Monday, October 12, 2026

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विराट कोहली का महा-रिकॉर्ड: सचिन को पीछे छोड़ बने सबसे तेज 15 हजारी

विराट कोहली का महा-रिकॉर्ड: सचिन को पीछे छोड़ बने सबसे तेज 15 हजारी

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नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की होगी पूजा-अर्चना, तप और साधना का विशेष महत्व

नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की होगी पूजा-अर्चना, तप और साधना का विशेष महत्व

नोएडा। नवरात्र के पावन पर्व में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्र के दूसरे दिन मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी तप, त्याग, संयम और साधना की प्रतीक हैं। भक्त इस दिन विधि-विधान से पूजा करके माता रानी से सुख-समृद्धि, शांति और आध्यात्मिक उन्नति की कामना करते हैं। मां ब्रह्मचारिणी की उपासना से जीवन में कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए धैर्य और आत्मबल प्राप्त करने की प्रेरणा मिलती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप ब्रह्मचारिणी का नाम ब्रह्मा जी की शक्ति से जुड़ा हुआ है। ब्रह्मा जी को सृष्टि का रचयिता माना जाता है और मां ब्रह्मचारिणी को उनकी शक्ति के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है। पौराणिक मान्यताओं में मां के इस स्वरूप का संबंध तपस्या, ब्रह्मचर्य और कठोर साधना से बताया गया है। मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप भक्तों को यह संदेश देता है कि जीवन में लक्ष्य की प्राप्ति के लिए दृढ़ संकल्प, अनुशासन और निरंतर प्रयास आवश्यक हैं। मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप अत्यंत शांत, सौम्य और तपस्विनी के रूप में वर्णित किया गया है। माता के एक हाथ में कमंडल और दूसरे हाथ में रुद्राक्ष की माला सुशोभित रहती है। कमंडल त्याग और साधना का प्रतीक माना जाता है, जबकि रुद्राक्ष की माला जप, ध्यान और आध्यात्मिक एकाग्रता का संदेश देती है। मां का यह स्वरूप भक्तों को सांसारिक मोह से ऊपर उठकर आत्मिक शांति और ईश्वर की भक्ति की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा देता है। नवरात्र के दूसरे दिन श्रद्धालु सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर पूजा स्थल पर मां ब्रह्मचारिणी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करके पूजा-अर्चना करते हैं। इसके बाद दीप प्रज्वलित कर पुष्प, अक्षत, फल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जाती है। भक्त माता के मंत्रों का जाप करते हैं और परिवार की सुख-शांति एवं समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन मां ब्रह्मचारिणी का ध्यान और जप करने से मन को शांति मिलती है तथा साधक में धैर्य, संयम और दृढ़ इच्छाशक्ति का विकास होता है। मान्यता है कि भक्त जितनी अधिक श्रद्धा और एकाग्रता के साथ माता का ध्यान करते हैं, उन्हें उतना ही आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का मुख्य संदेश यही है कि कठिनाइयों के बीच भी व्यक्ति को अपने लक्ष्य से विचलित नहीं होना चाहिए। तप, त्याग, सत्य और संयम के मार्ग पर चलकर जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है।

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13 अक्टूबर का पंचांग: मां के तीसरे स्वरूप चंद्रघंटा की पूजा करना विशेष फलदायी, सुबह 11:49 से दोपहर 12:36 बजे तक अभिजीत मुहूर्त

13 अक्टूबर का पंचांग: मां के तीसरे स्वरूप चंद्रघंटा की पूजा करना विशेष फलदायी, सुबह 11:49 से दोपहर 12:36 बजे तक अभिजीत मुहूर्त

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है। कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है। पंचांग हिंदू काल-गणना पद्धति है, जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है।13 अक्टूबर 2026 को आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि रात 11:28 बजे तक रहेगी। इसके बाद चतुर्थी तिथि शुरू हो जाएगी। मंगलवार को सुबह 6:26 बजे सूर्योदय और शाम 5:59 बजे सूर्यास्त होगा। वहीं, सुबह 8:40 बजे चंद्रोदय और शाम 7:37 बजे चंद्रास्त होगा। 13 अक्टूबर 2026 (मंगलवार) को शारदीय नवरात्र का तीसरा दिन है। इस दिन मां चंद्रघंटा (दुर्गा जी के दूसरे स्वरूप) की पूजा की जाती है। मां की पूजा करना अत्यंत फलदायी रहेगा। पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्य देव चित्रा नक्षत्र में रहेंगे। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, जब सूर्य देव चित्रा नक्षत्र में प्रवेश करते हैं या इस नक्षत्र में स्थित होते हैं, तो इसके विशेष और गहरे प्रभाव देखने को मिलते हैं। चित्रा नक्षत्र के स्वामी मंगल ग्रह हैं, जिन्हें सूर्य का मित्र माना जाता है। सूर्य और मंगल के इस मेल से व्यक्ति के भीतर गजब का आत्मविश्वास, साहस, पराक्रम और ऊर्जा बढ़ती है। नौकरीपेशा लोगों के काम की उच्च अधिकारियों द्वारा सराहना होती है। प्रशासन, उच्च पदों या प्रबंधन से जुड़े लोगों को विशेष लाभ, नई जिम्मेदारी या प्रमोशन मिल सकते हैं। मंगलवार को रात 8:23 बजे तक प्रीति योग रहेगा। वैदिक ज्योतिष में प्रीति योग 27 नित्य योगों में से दूसरा अत्यंत शुभ योग माना जाता है। 'प्रीति' का अर्थ प्रेम, स्नेह, लगाव और मित्रता होता है। जब सूर्य और चंद्रमा की गतियों के योग से बनने वाली खगोलीय दूरी 13 अंश 20 कला से 26 अंश 40 कला के बीच होती है, तब प्रीति योग का निर्माण होता है। इस योग के देवता या स्वामी भगवान विष्णु को माना गया है, जो प्रेम और पालन के प्रतीक हैं। इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:49 से दोपहर 12:36 बजे तक रहेगा। यह दिन का सबसे शुभ और फलदायी समय माना जाता है। आमतौर पर यह लगभग 48 मिनट (या दिनमान के अनुसार गणना किया गया आठवाँ मुहूर्त) होता है। माना जाता है कि इस मुहूर्त में किए गए कार्यों से सभी प्रकार के अशुभ प्रभाव या दोष स्वतः नष्ट हो जाते हैं। जब सूर्य ठीक सिर के ऊपर रहते हैं, तब अभिजीत मुहूर्त की बेला होती है। मंगलवार को शाम 4:13 से 5:56 बजे तक अमृतकाल रहेगा। ज्योतिष और पंचांग के अनुसार, अमृतकाल एक अत्यंत शुभ, मंगलकारी और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर समयावधि (मुहूर्त) है। इसे अमृत के समान उत्तम फल देने वाला माना जाता है। इस दौरान किए गए कार्यों में सफलता की संभावना सबसे अधिक होती है। यह समय नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए श्रेष्ठ माना गया है। इस दिन राहुकाल दोपहर 3:06 बजे से 4:32 बजे तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, राहुकाल दिन का वह समय होता है, जिसे किसी भी नए या शुभ कार्य की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है। राहुकाल को सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच के समय को 8 बराबर भागों में बांटकर निकाला जाता है, जो हर दिन लगभग 90 मिनट का होता है। स्थान बदलने के साथ इसके समय में भी बदलाव हो जाता है। इस दौरान कोई नया काम शुरू नहीं करना चाहिए, लेकिन जो काम पहले से चल रहे हैं, उन्हें जारी रखा जा सकता है। मंगलवार को गुलिक काल दोपहर 12:13 से 1:39 बजे तक रहेगा। गुलिक काल को 'विषैला समय' भी कहा जाता है। यह एक उपग्रह है, जिसे अशुभ माना जाता है। माना जाता है कि इस काल में किए गए कार्य नकारात्मक परिणाम देते हैं। इस काल में कोई नया काम शुरू करने से बचना चाहिए, लेकिन जो काम पहले से चल रहे हैं, उन्हें जारी रखा जा सकता है। जो काम बार-बार करने हों, वे इस काल में किए जा सकते हैं। बैंक में पैसे जमा करना, दान देना या निवेश करना इस काल में अच्छा माना जाता है। इस दिन यमगंड काल सुबह 9:19 से 10:46 बजे तक रहेगा। यह समय मृत्यु के देवता यमराज से जुड़ा हुआ माना जाता है। इस समय के दौरान स्वास्थ्य, दीर्घायु, या सामान्य दुर्भाग्य से संबंधित बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। इस काल को नए कार्यों की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है। नया व्यापार या नया काम शुरू करने से बचना चाहिए। इस दौरान किसी यात्रा पर भी निकलने और पैसों के लेनदेन से भी बचना चाहिए। मंगलवार को सूर्य देव कन्या राशि में स्थित रहेंगे। जब सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करते हैं, तो इसका प्रभाव व्यक्ति के जीवन, कामकाज और बौद्धिक क्षमता पर विशेष रूप से पड़ता है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, इस दौरान व्यावहारिक और योजनाबद्ध तरीके से काम करना लाभकारी माना जाता है। इस दिन चंद्रमा तुला राशि में रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा के तुला राशि में होने का मतलब है कि जातक के आंतरिक मन, भावनाओं और स्वभाव पर शुक्र ग्रह और वायु तत्व का गहरा प्रभाव है। ऐसे लोग झगड़े और विवाद से दूर रहना चाहते हैं। ये जीवन के हर पहलू में संतुलन और न्याय की तलाश करते हैं। इनका स्वभाव मिलनसार, विनम्र और कूटनीतिक होता है। ये अपनी मीठी वाणी और समझदारी से दूसरों का दिल आसानी से जीत लेते हैं। मंगलवार को दिशाशूल उत्तर दिशा में रहेगा। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, दिशाशूल उस दिशा को कहते हैं, जिसमें किसी खास दिन यात्रा करना या निकलना अशुभ माना जाता है।

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नवरात्र स्पेशल : रहषु भगत के दर्शन के बिना मां थावे वाली की पूजा मानी जाती है अधूरी, राजा मनन की जिद ने कर दिया था साम्राज्य का विनाश

नवरात्र स्पेशल : रहषु भगत के दर्शन के बिना मां थावे वाली की पूजा मानी जाती है अधूरी, राजा मनन की जिद ने कर दिया था साम्राज्य का विनाश

नई दिल्ली। शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व की शुरुआत हो चुकी है। भारत में मां दुर्गा के कई सारे मंदिर है, जिनका अलग-अलग महत्व है। इन्हीं मंदिरों में से एक बिहार का थावे भवानी मंदिर भी है। बिहार के थावे में मां थावेवाली के दर्शन के लिए दूर-दूर से आते हैं। बिहार के गोपालगंज जिले में स्थित 'थावे भवानी मंदिर' को लेकर एक एक बेहद रहस्यमयी कहानी जुड़ी है। गोपालगंज शहर से महज कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह मंदिर कोई साधारण मंदिर नहीं बल्कि इसे एक 'जाग्रत शक्तिपीठ' माना जाता है। यह वह स्थान है जहां एक भक्त की सच्ची पुकार और एक राजा के अहंकार की जिद ने इतिहास के पन्नों में एक ऐसा अध्याय लिख दिया, जो आज भी लोगों के रोंगटे खड़े कर देता है। लोककथाओं के अनुसार, आज से करीब 400 साल पहले इस क्षेत्र में चेरो वंश के राजा मनन सिंह (मनन सेन) का शासन था। राजा मनन सिंह खुद को मां दुर्गा का सबसे बड़ा और परम भक्त मानता था। उसे अपनी भक्ति पर इतना गर्व था कि वह अपने राज्य में किसी और को देवी का भक्त मानने को तैयार ही नहीं था। उसी दौरान, राज्य में एक भयानक अकाल पड़ा। धरती सूख गई और लोग दाने-दाने को मोहताज हो गए। इसी राज्य के थावे जंगल में देवी मां का एक परम भक्त 'रहषु भगत' रहा करता था। वह एक साधारण और गरीब इंसान था लेकिन उसकी भक्ति में अपार शक्ति थी। जनश्रुतियों के अनुसार, अकाल के उस भीषण दौर में रहषु भगत ने देवी मां की आराधना की। मां की कृपा से वह दिन में बाघों के गले में सांप की रस्सी बांधकर जंगली घास (पटेर) की दवरी (दौनी) करता था और रात में उसी घास से चमत्कारिक रूप से अन्न (चावल) निकलने लगता था। रहषु वह सारा अन्न जनता में बांट देता था, जिससे लोगों की जान बचने लगी थी। जब रहषु भगत के इस चमत्कार की खबर राजमहल तक पहुंची, तो राजा मनन सिंह का अहंकार जाग उठा। उसे यह बर्दाश्त नहीं हुआ कि कोई साधारण सा इंसान उससे बड़ा भक्त कैसे हो सकता है। राजा ने रहषु भगत को दरबार में बुलवाया। राजा ने रहषु को ढोंगी करार देते हुए आदेश दिया कि यदि वह सच में भक्त है, तो अपनी मां को साक्षात राजमहल में बुलाकर दिखाए। रहषु भगत ने राजा को हाथ जोड़कर बहुत मिन्नतें कीं। उसने समझाया कि मां दुर्गा को इस तरह हठ से बुलाना विनाश को आमंत्रण देना है। उसने राजा को चेतावनी दी कि यदि मां साक्षात यहां प्रकट हुईं, तो धरती फट जाएगी और पूरा साम्राज्य तबाह हो जाएगा लेकिन राजा अपने घमंड में अंधा था। उन्होंने रहषु की एक न सुनी और उसे सजा देने की धमकी दी। हार मानकर, भक्त रहषु ने वहीं बैठकर देवी का ध्यान लगाना शुरू किया। लोक मान्यताओं के अनुसार, भक्त की पुकार सुनकर देवी मां असम के कामाख्या से चलीं। कहा जाता है कि कामाख्या से थावे आने के दौरान मां भवानी कई जगहों पर रुकी थीं। वह कोलकाता में दक्षिणेश्वर में काली मां के रूप में, पटना में मां पटन देवी के रूप में और सारण-छपरा के आमी में अंबिका स्थान के रूप में रुकी थीं। जैसे-जैसे मां करीब आती गईं, रहषु राजा को चेतावनी देता रहा और राजा ने तब भी अपनी जिद नहीं छोड़ी। जब देवी मां थावे पहुंचीं, तो प्रकृति का प्रकोप टूट पड़ा। देखते ही देखते राजा के महल और भवन ढहने लगे। तभी एक भयानक गर्जना हुई और भक्त रहषु भगत का मस्तक बीच से फट गया। उसी फटे हुए मस्तक से देवी मां का एक हाथ बाहर निकला, जिसकी कलाई में दिव्य और अलौकिक 'कंगन' चमक रहा था। राजा की उसी समय मृत्यु हो गई और रहषु भगत को उसी क्षण मोक्ष की प्राप्ति हो गई और देवी मां उसी स्थान पर (थावे के जंगलों में) हमेशा के लिए स्थापित हो गईं। आज भी थावे में मनन सिंह के महल के खंडहर मौजूद हैं। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां आने वाले श्रद्धालु मां भवानी के दर्शन करने से पहले, थोड़ी ही दूरी पर स्थित उनके परम भक्त रहषु भगत के मंदिर में जाकर दर्शन करते हैं। मान्यता है कि रहषु भगत की पूजा के बिना मां थावे वाली की पूजा अधूरी मानी जाती है। आज देश-विदेश (विशेषकर नेपाल, यूपी और बंगाल) से लाखों श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर यहां आते हैं। शारदीय और चैत्र नवरात्रि में यहां भव्य मेला लगता है और माता को विशेष रूप से 'पिड़किया' (पेडुकिया) का प्रसाद चढ़ाया जाता है।

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राजस्थान: मेहरानगढ़ दुर्ग स्थित मां चामुंडा मंदिर में आस्था का अपार सैलाब, मारवाड़ के लोग मानते हैं अपनी कुलदेवी

राजस्थान: मेहरानगढ़ दुर्ग स्थित मां चामुंडा मंदिर में आस्था का अपार सैलाब, मारवाड़ के लोग मानते हैं अपनी कुलदेवी

जोधपुर। शक्ति की आराधना के पावन पर्व नवरात्र के पहले दिन रविवार को जोधपुर के ऐतिहासिक मेहरानगढ़ दुर्ग पर स्थित मां चामुंडा के दरबार में आस्था का अपार सैलाब उमड़ पड़ा। अलसुबह से ही मां के दर्शन के लिए दूर-दूर से पहुंचे श्रद्धालुओं की लंबी-लंबी कतारें देखने को मिलीं। पूरा मेहरानगढ़ परिसर माता के जयकारों और भजनों से गंजायमान हो उठा। नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना के साथ ही मेहरानगढ़ स्थित मां चामुंडा मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। जोधपुर शहर सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों और अन्य जिलों से भी बड़ी संख्या में भक्त माता का आशीर्वाद लेने पहुंचे। बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों में माँ के दर्शन को लेकर विशेष उत्साह नजर आया। मंदिर से जुड़े पुजारी घनश्याम त्रिवेदी ने मंदिर का महत्व बताते हुए जानकारी दी कि सुबह 7.30 बजे पहली आरती के साथ विधिवत अनुष्ठान शुरू हुए, जिसमें बाबजी हुकुम की ओर से घट स्थापना की पूजा संपन्न हुई। मंदिर में आठ दिनों तक सप्तशती पाठ चलेंगे, अष्टमी की रात को भव्य हवन होगा और नवमी के दिन पूर्णाहुति होगी। पंडित घनश्याम त्रिवेदी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से कहा, "यह मंदिर बहुत प्राचीन है। राजा राव जोधा ने मंदिर की स्थापना कराई थी। इस मंदिर से मारवाड़ के लोगों की आस्था जुड़ी है। ये लोग मां चामुंडा को अपनी कुलदेवी के रूप में पूजते हैं। नवरात्रि के दौरान विशेष रूप से लोग मंदिर में दर्शन पूजन के लिए पहुंचते हैं।" इतिहासकारों के अनुसार, जोधपुर के संस्थापक राव जोधा ने विक्रम संवत 1517 (करीब 563 साल पहले) मंडोर से लाकर मां चामुंडा की इस दिव्य प्रतिमा को मेहरानगढ़ दुर्ग में स्थापित किया था। मारवाड़ के राजवंश और आम जनमानस की मां चामुंडा में अटूट आस्था है। मंदिर से जुड़े लोगों का मानना है कि इतिहास में संकट के दौर में जब दुश्मन देश द्वारा बम फेंके गए थे, तब मां के आशीर्वाद से एक भी बम नहीं फटा और कोई नुकसान नहीं हुआ, जिससे भक्तों की आस्था और अधिक प्रगाढ़ हो गई है। शहरवासियों का मानना है कि संकट के हर दौर में मां ने जोधपुर की रक्षा की है। मेहरानगढ़ पहुंचे श्रद्धालुओं का कहना है कि सच्चे मन और सच्ची भावना से आने वाले हर भक्त की मनोकामना मां चामुंडा अवश्य पूरी करती हैं। कई भक्त परंपरा के अनुसार नौ दिनों तक अन्न का त्याग कर या मौन व्रत रखकर माता की आराधना में लीन हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी में मारवाड़ की कुलदेवी के प्रति अगाध श्रद्धा और उल्लास का माहौल देखने को मिल रहा है। श्रद्धालु ललित परमार ने आईएएनएस से कहा कि हम लोग माता रानी के दर्शन करने के लिए आए हैं। हम लोग सुबह 5 बजे से लाइन में खड़े थे। लोग नवरात्रि के समय यहां अधिक संख्या में पहुंचते हैं। मंदिर में दर्शन करने पहुंचीं दीपिका ने कहा, "यहां मान्यता है कि सच्ची भावना से जो भक्त आते हैं, उनकी हर आस पूरी होती है। हर साल हम लोग नवरात्र में नौ दिन मंदिर में आते हैं।" मेहरानगढ़ दुर्ग पर उमड़ने वाली भारी भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाधिकारी देवेंद्र देवड़ा ने बताया कि शारदीय नवरात्र के पहले दिन अवकाश और रविवार होने के कारण देवी के दर्शन के लिए भारी उमंग देखी जा रही है। सुरक्षा के मद्देनजर जयपोल, मित्यापोल, फतेहपोल और जोधा प्याऊ के आसपास त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। श्रद्धालुओं की संख्या को नियंत्रित करने के लिए हर स्तर पर रोक-रोककर प्रवेश दिया जा रहा है। नवरात्र के पहले दिन मेहरानगढ़ में कम से कम 10 से 15 हजार लोगों के दर्शन करने की संभावना है।

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साप्ताहिक राशिफल 12 अक्टूबर से 18 अक्टूबर 2026 तक

साप्ताहिक राशिफल 12 अक्टूबर से 18 अक्टूबर 2026 तक

लग्नराशि पर आधारित कलाशांति ज्योतिष साप्ताहिक राशिफल में जानिए इस सप्ताह आपका पारिवारिक जीवन, आर्थिक दशा, स्वास्थ्य और कार्यक्षेत्र में आपकी स्थिति कैसी रहेगी, इस सप्ताह आपको क्या-कुछ मिलने वाला है, आपके लिए क्या-क्या करना फायदेमंद रहेगा और परेशानियों से बचने के लिए आपको कौन-कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए। मेष लग्नराशि : इस सप्ताह आपके काम में प्रगति होगी। कारोबार को लेकर नई योजनाएं बना सकते है। यश कीर्ति के साथ साथ धन लाभ में वृद्धि होगी। नौकरी कर रहे जातकों को अपने कार्यक्षेत्र में परेशानी का अनुभव प्राप्त हो सकता है। वाद-विवाद से दूर रहें। पेट से सम्बंधित किसी प्रकार की तकलीफ हो सकती है। आपके आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। वैवाहिक जीवन बहुत अच्छा व्यतीत होगा। छात्रों के लिए समय अच्छा रहेगा। वृषभ लग्नराशि : इस सप्ताह भाग्य का साथ कमजोर बना रह सकता है। नौकरी तथा व्यापार के क्षेत्र में कार्यरत जातकों को मनचाही सफलता मिलने से ख़ुशी प्राप्त हो सकती है। किन्तु व्यापारी वर्ग को अधिक परिश्रम करना पड़ सकता है। रुके हुए कार्यों में प्रगति होगी। स्वास्थ्य के लिहाज से हफ्ता ठीक ठाक बना रहेगा। यात्रा के योग बनेंगे तथा भोगविलास की चीजों पर खर्च होगा। हफ्ते के अंत में कुछ मानसिक तनाव हो सकता है। मिथुन लग्नराशि : इस सप्ताह भाग्य का साथ मिलने से अचानक किसी प्रकार के लाभ की प्राप्ति हो सकती है। किसी तरह का व्यर्थ का खर्चा परेशान कर सकता है स्वास्थ्य में छोटी -मोटी परेशानी महसूस कर सकते है तथा दाँतो में तकलीफ हो सकती है। नौकरी तथा व्यापार में अधिक परिश्रम करना पड़ सकता है। भाई बहनों से सहयोग मिलेगा और रुके काम बनेंगे। वैवाहिक जीवन में कुछ परेशानियां महसूस हो सकती है। कर्क लग्नराशि : इस सप्ताह आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। प्रत्येक कार्य सफलतापूर्वक पूरे होंगे। जिससे आपमें उत्साह और स्फूर्ति बनी रहेगी। कारोबार में नई योजना बनेगी। यश कीर्ति में वृद्धि होगी। सुखों में वृद्धि हो सकती है अपने लिए किसी प्रकार की खरीदारी कर सकते है। कार्यक्षेत्र में परेशानी आ सकती है वाद-विवाद से दूर रहें। हफ्ते के अंत में मन अशांत होने से तबीयत ख़राब हो सकती है। अतः सचेत रहे। सिंह लग्नराशि : इस सप्ताह आपका पराक्रम बढ़ेगा तथा भाइयों से सहयोग प्राप्त होगा ,हर प्रकार की सुविधाएं मिलेगी। महत्वपूर्ण कार्यों के पूरा होने से आपका चेहरा खिल उठेगा। रोजगार की तलाश में भटक रहे जातकों को रोजगार मिल सकता है। प्रॉपर्टी के सम्बंधित किसी भी प्रकार के मामलों आपको सफलता प्राप्त होगी। मकान की साज सज्जा के लिए खर्च हो सकता है। जीवन साथी का पूर्ण सहयोग मिलेगा। कन्या लग्नराशि: इस सप्ताह धन लाभ तथा कुटुंब से सहयोग प्राप्त होगा तथा पराक्रम तथा आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। भाई से लाभ और सुख प्राप्त होगा तथा आय के नए श्रोत उपलब्ध होंगे। बड़े भाई तथा उच्च अधिकारियों से वाद विवाद से बचे। सामाजिक कार्य में भाग लेने का संयोग बनेगा। शौक-मौज़ की चीजों पैर खर्च होगा। वैवाहिक जीवन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव में वृद्धि हो सकती है। माता को कष्ट हो सकता है। तुला लग्नराशि : इस हफ्ते शारीरिक सुखों में बढ़ोतरी होगी स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। सभी प्रकार के मन-मुटाव दूर होंगे शादी योग्य जातकों को प्रस्ताव प्राप्त हो सकते है। स्टूडेंट के लिए अच्छा समय रहेगा। धन को लेकर यह हफ्ता बहुत अच्छा बन सकता है अतः आपकी आर्थिक स्थिति में वृद्धि हो सकती है। व्यापारिक कोई डील फाइनल हो सकती है। हफ्ते के अंत में आलस्य के चलते कुछ परेशानी हो सकती है। वृश्चिक लग्नराशि: इस हफ्ते नौकरी कर रहे जातकों के मान सम्मान में वृद्धि हो सकती है तथा नई नौकरी के ऑफर प्राप्त हो सकते है। आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। कार्यक्षेत्र से सम्बंधित यात्राएं होगी जो की बहुत लाभदायक रहेगी। स्वास्थ्य के लिहाज से हफ्ता अच्छा बना रह सकता है। धन प्राप्ति के लिए यह हफ्ता अच्छा जा सकता है। व्यर्थ के खर्च बढ़ सकते है। हफ्ते के अंत में किसी भी प्रकार के वाद विवाद से दूर रहे। धनु लग्नराशि : इस हफ्ते धन का आगमन मन को खुश कर देगा। ऑफिस में लोग आपसे खुश रहेंगे। व्यर्थ का खर्च आपको परेशान कर सकता है। वाद विवाद से दूर रहे। गाड़ी वगैरह आराम से चलाये। मनोबल में वृद्धि होगी। तथा नई योजना बनाएंगे। इस समय आपकी सभी प्रकार के कार्यों में अपनी काबिलियत सिद्ध करने के लिए समझदारी भरा कदम उठाएंगे। यात्राओं में वृद्धि हो सकती है। धार्मिक खर्च हो सकते है। मकर लग्नराशि : इस सप्ताह शरीर और मन दोनों से आप स्वस्थ रहेंगे। को आर्थिक लाभ होगा अथवा उत्तम समाचार मिलेगा। किसी पर अंधविश्वास न करें। पैसे की लेनदेन अथवा आर्थिक व्यवहार संभलकर करें। नौकरी कर रहे जातकों को कार्यक्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी तथा कुछ नए कार्यों की प्राप्ति हो सकती है। हफ्ते के अंत में मानसिक परेशानी हो सकती है तथा स्वास्थ्य गड़बड़ा सकता है। खर्च बढ़ सकते है। कुंभ लग्नराशि : इस हफ्ते आपका पराक्रम बड़ा चढ़ा रहेगा। भाग्य का साथ मिलने से आपके कार्य पूर्ण हो जाएंगे। नौकरी कर रहे लोगों को नए प्रोजेक्ट प्राप्त हो सकते है। जीवनसाथी के साथ निकटता का आनंद उठा सकेंगे। सामाजिक और सार्वजनिक क्षेत्र में आपकी ख्याति बढ़ेगी। साझेदारों के साथ संबंध सामंजस्यपूर्ण रहेंगे। परिवार में सदस्यों के साथ घूम कर आनंद का समय बिताएंगे। क्रोध से बचे अन्यथा नुकसान हो सकता है। मीन लग्नराशि: इस सप्ताह की शुरुआत अच्छी होगी भाग्य का भरपूर सहयोग आपके सभी कार्यों को बिना किसी तकलीफ के सम्पूर्ण करेगा। लोगों का सहयोग प्राप्त होगा। स्वास्थ्य के लिहाज ठीक रहेगा लेकिन छोटी -मोटी तकलीफ हो सकती है। व्यापारिक वर्ग के लोगों को व्यापार में वृद्धि होने के अच्छे अवसर प्राप्त हो सकते है। नौकरी कर रहे जातकों को अधिक परिश्रम करना पड़ सकता है। किसी भी तरह के तनाव से बचे। (साप्ताहिक राशिफल आपकी लग्न राशि के आधार पर आधारित है। ये समस्त राशिफल सामान्य हैं। किसी भी निश्चित परिणाम पर पहुंचने के लिए ज्योतिषी से दशा-अंतर दशा तथा जन्मपत्री का पूर्ण रूप से अध्ययन कराना उचित रहता है।) प्रस्तुति: कलाशांति ज्योतिष मोबाइल नं: 91-6261231618 मेल: कलाशांतिज्योतिष@.जीमेल.जीमेल.कॉम

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