Sunday, November 8, 2026
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दिल्ली-एनसीआर में बारिश से गिरा तापमान, IMD ने जारी किया 'येलो अलर्ट'

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बाजार में उतार-चढ़ाव के दौर में कैसे करें निवेश? समझिए इक्विटी, गोल्ड, डेट और प्रॉपर्टी में कैसे बनाए सही संतुलन

बाजार में उतार-चढ़ाव के दौर में कैसे करें निवेश? समझिए इक्विटी, गोल्ड, डेट और प्रॉपर्टी में कैसे बनाए सही संतुलन

नई दिल्ली। शेयर बाजार में तेज उतार-चढ़ाव, वैश्विक तनाव, ब्याज दरों में बदलाव और आर्थिक अनिश्चितता के बीच निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह होता है कि अपने निवेश को कैसे सुरक्षित रखा जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि अस्थिर बाजार में किसी एक एसेट पर निर्भर रहने के बजाय इक्विटी, गोल्ड, डेट और रियल एस्टेट का संतुलित मिश्रण निवेशकों को बेहतर सुरक्षा और दीर्घकालिक वृद्धि दोनों दे सकता है। चलिए एक-एक करके समझते हैं कि इनमें सही संतुलन कैसे बनाया जा सकता है।सबसे पहले बात करते हैं इक्विटी के बारे में। शेयर बाजार में गिरावट और उतार-चढ़ाव निवेश का सामान्य हिस्सा हैं। मजबूत कंपनियों और विविधीकृत इक्विटी फंडों में लंबी अवधि तक निवेश करने से महंगाई से बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना रहती है। विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार गिरने पर जल्दबाजी में निवेश बेचने के बजाय अलग-अलग सेक्टर, मार्केट कैप और निवेश रणनीतियों में विविधता बनाए रखना बेहतर होता है। जिन निवेशकों के पास व्यक्तिगत शेयरों के अध्ययन का समय नहीं है, वे इंडेक्स फंड या इक्विटी म्यूचुअल फंड का विकल्प चुन सकते हैं। वहीं, जब बाजार में अस्थिरता बढ़ती है, तब निवेशकों का रुझान अक्सर सोने की ओर बढ़ता है। सोना पोर्टफोलियो में विविधता लाने और जोखिम कम करने में मदद करता है क्योंकि इसकी कीमतें हमेशा शेयर बाजार के साथ समान दिशा में नहीं चलतीं। भारतीय निवेशकों के पास गोल्ड ईटीएफ, गोल्ड म्यूचुअल फंड और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड जैसे विकल्प उपलब्ध हैं। हालांकि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सोने को संपत्ति निर्माण का मुख्य साधन नहीं, बल्कि जोखिम संतुलित करने वाले एसेट के रूप में देखा जाना चाहिए। वहीं, सरकारी बॉन्ड, फिक्स्ड डिपॉजिट, उच्च रेटिंग वाले कॉर्पोरेट बॉन्ड और डेट म्यूचुअल फंड जैसे निवेश विकल्प पोर्टफोलियो को स्थिरता प्रदान कर सकते हैं। इनकी अस्थिरता आमतौर पर शेयर बाजार की तुलना में कम होती है। निकट भविष्य में धन की जरूरत रखने वाले निवेशकों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले डेट इंस्ट्रूमेंट्स अपेक्षाकृत बेहतर विकल्प माने जाते हैं। निवेश से पहले ब्याज दर जोखिम, टैक्स और लिक्विडिटी जैसे पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है। प्रॉपर्टी निवेश किराया आय और पूंजी मूल्य वृद्धि दोनों का अवसर प्रदान कर सकता है। चूंकि रियल एस्टेट पर शेयर और बॉन्ड बाजारों का प्रभाव हमेशा एक जैसा नहीं होता, इसलिए यह पोर्टफोलियो में अतिरिक्त विविधता ला सकता है। हालांकि इसमें शुरुआती निवेश बड़ा होता है, खरीद-बिक्री की लागत अधिक होती है और जरूरत पड़ने पर इसे तुरंत नकदी में बदलना आसान नहीं होता। निवेश से पहले लोकेशन, संभावित किराया, भविष्य का विकास और रखरखाव लागत का मूल्यांकन जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि सही एसेट एलोकेशन हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकता है। 20-35 वर्ष के निवेशक इक्विटी में अधिक हिस्सा रख सकते हैं। वहीं, 35-50 वर्ष के निवेशक इक्विटी और डेट का संतुलन बनाना बेहतर हो सकता है, जबकि सेवानिवृत्ति के करीब निवेशक डेट, एफडी और अन्य स्थिर विकल्पों में आवंटन बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा, बाजार के जानकारों का कहना है कि बाजार में बदलाव के कारण पोर्टफोलियो का मूल संतुलन बिगड़ सकता है। इसलिए नियमित अंतराल पर पोर्टफोलियो को रीबैलेंस करते रहना चाहिए, ताकि निवेशक का पोर्टफोलियो उसकी जोखिम क्षमता और वित्तीय लक्ष्यों के अनुरूप बना रहे।

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सोने-चांदी का आउटलुक: अगले हफ्ते महंगाई के आंकड़े और भू-राजनीतिक तनाव तय करेंगे कीमती धातुओं की दिशा

सोने-चांदी का आउटलुक: अगले हफ्ते महंगाई के आंकड़े और भू-राजनीतिक तनाव तय करेंगे कीमती धातुओं की दिशा

मुंबई। आने वाले सप्ताह में सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशकों की नजर भू-राजनीतिक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से जारी होने वाले महंगाई के महत्वपूर्ण आंकड़ों पर रहेगी। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के साथ-साथ वैश्विक ब्याज दरों की आगे की दिशा को लेकर बनी उम्मीदें भी बुलियन बाजार में निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकती हैं। निवेशक चीन, अमेरिका, जर्मनी, जापान और भारत के महंगाई के आंकड़ों पर नजर रखेंगे। इन आंकड़ों से यह आकलन करने में मदद मिलेगी कि आने वाले समय में प्रमुख केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीति किस दिशा में जा सकती है। अमेरिका के श्रम बाजार से जुड़े आंकड़े और फेडरल रिजर्व के अधिकारियों की टिप्पणियां भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी। निवेशक इनसे ब्याज दरों में संभावित बदलाव के समय को लेकर संकेत हासिल करने की कोशिश करेंगे। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मध्य पूर्व में होने वाले भू-राजनीतिक घटनाक्रम कीमती धातुओं की कीमतों को प्रभावित करने वाला प्रमुख कारक बने रह सकते हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ आगे भी सैन्य कार्रवाई की पुष्टि की है, हालांकि उन्होंने तेहरान के साथ बातचीत में महत्वपूर्ण प्रगति होने की बात भी कही है। इससे निवेशकों के बीच यह अनिश्चितता बढ़ गई है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव आगे और बढ़ेगा या फिर कूटनीतिक प्रयासों के जरिए किसी संभावित समाधान का रास्ता निकलेगा। अमेरिका-ईरान तनाव के अलावा रूस-यूक्रेन शांति वार्ता से जुड़े घटनाक्रम पर भी निवेशकों की नजर रहेगी। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, इन भू-राजनीतिक घटनाक्रमों की दिशा सोने और चांदी जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग पर महत्वपूर्ण असर डाल सकती है। जब वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ती है, तो निवेशक अक्सर सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख करते हैं। घरेलू बाजार में पिछले सप्ताह मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर दिसंबर डिलीवरी वाले सोने के वायदा भाव में 3,682 रुपये यानी करीब 3 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। सप्ताह के अंत में सोना 1.42 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। वहीं, चांदी के वायदा भाव में भी तेजी रही। चांदी 5,655 रुपये यानी 3.15 प्रतिशत बढ़कर 1.84 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं में इससे भी मजबूत रिकवरी देखने को मिली। कॉमेक्स पर दिसंबर डिलीवरी वाला सोना सप्ताह के दौरान 176 डॉलर यानी 4.5 प्रतिशत बढ़कर 4,074.90 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ। वहीं, चांदी का वायदा भाव 2.60 डॉलर यानी 5.4 प्रतिशत बढ़कर 51.94 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, सप्ताह की शुरुआत में सोने और चांदी की कीमतों में कमजोरी की प्रमुख वजह अमेरिका के उम्मीद से बेहतर गैर-कृषि रोजगार आंकड़े और उपभोक्ता धारणा में सुधार रहा। इन घटनाक्रमों से अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड में भी बढ़ोतरी हुई। इससे कीमती धातुओं की कीमतों पर दबाव पड़ा। हालांकि, सप्ताह के मध्य में सोने और चांदी की कीमतों में तेज रिकवरी देखने को मिली। कीमतों में गिरावट के बाद निवेशकों ने निचले स्तर पर खरीदारी की। इसके साथ ही शॉर्ट पोजीशन की कवरिंग से भी बाजार को सहारा मिला। इससे दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में तेज उछाल आया।

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डेबिट कार्ड के साथ मिलता है 2 लाख रुपए तक का मुफ्त बीमा! क्या आपको इसकी जानकारी है?

डेबिट कार्ड के साथ मिलता है 2 लाख रुपए तक का मुफ्त बीमा! क्या आपको इसकी जानकारी है?

नई दिल्ली। क्या आप जानते हैं कि आपके डेबिट कार्ड के साथ एक मुफ्त बीमा कवर भी मिल सकता है? भारत के अधिकांश बैंक अपने ग्राहकों को डेबिट कार्ड के साथ व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा (पर्सनल एक्सीडेंट इंश्योरेंस) या दुर्घटना मृत्यु बीमा का लाभ देते हैं। कई मामलों में यह कवर 50,000 रुपए से लेकर 2 लाख रुपए या उससे अधिक तक हो सकता है। हालांकि बड़ी संख्या में बैंक ग्राहक और उनके परिवार इस सुविधा से अनजान रहते हैं।बैंकों द्वारा दिया जाने वाला यह बीमा आमतौर पर कार्ड के प्रकार पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए रुपे प्लेटिनम जैसे कार्डों पर अक्सर 2 लाख रुपए तक का दुर्घटना बीमा कवर उपलब्ध होता है। कुछ प्रीमियम कार्डों पर यह राशि इससे भी अधिक हो सकती है। बीमा के तहत दुर्घटना में मृत्यु, स्थायी पूर्ण विकलांगता जैसी स्थितियों में लाभ दिया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, केवल डेबिट कार्ड होना पर्याप्त नहीं है। अधिकांश बैंकों की शर्तों के मुताबिक कार्ड "सक्रिय" होना चाहिए। आम तौर पर दुर्घटना से पहले 30 से 90 दिनों के भीतर कार्ड से कोई लेन-देन किया गया होना आवश्यक होता है। साथ ही, बीमा दावा करने की समय-सीमा भी बैंक के नियमों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। इसलिए ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने बैंक से यह जानकारी जरूर प्राप्त करें कि उनके कार्ड पर कितना बीमा कवर उपलब्ध है और दावे की शर्तें क्या हैं। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) अपने विभिन्न डेबिट कार्डों पर 2 लाख से 50 लाख रुपए तक का बीमा कवर उपलब्ध कराता है। इसमें पर्सनल एक्सीडेंटल इंश्योरेंस (मृत्यु) और एयर एक्सीडेंटल इंश्योरेंस जैसे लाभ शामिल हैं। हालांकि बैंक की वेबसाइट के अनुसार वीज़ा, मास्टरकार्ड ग्लोबल, क्लासिक और वर्चुअल कार्डों पर यह सुविधा उपलब्ध नहीं है। वहीं एचडीएफसी बैंक भी अपने कई डेबिट कार्डों पर पर्सनल एक्सीडेंटल डेथ कवर प्रदान करता है। उदाहरण के तौर पर, एचडीएफसी के प्लेटिनम डेबिट कार्ड धारकों को पात्र अंतरराष्ट्रीय हवाई टिकटों पर 3 करोड़ रुपए तक का एयर एक्सीडेंट कवर उपलब्ध कराया जाता है। यह सुविधा क्लासिक, प्रेफर्ड, इम्पेरिया, प्लेटिनम, विशेष और मनीबैक डेबिट कार्ड ग्राहकों के लिए उपलब्ध है। यदि कार्डधारक की दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है, तो नामांकित व्यक्ति या कानूनी उत्तराधिकारी को निर्धारित समय के भीतर बैंक में दावा प्रस्तुत करना होता है। उदाहरण के लिए एचडीएफसी बैंक के नियमों के अनुसार, दावे के लिए आवेदन मृत्यु के एक महीने के भीतर निकटतम शाखा में जमा करना होता है। इसके लिए मृत्यु प्रमाण पत्र, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, पुलिस जांच रिपोर्ट, बैंक स्टेटमेंट और नॉमिनी के केवाईसी दस्तावेज जैसे रिकॉर्ड जमा करने पड़ते हैं। अलग-अलग बैंकों के नियमों के अनुसार दावा प्रक्रिया और समय-सीमा में अंतर हो सकता है। वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार परिवार को इस तरह के बीमा कवर की जानकारी ही नहीं होती, जिसके कारण पात्र होने के बावजूद दावा नहीं किया जाता। इसलिए अपने डेबिट कार्ड से जुड़े बीमा लाभ, नामांकन और दावा प्रक्रिया की जानकारी परिवार के सदस्यों के साथ साझा करना बेहद जरूरी है।

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सोना या चांदी, 1 लाख रुपए के निवेश पर 1, 3 और 5 साल में किसने दिया ज्यादा रिटर्न? जानिए पूरा हिसाब

सोना या चांदी, 1 लाख रुपए के निवेश पर 1, 3 और 5 साल में किसने दिया ज्यादा रिटर्न? जानिए पूरा हिसाब

नई दिल्ली। भारतीय परिवारों में सोना और चांदी लंबे समय से निवेश और संपत्ति सुरक्षित रखने के प्रमुख साधन रहे हैं। हालांकि पिछले कुछ वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि दोनों धातुओं का प्रदर्शन अलग-अलग रहा है। जहां हाल के वर्षों में चांदी ने तेज रफ्तार दिखाई है, वहीं लंबी अवधि में सोना भी मजबूत रिटर्न देने में सफल रहा है। ऐसे में निवेशकों के मन में अक्सर सवाल रहता है कि यदि कुछ साल पहले सोना या चांदी खरीदी होती तो आज कितना फायदा होता। उद्योग संगठन आईबीजेए के 999 शुद्धता वाले सोना और चांदी के बेंचमार्क भावों के आधार पर देखें तो पिछले एक वर्ष में चांदी ने सोने से बेहतर प्रदर्शन किया है। यदि किसी निवेशक ने एक साल पहले चांदी में 1 लाख रुपए लगाए होते, तो उसकी राशि बढ़कर लगभग 1.18 लाख रुपए हो जाती। वहीं सोने में लगाया गया 1 लाख रुपए का निवेश करीब 1.14 लाख रुपए का होता। तीन वर्षों की अवधि में चांदी का प्रदर्शन और अधिक प्रभावशाली रहा है। इस दौरान चांदी ने करीब 149.29 प्रतिशत का रिटर्न दिया। यानी तीन साल पहले निवेश किए गए 1 लाख रुपए बढ़कर करीब 2.49 लाख रुपए हो गए होते। दूसरी ओर सोने ने इसी अवधि में 125.26 प्रतिशत का रिटर्न दिया और 1 लाख रुपए का निवेश बढ़कर करीब 2.25 लाख रुपए पहुंच गया। हालांकि पांच साल के आंकड़ों में तस्वीर थोड़ी बदल जाती है। लंबी अवधि में सोने ने चांदी को मामूली अंतर से पीछे छोड़ दिया। पांच साल पहले सोने में लगाए गए 1 लाख रुपए बढ़कर करीब 2.88 लाख रुपए हो गए होते, जबकि चांदी में किया गया समान निवेश लगभग 2.79 लाख रुपए तक पहुंचता। यानी अल्पकाल और मध्यम अवधि में चांदी बेहतर रही, लेकिन लंबी अवधि में सोने ने बढ़त बनाई रखी। विशेषज्ञों के मुताबिक सोना और चांदी दोनों की कीमतें कुछ सामान्य कारकों जैसे डॉलर की चाल, ब्याज दरों, वैश्विक तनाव और निवेशकों की मांग से प्रभावित होती हैं। हालांकि चांदी की एक बड़ी विशेषता यह है कि इसका उपयोग निवेश के अलावा औद्योगिक क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर होता है। सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग में बढ़ती मांग के कारण कई बार चांदी की कीमतें सोने की तुलना में अधिक तेजी दिखाती हैं। दूसरी ओर यही कारण इसे अधिक अस्थिर भी बनाता है। बाजार के जानकारों का कहना है कि सोना आमतौर पर सुरक्षित निवेश माना जाता है और आर्थिक या भू-राजनीतिक अनिश्चितता के दौरान निवेशकों का भरोसा इसकी ओर बढ़ जाता है। वहीं चांदी में ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है, इसलिए इसमें मुनाफे की संभावना अधिक होने के साथ जोखिम भी ज्यादा रहता है। विशेषज्ञाें के अनुसार, ये आंकड़े केवल बेंचमार्क कीमतों पर आधारित हैं। वास्तविक निवेश में सोना और चांदी खरीदते समय 3 प्रतिशत जीएसटी, ज्वेलरी पर मेकिंग चार्ज और बिक्री के समय शुद्धता तथा डीलर मार्जिन जैसे कारकों का भी असर पड़ता है। जो निवेशक फिजिकल मेटल रखने से बचना चाहते हैं, वे गोल्ड ईटीएफ और सिल्वर ईटीएफ जैसे विकल्पों पर भी विचार कर सकते हैं।

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मुहूर्त ट्रेडिंग पर सेंसेक्स सपाट बंद, स्मॉलकैप में रही खरीदारी

मुहूर्त ट्रेडिंग पर सेंसेक्स सपाट बंद, स्मॉलकैप में रही खरीदारी

मुंबई। भारतीय शेयर बाजार मुहूर्त ट्रेडिंग पर शुक्रवार को करीब सपाट बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 28.02 अंक या 0.04 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 80,999.40 और निफ्टी 43.95 अंक या 0.18 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,986.40 पर था। लार्जकैप की अपेक्षा मिडकैप और स्मॉलकैप में खरीदारी देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 81.50 अंक या 0.13 प्रतिशत की मजबूती के साथ 60,688.15 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 191.35 अंक या 1.01 प्रतिशत की तेजी के साथ 19,166.40 पर था। सूचकांकों में निफ्टी फार्मा, निफ्टी मीडिया, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग, निफ्टी एनर्जी, निफ्टी मेटल, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी कमोडिटीज, निफ्टी ऑटो और निफ्टी पीएसई गेनर्स थे। दूसरी तरफ निफ्टी रियल्टी, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी आईटी, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी कंजप्शन और निफ्टी एफएमसीजी लूजर्स थे। सेंसेक्स पैक में सन फार्मा, टाटा स्टील, मारुति सुजुकी, पावर ग्रिड, अदाणी पोर्ट्स, बीईएल, अल्ट्राटेक सीमेंट, इटरनल, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचसीएल टेक, एचयूएल, टेक महिंद्रा, एनटीपीसी, आईटीसी, टाइटन और कोटक महिंद्रा बैंक गेनर्स थे। एमएंडएम, इंडिगो, ट्रेंट, इन्फोसिस, भारती एयरटेल, एक्सिस बैंक, बजाज फिनसर्व, एचडीएफसी बैंक, एलएंडटी, एशियन पेंट्स, आईसीआईसीआई बैंक, एसबीआई, टीसीएस और बजाज फाइनेंस लूजर्स थे। मुहूर्त ट्रेडिंग के दौरान बाजार में हुई व्यापक खरीदारी से बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर सूचीबद्ध सभी कंपनियों का मार्केटकैप 2 लाख करोड़ रुपए बढ़कर 505 लाख करोड़ रुपए हो गया है। जानकारों ने दीपावली की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि दो साल की सुस्ती के बाद, कम वैल्यूएशन और कमाई में तेज बढ़ोतरी के मेल से, बाजार में अगली दीपावली तक निवेशकों को शानदार रिटर्न देने की क्षमता है। कच्चे तेल की कीमतों में संभावित गिरावट, स्थिर करेंसी, विदेशी निवेशकों की वापसी, एआई को लेकर मचे शोर में कमी और हर क्षेत्र में कमाई में बढ़ोतरी जैसे कारक मिलकर आने वाले समय में बाजार को ऊपर ले जाएंगे।

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