अहमदाबाद। देश में दवाओं की कीमतों को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। गुजरात केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन के प्रमुख जसवंत पटेल ने दवा कंपनियों, कॉर्पोरेट हॉस्पिटलों और डॉक्टरों के बीच चल रहे करोड़ों रुपये के गठजोड़ का पर्दाफाश किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनियां छोटे केमिस्ट को 2 प्रतिशत मार्जिन देने में भी आनाकानी करती हैं, वहीं बड़ी चेन स्टोर्स और अपोलो जैसे कॉर्पोरेट हॉस्पिटलों को 30 से 50 प्रतिशत तक अतिरिक्त कमीशन दिया जा रहा है। अगर दवा कंपनियों की गठजोड़ की सही से जांच की जाए तो बड़ा खुलासा होगा। अगर इसकी सीबीआई जांच हो तो अपोलो समेत कई बड़ी कॉर्पोरेट हॉस्पिटल चेन का नेक्सस सामने आएगा। हमारा मार्जिन फिक्स है, एक छोटे व्यापारी को 2 फीसदी ज्यादा देने में भी कंपनी को दिक्कत होती है, लेकिन चेन स्टोर्स और कॉर्पोरेट हॉस्पिटलों को 30 से 50 प्रतिशत तक एक्स्ट्रा मार्जिन दिया जाता है। उन्होंने कहा कि कॉर्पोरेट हॉस्पिटलों में होने वाली खरीद में भी 30-50 फीसदी अतिरिक्त मार्जिन दी जाती है। डॉक्टरों के साथ सांठगांठ में तो खेल और बड़ा है। कैंसर जैसी दवाओं में एमआरपी और पीटीएस (प्राइस टू स्टॉकिस्ट) के बीच भारी अंतर होता है। डिस्ट्रीब्यूटर को 5 फीसदी भी ज्यादा नहीं मिलता, लेकिन बीच के इस अंतर में करोड़ों रुपये का घोटाला होता है। मैं सुप्रीम कोर्ट के जजों को धन्यवाद देता हूं। ये मामला कई सालों से चल रहा है। दवा कंपनियां जो एमआरपी तय करती हैं, उसमें बहुत बड़ा खेल है। चाहे कैंसर की दवाएं हों, इमरजेंसी में इस्तेमाल होने वाले हार्ट के इंजेक्शन हों, नेफ्रो के इंजेक्शन हों या कोई भी इमरजेंसी ड्रग हो, इनकी एमआरपी बहुत ज्यादा रखी जाती है, जबकि लागत बहुत कम होती है। उन्होंने कहा कि ये दवाएं आम केमिस्ट की दुकान पर बिकती ही नहीं हैं। हमारा मार्जिन तो सेंट्रल ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर के तहत फिक्स है और एमआरपी नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (एनपीपीए) तय करती है। लेकिन इसमें सरकार को एक एमएपीई फिक्स करना पड़ेगा। पेटेंटेड प्रोडक्ट में भी एमआरपी में काफी अंतर होता है, तो वहां भी रेट को कंट्रोल करना पड़ेगा। सरकार को इस पर कानून बनाना होगा कि पीटीएस (प्राइस टू स्टॉकिस्ट), पीटीआर (प्राइस टू रिटेलर) और एमआरपी के बीच जो अंतर है, उसे खत्म किया जाए। नियम के मुताबिक रिटेल मार्जिन 20 प्रतिशत और होलसेल मार्जिन 10 प्रतिशत है, लेकिन हकीकत में 27 रुपये की एमआरपी वाली दवा 27,000 रुपये में बिक रही है। ऐसे कई प्रोडक्ट हैं, मेरे पास पूरी लिस्ट है। उन्होंने आगे बताया कि कोरोना के दौरान इस्तेमाल हुई कई एंटीबायोटिक दवाएं सीधे अस्पतालों में इस्तेमाल हुईं। पूरे हिंदुस्तान में करीब 200 ऐसे डिस्ट्रीब्यूटर हैं, जो स्पेशियलिटी प्रोडक्ट में डील करते हैं और सीधे डॉक्टरों से जुड़े हैं। डॉक्टरों के अपने मेडिकल स्टोर्स हैं, जहां उनके रिश्तेदार बैठे हैं, और अस्पतालों के अंदर जो स्टोर्स हैं, वहां भी यही धंधा चल रहा है। वहां जमकर वसूली हो रही है। एमआरपी पर कंट्रोल नहीं है। अगर एमआरपी से ज्यादा लिया जाए तो गुनाह बनता है, लेकिन एमआरपी के अंदर ही लूट हो रही है तो उस पर कोई कानून नहीं है। जसवंत पटेल ने कहा कि एनपीपीए को ही ये सब तय करना पड़ेगा और इसके लिए कानून बनाना पड़ेगा। मध्यम और गरीब वर्ग के लोग अपनी जमीन-जायदाद बेचकर इलाज करा रहे हैं और दवाओं का बिल इतना बड़ा आता है, ये बहुत दुखद है। ज्यादातर कैंसर में इस्तेमाल होने वाली डोज की कीमत 90 हजार से एक लाख रुपये तक होती है। बॉडी की इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए 5-6 डोज लेने पड़ते हैं, जिनका एक डोज 80-90 हजार रुपये का होता है। इसमें काफी एडजस्टमेंट होता है।
नई दिल्ली। 11वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर बुधवार को पटना के अगमकुआं स्थित क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान (आरएआरआई) में प्रदर्शनी-सह-मिनी एक्सपो और पारंपरिक खाद्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस वर्ष आयुर्वेद दिवस “स्वस्थ कल के लिए आयुर्वेद” विषय के तहत मनाया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य आयुर्वेद, पारंपरिक एवं पौष्टिक खाद्य पदार्थों, मोटे अनाज (श्री अन्न) और स्वस्थ जीवनशैली से जुड़ी आदतों के बारे में जागरूकता बढ़ाना था।कार्यक्रम का उद्घाटन आईसीएमआर-आरएमएनआईएचआर के निदेशक डॉ. कृष्णा पांडे ने किया। आरएआरआई के प्रभारी डॉ. बनमाली दास ने आयुर्वेद में वर्णित पारंपरिक और पौष्टिक खाद्य पदार्थों के महत्व पर प्रकाश डाला और संतुलित आहार में स्थानीय, मौसमी और विविधतापूर्ण खाद्यान्नों की भूमिका पर जोर दिया। मिनी एक्सपो में स्थानीय खाद्य सामग्री, श्री अन्न (मिलेट्स) और स्वास्थ्यवर्धक घटकों से तैयार पारंपरिक व पौष्टिक व्यंजनों का प्रदर्शन किया गया। आगंतुकों को उनके पोषण संबंधी महत्व, स्वास्थ्य लाभों और दैनिक आहार में उनके उचित उपयोग के बारे में जानकारी दी गई। कार्यक्रम के दौरान मरीजों, उनके परिजनों और आम लोगों के लिए स्वास्थ्य जांच और चिकित्सकीय परीक्षण भी किए गए। आवश्यकता के अनुसार आयुर्वेदिक दवाएं वितरित की गईं। इसके अलावा आयुर्वेद, पोषण, रोगों से बचाव और स्वस्थ जीवनशैली से संबंधित पुस्तकों तथा सूचना, शिक्षा एवं संचार सामग्री का भी वितरण किया गया। प्रतिभागियों को संतुलित पोषण, नियमित दिनचर्या, उचित खान-पान, योग और स्वस्थ जीवनशैली के महत्व के बारे में जागरूक किया गया। आयुर्वेद के सिद्धांतों के अनुरूप मौसम और व्यक्ति की प्रकृति के अनुसार आहार तथा जीवनशैली अपनाने पर भी विशेष जोर दिया गया। आयुर्वेद दिवस के नोडल अधिकारी डॉ. बालाजी पोतभारे, अनुसंधान अधिकारी (आयुर्वेद) डॉ. अशोक कुमार सिन्हा, अनुसंधान अधिकारी (आयुर्वेद) डॉ. रितिका मिश्रा, अनुसंधान अधिकारी (आयुर्वेद) डॉ. कुमारी अर्चना तथा संस्थान के अधिकारियों और कर्मचारियों ने कार्यक्रम के आयोजन में योगदान दिया। कार्यक्रम में मरीजों, उनके परिजनों और आम लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इससे पौष्टिक एवं संतुलित भोजन, पारंपरिक आहार पद्धतियों और आयुर्वेद आधारित स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता को बढ़ावा मिला।
जामनगर। गुजरात के जामनगर में आयुर्वेद शिक्षण और अनुसंधान संस्थान (आईटीआरए) 11वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर जन-जागरूकता, स्वास्थ्य देखभाल, अनुसंधान और वैज्ञानिक गतिविधियों की एक महीने की श्रृंखला आयोजित कर रहा है। इन गतिविधियों में आयुर्वेद, स्वस्थ जीवनशैली, पोषण, निवारक स्वास्थ्य देखभाल और वैज्ञानिक अनुसंधान पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।ये गतिविधियां आयुष मंत्रालय के राज्य मंत्री-स्वतंत्र प्रभार प्रतापराव जाधव और आयुष मंत्रालय के सचिव पद्मश्री वैद्य राजेश कोटेचा के मार्गदर्शन में तथा आईटीआरए की निदेशक प्रोफेसर डॉ. तनुजा नेसरी के प्रयासों से आयोजित की जा रही हैं। इन कार्यक्रमों में स्वास्थ्य जांच शिविर, पोषण जागरूकता कार्यक्रम, चिकित्सा शिविर, वरिष्ठ नागरिकों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं, स्कूलों और आंगनबाड़ियों में कार्यक्रम, औषधीय पौधों का रोपण, वैज्ञानिक प्रशिक्षण, शोध प्रस्तुतियां और कार्यशालाएं शामिल हैं। ये गतिविधियां स्कूलों, आंगनवाड़ियों, वृद्धाश्रमों, बालिका गृहों, शिक्षण संस्थानों, सशस्त्र बलों के प्रतिष्ठानों और औद्योगिक क्षेत्रों में आयोजित की गई हैं। अब तक कम से कम 2,577 लोग इन गतिविधियों में शामिल हुए हैं। 7 से 22 सितंबर तक सेना, वायुसेना, नौसेना और सीआईएसएफ के प्रतिष्ठानों, शिक्षण संस्थानों, महिला संस्थानों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों में स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसके अलावा 11 सार्वजनिक स्थानों पर आयुर्वेदिक आहार के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए नुक्कड़ नाटक भी आयोजित किए गए। आईटीआरए ने शोध प्रस्तुतियों, प्रयोगशाला गुणवत्ता नियंत्रण प्रशिक्षण, क्यूआक्ससेल कनेक्ट प्रदर्शन और प्रशिक्षण, माइक्रोबायोम कार्यशाला और कायाप्रबोधिनी वेबिनार सहित वैज्ञानिक और शैक्षणिक गतिविधियां भी आयोजित की हैं। युवाओं के लिए 'एंशिएंट स्टेपल, मॉडर्न प्लेट' रील प्रतियोगिता, युवा संसद, स्टूडेंट एंबेसडर कार्यक्रम, राष्ट्रीय निबंध और ई-पोस्टर प्रतियोगिताएं, रन फॉर आयुर्वेद, मास्टर शेफ कुकिंग प्रतियोगिता तथा आयुर्वेद में नए मीडिया और डिजिटल संचार पर संगोष्ठी आयोजित की जा रही हैं। आईटीआरए की निदेशक प्रोफेसर डॉ. तनुजा नेसरी ने कहा कि आयुर्वेद दिवस अभियान में स्वास्थ्य, पोषण, अनुसंधान, शिक्षा, पर्यावरण और युवाओं की भागीदारी को एक साथ लाया गया है। इसका उद्देश्य आयुर्वेद को स्वास्थ्य के समग्र और निवारक दृष्टिकोण के रूप में बढ़ावा देना है।
नई दिल्ली। आयुष मंत्रालय के अंतर्गत मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (एमडीएनआईवाई) ने नौवें राष्ट्रीय पोषण माह 2026 का उद्घाटन कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें आहार विविधता, खान-पान की स्वस्थ आदतों और पर्याप्त प्रोटीन सेवन के महत्व पर प्रकाश डाला गया। भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आहार संबंधी जानकारीपूर्ण विकल्पों और पर्याप्त पोषण पर जोर देना था।कार्यक्रम के दौरान एमडीएनआईवाई की निदेशक (अतिरिक्त प्रभार) और कार्यक्रम की मुख्य संरक्षक डॉ. ज्योति केसवानी के नेतृत्व में पोषण की शपथ दिलाई गई। डॉ. केसवानी ने पौष्टिक आहार और स्वस्थ जीवनशैली के बारे में जन जागरूकता बढ़ाने के महत्व पर प्रकाश डाला। आईसीएमआर-राष्ट्रीय कैंसर निवारण एवं अनुसंधान संस्थान (आईसीएमआर-एनआईसीपीआर) की वैज्ञानिक 'डी' डॉ. स्वाति जैन ने ‘आहार विविधता और पर्याप्त प्रोटीन’ विषय पर एक ज्ञानवर्द्धक व्याख्यान दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संतुलित और विविध आहार के एक भाग के रूप में पर्याप्त प्रोटीन की आवश्यकता पर विचार किया जाना चाहिए। डॉ. जैन ने ऊतकों की मरम्मत, रोग प्रतिरोधक क्षमता, मांसपेशियों के रखरखाव और एंजाइमों एवं हार्मोनों के उत्पादन में प्रोटीन की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने भारतीय पोषण आवश्यकताओं के लिए आईसीएमआर-एनआईएन दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए बताया कि स्वस्थ वयस्कों के लिए सुरक्षित प्रोटीन सेवन की मात्रा उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीनयुक्त आहार के लिए प्रति किलोग्राम शरीर के वजन के हिसाब से 0.83 ग्राम प्रतिदिन है, जबकि कम गुणवत्ता वाले अनाज आधारित आहार के लिए यह मात्रा प्रति किलोग्राम शरीर के वजन के हिसाब से 1.0 ग्राम प्रतिदिन है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रोटीन की आवश्यकता उम्र, शरीर के आकार, मनोवैज्ञानिक स्थिति, शारीरिक गतिविधियों और स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार बदलती रहती है। डॉ. जैन ने आहार में विविधता पर जोर देते हुए अनाज के साथ-साथ दालें, दूध, सोया, मेवे और बीज शामिल करने को प्रोत्साहित किया। उन्होंने दाल-चावल, रोटी-चना, इडली-सांभर, डोसा-सांभर और खिचड़ी जैसे पारंपरिक खाद्य संयोजनों को पूरक प्रोटीन स्रोतों के व्यावहारिक उदाहरण के रूप में उद्धृत किया। उन्होंने सत्तू, दाल, भुना हुआ चना, मूंगफली और सोया जैसे किफायती प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थों पर भी प्रकाश डाला। डॉ. जैन ने बताया कि प्रोटीन का सेवन एक ही भोजन में केंद्रित करने की बजाय पूरे भोजन में विभाजित करके करना चाहिए। उन्होंने योग का अभ्यास करने वाले व्यक्तियों के लिए इस बात पर जोर दिया कि व्यायाम के बाद के 'प्रोटीन विंडो’ पर विशेष ध्यान देने की बजाय समग्र दैनिक प्रोटीन सेवन और संतुलित आहार अधिक महत्वपूर्ण हैं। इस कार्यक्रम का समन्वय एमडीएनआईवाई में सहायक प्रोफेसर (बायोकेमिस्ट्री) डॉ. खुशबू जैन द्वारा किया गया और इसका संचालन सहायक प्रोफेसर (योग शिक्षा) डॉ. पवन कुमार द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम में एमडीएनआईवाई के संचार एवं प्रलेखन अधिकारी और उप निदेशक (प्रभारी) मोहम्मद तैयब आलम, कार्यक्रम अधिकारी (योग चिकित्सा) डॉ. आईएन आचार्य, संकाय सदस्य, छात्र, अधिकारी और संस्थान के कर्मचारी उपस्थित थे। माह भर चलने वाले इस आयोजन के अंतर्गत एमडीएनआईवाई पोषण प्रश्नोत्तरी, पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता, स्कूली बच्चों के लिए पोषण जागरूकता कार्यक्रम और मातृ पोषण तथा प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमएमवीवाई) पर सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम सहित कई जागरूकता, शैक्षिक और जनसंपर्क गतिविधियों का आयोजन करेगा। यह आयोजन 8 अक्टूबर 2026 को एक समापन कार्यक्रम के साथ समाप्त होगा, जिसमें पोस्टर प्रदर्शनी, प्रतिभागियों का सम्मान और आयुर्वेदिक पोषण तथा स्वस्थ आहार संबंधी प्रणालियों पर जागरूकता सत्र शामिल होंगे।
मुंबई। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), बॉम्बे के दूसरे वर्ष के बीटेक छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या के मामले को लेकर पिछले कई दिनों से छात्र संगठनों द्वारा लगातार विरोध प्रदर्शन किए जा रहे थे और संस्थान विवादों में घिरा हुआ था। इस बीच बुधवार को खबर सामने आई है कि आईआईटी-बॉम्बे में रेगुलर क्लासेस फिर से शुरू हो गई हैं। कैंपस में कोई विरोध-प्रदर्शन नहीं हो रहा है।आईआईटी-बॉम्बे के कैंपस में 12,000 से ज्यादा छात्र और 700 से ज्यादा फैकल्टी सदस्य हैं, लेकिन अब कैंपस के अंदर कहीं भी कोई विरोध प्रदर्शन नहीं हो रहा है। सिर्फ कुछ ह्यूमैनिटीज के छात्र और एसएफआई के सदस्य कैंपस के बाहर बैठे हैं। बता दें कि मंगलवार को क्राइम ब्रांच ने साहिल के माता-पिता का बयान दर्ज किया था। क्राइम ब्रांच उनसे और जानकारी लेना चाहती है, इसके लिए उनसे दोबारा पूछताछ की जाएगी। अधिकारी ने बताया कि साहिल के पास आईफोन था और वह लॉक है। इस वजह से उसे खोलने के लिए टेक्निकल हेल्प ली जा रही है। उसके खुलने के बाद ही आगे की जानकारी मिल पाएगी, जैसे कि चैट, जीपीटी हिस्ट्री, ताकि किए गए दावों की जांच की जा सके। उन्होंने कहा कि आईआईटी बॉम्बे में एससी-एसटी सेल और स्टूडेंट काउंसलिंग सेंटर है, जहां कभी किसी भी विद्यार्थी को कोई परेशानी होती है तो उसकी जानकारी इन दो जगहों में से किसी एक जगह दी जाती है। पुलिस ने बताया कि हम इन दोनों जगहों पर पत्र देकर पूछने वाले हैं कि क्या पहले कभी साहिल ने यहां कोई शिकायत की थी या उसकी काउंसलिंग हुई थी? इससे पहले सोमवार को आईआईटी बॉम्बे ने सोमवार को उन खबरों का खंडन किया, जिनमें दावा किया गया था कि एक छात्र की आत्महत्या के कारण संस्थान के निदेशक शिरीष बी. केदारे ने इस्तीफा दे दिया है। संस्थान ने इन खबरों को गलत बताया। आईआईटी बॉम्बे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट किया कि आईआईटी बॉम्बे के डायरेक्टर ने इस्तीफा नहीं दिया है। हम साफ तौर पर कहते हैं कि इससे जुड़ी खबर झूठी है।