगठनात्मक संस्कृति और उसके कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।" इससे पहले दिन में, भाजपा ने पार्टी मुख्यालय में पूजा और हवन का आयोजन करके उनका 99वां जन्मदिन मनाया। इस मौके पर कई पार्टी नेता मौजूद थे, जिन्होंने भारत के लोकतंत्र और राजनीति में लालकृष्ण आडवाणी के योगदान की सराहना की। दीपावली के पावन अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य पार्टी संगठन और राष्ट्र के प्रति लालकृष्ण आडवाणी के योगदान को याद करना और उनके लंबे सार्वजनिक जीवन का जश्न मनाना था। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नितिन नवीन ने कहा, "लालकृष्ण आडवाणी जी का जीवन 'राष्ट्र सर्वोपरि', सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और अपने विचारों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का एक प्रेरणादायक उदाहरण है। उनकी ऐतिहासिक रथ यात्रा से लेकर अयोध्या में भव्य श्री राम मंदिर के निर्माण तक का सफर, भगवान राम के लाखों भक्तों के संकल्प और संघर्ष की गाथा है।" उन्होंने आगे कहा, "लालकृष्ण आडवाणी जी की ऐतिहासिक रथ यात्रा ने राम मंदिर आंदोलन को एक नई दिशा और ऊर्जा दी। प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में वह सपना सच हुआ और आज भगवान राम अयोध्या में अपने भव्य धाम में विराजमान हैं।"

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525 साल पुराने त्रिपुरा सुंदरी मंदिर में 3 दिवसीय दिवाली उत्सव के दौरान 10 लाख से अधिक लोगों के आने की उम्मीद

525 साल पुराने त्रिपुरा सुंदरी मंदिर में 3 दिवसीय दिवाली उत्सव के दौरान 10 लाख से अधिक लोगों के आने की उम्मीद

अगरतला। गोमती जिले में स्थित 525 साल पुराने ऐतिहासिक माता त्रिपुरा सुंदरी मंदिर में तीन दिवसीय दिवाली उत्सव मनाया जाएगा। रविवार शाम को त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा इस उत्सव का उद्घाटन करेंगे। इस आयोजन में देश भर से 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं और लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। अगरतला से लगभग 64 किलोमीटर दक्षिण में उदयपुर में स्थित यह प्रसिद्ध मंदिर, देश के 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। इसे 1501 में महाराजा धन्य माणिक्य ने बनवाया था, जिन्होंने 1490 से 1515 तक तत्कालीन त्रिपुरा रियासत पर शासन किया था। स्थानीय विधायक अभिषेक देबरॉय और गोमती जिले की जिलाधिकारी रिंकू लाथर ने बताया कि इस वार्षिक उत्सव के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। साथ ही, इस साल के जश्न को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए कई विशेष कदम उठाए गए हैं। देबरॉय ने मीडिया को बताया कि हमें उम्मीद है कि तीन दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में देश भर से 10 लाख से ज़्यादा श्रद्धालु और आगंतुक जुटेंगे, जिनमें महिलाओं की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर होगी। यह पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में मनाए जाने वाले सबसे बड़े दिवाली उत्सवों में से एक है। दिवाली के दौरान यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को देखते हुए पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे रविवार को एक विशेष ट्रेन चलाएगा। सूचना एवं सांस्कृतिक मामलों के विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि रविवार को उद्घाटन की शाम को एक शानदार ड्रोन शो मुख्य आकर्षणों में से एक होगा। उन्होंने आगे बताया कि मंदिर परिसर के भीतर सरकारी प्रदर्शनी के स्टॉल बहुत खूबसूरती से सजाए गए हैं। इसके अलावा, त्रिपुरा की समृद्ध विरासत, पारंपरिक संस्कृति और स्थानीय खान-पान को दर्शाने वाले विशेष थीम-आधारित स्टॉल भी लगाए गए हैं। अधिकारी ने यह भी बताया कि इस उत्सव का एक और मुख्य आकर्षण रेत से बनी एक विशेष कलाकृति होगी, जिसमें एक कछुए के ऊपर माता त्रिपुरा सुंदरी मंदिर को दर्शाया गया है। यह कलाकृति इस तीर्थस्थल की अनूठी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। इस बीच, जनता की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 सितंबर 2025 को पुनर्निर्मित माता त्रिपुरा सुंदरी मंदिर का उद्घाटन किया और वहां पूजा-अर्चना की। पर्यटन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय की 'प्रसाद' तीर्थयात्रा का कायाकल्प और आध्यात्मिक विरासत संवर्धन अभियान) योजना के तहत, 525 साल पुराने त्रिपुरा सुंदरी मंदिर का 54 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से पुनर्निर्माण किया गया है। इस परियोजना के लिए केंद्र सरकार ने 34.43 करोड़ रुपए दिए, जबकि त्रिपुरा सरकार ने 17.61 करोड़ रुपये का योगदान दिया।

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सोनिया गांधी ने प्रियंका के साथ दीपावली और पारिवारिक परंपराओं को किया याद

सोनिया गांधी ने प्रियंका के साथ दीपावली और पारिवारिक परंपराओं को किया याद

नई दिल्ली। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में बीते वर्षों की दिवाली की यादें साझा की है।एक्स पर वीडियो साझा करते हुए सोनिया गांधी ने लिखा, "दिवाली मनाने की अपनी शुरुआती यादों को ताजा कर रही हूं। परंपराएं, उत्सव और वे छोटे-छोटे पल जिन्होंने इसे इतना खास बनाया।" वीडियो में सोनिया गांधी अपनी बेटी, कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ बातचीत करती नजर आ रही हैं, जिसमें दोनों परिवार द्वारा मनाए जाने वाले त्योहार को याद कर रही हैं। प्रियंका की बेटी मिराया वाड्रा भी वीडियो में दिखाई देती हैं। सोनिया ने याद किया कि दिवाली हमेशा एक खास अवसर होता था, जब घर के लगभग हर कोने में दीये जगमगाते थे। ये दीये तालाब के चारों ओर बरामदे में और रास्तों पर रखे जाते थे। प्रवेश द्वार पर भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित होती थी, जहां परिवार अपना पहला दीया जलाता था। सोनिया गांधी ने कहा, "उन दिनों, हमारे यहां हर जगह वो छोटी-छोटी बत्तियां नहीं होती थीं, लेकिन हर जगह दीये होते थे।" प्रियंका ने भी उत्सवों के बारे में बात की और बताया कि कैसे अलग-अलग क्षेत्रों के लोग दिवाली के दौरान घर आते थे और बगीचे में इकट्ठा होते थे। बातचीत जल्द ही पटाखों की ओर मुड़ गई। सोनिया को याद आया कि वे दिवाली के लिए पटाखे और फुलझड़ियां खरीदने चांदनी चौक और पुरानी दिल्ली जाया करती थीं। उन्होंने कहा कि उन्हें फुलझड़ियां बहुत पसंद थीं, लेकिन अनार जैसे पटाखे उतने पसंद नहीं थे। सोनिया ने उन वर्षों में दिवाली के मौसम को भी याद किया। उन्होंने बताया कि आसमान साफ ​​और नीला होता था, जो आजकल शायद ही देखने को मिलता है। खाना भी परिवार की दिवाली परंपराओं का एक अहम हिस्सा था। सोनिया को याद आया कि उत्सव के दौरान कश्मीरी व्यंजन परोसे जाते थे, खासकर मीठे चावल, जो आज भी परिवार को बहुत पसंद हैं।

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मुख्यमंत्री योगी ने दीपावली पर साधु-संतों से की मुलाकात, दिए उपहार

मुख्यमंत्री योगी ने दीपावली पर साधु-संतों से की मुलाकात, दिए उपहार

अयोध्या। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर महंत योगी आदित्यनाथ ने रविवार को प्रभु श्रीराम की नगरी अयोध्या में संतों से भेंट की और उन्हें दीपावली की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विभिन्न अखाड़ों और मठों में पहुंचकर संतजन का हालचाल जाना और दीपावली पर उपहार भेंट किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हनुमानगढ़ी जाकर बजरंगबली का आशीर्वाद लिया और इसके बाद राम मंदिर में रामलला के दर्शन व विशेष पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सबसे पहले दिगंबर अखाड़े पहुंचे। यहां उन्होंने महंत सुरेश दास से मुलाकात की। इस मौके पर संत राम लखन दास भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने उन्हें दीपावली की शुभकामनाएं दीं और उपहार भेंट किए। इस दौरान दोनों संतों के बीच प्रदेश और समाज से जुड़े विषयों पर चर्चा भी हुई। मुख्यमंत्री योगी बड़ा भक्त महल भी पहुंचे। यहां उन्होंने महंत कौशल किशोर दास जी महाराज से मुलाकात की। उन्होंने महाराज जी का हालचाल जाना और दीपावली पर उपहार भेंट अर्पित किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास जी से मिलने मणिराम दास छावनी पहुंचे। उन्होंने महंत जी के स्वास्थ्य की जानकारी ली और उनके दीर्घायु होने की कामना करते हुए दीपावली के उपहार प्रदान किया। इस वर्ष अयोध्या में 10वां दीपोत्सव मनाया गया, जिसमें मुख्यमंत्री ने प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के स्वरूपों का प्रतीकात्मक राजतिलक और पुष्पवर्षा की।

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पश्चिम बंगाल: दीपावली के साथ पड़ी काली पूजा, लाल गुड़हल 5 गुना महंगा हुआ

पश्चिम बंगाल: दीपावली के साथ पड़ी काली पूजा, लाल गुड़हल 5 गुना महंगा हुआ

कोलकाता। काली पूजा की पूजा-विधि के लिए जरूरी लाल गुड़हल के फूलों की कीमतें रविवार को कोलकाता के खुदरा बाजारों में पांच गुना से भी ज्यादा बढ़ गईं। इसकी प्रमुख वजह इस बार यह शुभ अवसर दिवाली के साथ ही पड़ना है। खुदरा बाजारों में 108 लाल गुड़हल के फूलों की एक माला 150 से 200 रुपए के बीच बिक रही है (इलाके के हिसाब से कीमतें अलग-अलग हैं)। जबकि एक हफ्ते पहले यही माला 25 से 30 रुपए के आसपास मिल रही थी। 1,008 लाल गुड़हल के फूलों वाली माला इस साल लोगों की जेब पर काफी भारी पड़ रही है। पिछले साल के मुकाबले इसकी कीमत लगभग दोगुनी हो गई है। लाल गुड़हल के फूल मुख्य रूप से काली पूजा या खास मौकों पर बिकती है। रविवार को 1,008 लाल गुड़हल के फूलों वाली माला 1,000 से 1,200 रुपए के बीच बिक रही थी, जबकि पिछले साल इसकी अधिकतम कीमत 700 से 800 रुपए थी। फूल विक्रेताओं के मुताबिक, लाल गुड़हल की मांग लगभग पूरे साल बनी रहती है। हालांकि काली पूजा से पहले इसकी मांग कई गुना बढ़ जाती है। वैसे तो साल भर ये फूल काफी कम कीमत पर मिल जाते हैं, लेकिन काली पूजा के दौरान कई कारणों से इनकी मांग और कीमत दोनों बढ़ जाते हैं। दक्षिण कोलकाता के गरियाहाट बाजार के एक फूल विक्रेता ने बताया, "लाल गुड़हल की कीमतों में बढ़ोतरी किसानों के स्तर से ही शुरू हो जाती है, जो अपने फूल ऊंचे दामों पर बेचते हैं। इसका असर सबसे पहले थोक बाजारों में और फिर खुदरा बाजारों में देखने को मिलता है।" शहर के ज्यादातर खुदरा बाजारों में रविवार को विक्रेताओं ने लाल गुड़हल के फूल अलग-अलग (खुले) बेचना बंद कर दिया है। दक्षिण कोलकाता के ही कस्बा बाजार के एक स्थानीय फूल विक्रेता ने बताया कि फूलों को अलग-अलग बेचने के बजाय माला बनाकर बेचना ज्यादा फायदेमंद है, क्योंकि माला की कीमत में फूलों के दाम के साथ-साथ उन्हें गूंथने (माला बनाने) की मजदूरी भी शामिल होती है। लाल गुड़हल के अलावा रविवार को कमल के फूल भी अपनी सामान्य कीमत से दोगुने से ज्‍यादा दाम पर बिक रहे हैं। एक हफ्ते पहले 10 से 15 रुपए में बिकने वाला कमल, रविवार को 30 से 35 रुपए के बीच बिक रहा है। रविवार को नारंगी गेंदे के फूल 180 से 200 रुपए प्रति किलो बिक रहे थे, जबकि पीले गेंदे के फूल 210 से 220 रुपए प्रति किलो के भाव पर बिके।

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