Monday, October 12, 2026

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विराट कोहली का महा-रिकॉर्ड: सचिन को पीछे छोड़ बने सबसे तेज 15 हजारी

विराट कोहली का महा-रिकॉर्ड: सचिन को पीछे छोड़ बने सबसे तेज 15 हजारी

व्यापार की खबरें

वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में सिक्योरिटाइजेशन वॉल्यूम में हुई 42 प्रतिशत की बढ़ोतरी, रिकॉर्ड 1.47 लाख करोड़ रुपए का कारोबार

वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में सिक्योरिटाइजेशन वॉल्यूम में हुई 42 प्रतिशत की बढ़ोतरी, रिकॉर्ड 1.47 लाख करोड़ रुपए का कारोबार

नई दिल्ली। एक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही (एच1) में भारत का सिक्योरिटाइजेशन (प्रतिभूतिकरण) बाजार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इस अवधि में कुल सिक्योरिटाइजेशन वॉल्यूम यानी मात्रा 1.47 लाख करोड़ रुपए रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 42 प्रतिशत अधिक है।आईसीआरए (आईसीआरए) की रिपोर्ट में कहा गया है कि दूसरी तिमाही में गतिविधियों में तेज उछाल देखने को मिला और वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में सिक्योरिटाइजेशन वॉल्यूम 86,000 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। इस वृद्धि को मुख्य रूप से गोल्ड लोन सेगमेंट में बढ़ती मांग, वाहन ऋण सिक्योरिटाइजेशन में सुधार तथा एमएसएमई और बिजनेस लोन पोर्टफोलियो में लगातार बने आकर्षण का समर्थन मिला। आईसीआरए के अनुसार, सिक्योरिटाइजेशन वॉल्यूम में तेजी का एक प्रमुख कारण गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) द्वारा अपनी फंडिंग जरूरतों को पूरा करने के लिए इस माध्यम पर बढ़ती निर्भरता भी रही है। रिपोर्ट में बताया गया है कि गोल्ड लोन इस वृद्धि का सबसे बड़ा चालक रहा। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में गोल्ड लोन सिक्योरिटाइजेशन का वॉल्यूम सालाना आधार पर लगभग डेढ़ गुना बढ़ गया। आईसीआरए के वाइस प्रेसिडेंट और स्ट्रक्चर्ड फाइनेंस रेटिंग्स के सह-समूह प्रमुख सचिन जोगलेकर ने कहा कि वाहन, एमएसएमई या व्यावसायिक लोन और मॉर्गेज जैसे पारंपरिक सेगमेंट भी स्थिर गति से बढ़ते रहे, जिससे कुल वॉल्यूम को मजबूती मिली। उन्होंने कहा कि पहली छमाही के मजबूत प्रदर्शन से आईसीआरए के उस अनुमान को समर्थन मिलता है, जिसके अनुसार पूरे वित्त वर्ष 2026-27 में सिक्योरिटाइजेशन वॉल्यूम 2.6 लाख करोड़ से 2.7 लाख करोड़ रुपए के नए रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है। हालांकि सबसे अधिक वृद्धि गोल्ड लोन श्रेणी में रही, लेकिन वाहन लोन सिक्योरिटाइजेशन ने भी अपनी खोई हुई हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा वापस हासिल किया है। वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में कुल सिक्योरिटाइजेशन वॉल्यूम का लगभग एक-तिहाई हिस्सा वाहन ऋणों का रहा, जबकि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में इसकी हिस्सेदारी लगभग 25 प्रतिशत थी। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ ऋणदाताओं ने दोबारा इस बाजार में प्रवेश किया है, जबकि कुछ ने दूसरी तिमाही में अपनी बिक्री की मात्रा बढ़ाई है। गोल्ड लोन और वाहन लोन के बाद मॉर्गेज लोन, स्मॉल बिजनेस लोन और माइक्रोलोन अन्य प्रमुख परिसंपत्ति श्रेणियां रहीं, जिनकी हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही (एच1) की कुल वॉल्यूम में 12 से 15 प्रतिशत के बीच रही। लेनदेन संरचना के लिहाज से सिक्योरिटाइजेशन बाजार में पास-थ्रू सर्टिफिकेट (पीटीसी) और डायरेक्ट असाइनमेंट (डीए) दोनों मार्गों की हिस्सेदारी लगभग बराबर रही। यह रुझान पिछली तिमाही जैसा ही बना रहा। रिपोर्ट के अनुसार, गोल्ड लोन, वाहन लोन और एमएसएमई फाइनेंसिंग जैसे क्षेत्रों की मजबूत मांग, साथ ही एनबीएफसी की बढ़ती फंडिंग जरूरतें, आने वाले महीनों में भी सिक्योरिटाइजेशन बाजार को गति देती रह सकती हैं।

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भारत में सितंबर में खुदरा महंगाई 5.54 प्रतिशत रही, आलू और टमाटर हुए सस्ते

भारत में सितंबर में खुदरा महंगाई 5.54 प्रतिशत रही, आलू और टमाटर हुए सस्ते

नई दिल्ली। भारत में सितंबर 2026 में खुदरा महंगाई सालाना आधार पर बढ़कर 5.54 प्रतिशत (प्रोविजनल) हो गई है, जबकि अगस्त में यह 4.83 प्रतिशत (फाइनल) थी। यह जानकारी सरकार की ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों में दी गई। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर 2026 में ग्रामीण भारत में खुदरा महंगाई 6.08 प्रतिशत रही है, जबकि शहरी इलाकों में यह 4.88 प्रतिशत रही है। सितंबर 2026 में खाद्य मंहगाई दर सालाना आधार पर 7.74 प्रतिशत रही है। ग्रामीण इलाकों में यह 8.06 प्रतिशत और शहरी इलाकों में 7.18 प्रतिशत रही है। बीते महीने जिन शीर्ष पांच उत्पादों की कीमतों में कमी देखने को मिली है, उनमें आलू (-11.50 प्रतिशत), टमाटर (-8.62 प्रतिशत), मोटर कार एंड जीव (-4.51 प्रतिशत), भिंडी (-4.48 प्रतिशत) और नारियल (-3.99 प्रतिशत) शामिल हैं। इसके अलावा, सितंबर में जिन शीर्ष पांच उत्पादों की कीमतों में इजाफा हुआ है उनमें प्याज (+108.09 प्रतिशत), चांदी की ज्वेलरी (+87.80 प्रतिशत), अदरक (+62.85 प्रतिशत), लहसुन (+54.62 प्रतिशत)और नींबू (+36.41 प्रतिशत) शामिल हैं। सितंबर में तमिलनाडु (6.81 प्रतिशत), ओडिशा (6.70 प्रतिशत), मध्य प्रदेश (6.68 प्रतिशत), तेलंगाना (6.64 प्रतिशत) और आंध्र प्रदेश (6.29 प्रतिशत), देश में सबसे अधिक खुदरा महंगाई दर्ज करने वाले शीर्ष पांच राज्य थे। सरकार ने बताया कि कीमतों को अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 1,407 शहरी बाजारों (जिनमें ऑनलाइन बाजार भी शामिल हैं) और 1,465 गांवों से इकट्ठा किया गया था। सितंबर के दौरान ग्रामीण और शहरी दोनों बाजारों में रिस्पॉन्स रेट 100 प्रतिशत रहा, जिससे कीमतों में होने वाले बदलावों की पूरी जानकारी मिल सकी। साथ ही कहा कि सरकार अक्टूबर 2026 के लिए खुदरा महंगाई के आंकड़े 12 नवंबर, 2026 को जारी किए जाएंगे। अगर उस दिन कोई छुट्टी होती है, तो आंकड़ों को अगले कामकाजी दिन जारी किया जाएगा। वहीं, सितंबर के थोक महंगाई के आंकड़े मंगलवार को जारी किए जाएंगे।

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पीएम गतिशक्ति के तहत 18.66 लाख करोड़ रुपए की 396 बड़ी परियोजनियों की निगरानी, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को मिली रफ्तार

पीएम गतिशक्ति के तहत 18.66 लाख करोड़ रुपए की 396 बड़ी परियोजनियों की निगरानी, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को मिली रफ्तार

नई दिल्ली। केंद्र सरकार की पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (एनएमपी) के तहत 11 अगस्त 2026 तक 18.66 लाख करोड़ रुपए के निवेश वाली 396 बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनियां शामिल की जा चुकी हैं। सरकार द्वारा सोमवार को जारी एक फैक्टशीट के अनुसार, इनमें से 256 परियोजनियों को मंजूरी मिल चुकी है और 198 परियोजनाएं क्रियान्वयन के चरण में हैं।पीएम गतिशक्ति का संस्थागत ढांचा एक डिजिटल प्लेटफॉर्म से समर्थित है, जो योजनाकारों को भू-स्थानिक डेटा, सैटेलाइट इमेजरी और विश्लेषणात्मक उपकरण उपलब्ध कराता है। यह प्लेटफॉर्म आर्थिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक्स केंद्रों को मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी अवसंरचना के साथ जोड़कर समेकित योजना बनाने में मदद करता है। पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान आर्थिक क्षेत्रों, सामाजिक केंद्रों और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मानचित्र पर दर्शाता है, जिसके जरिए उन कनेक्टिविटी कमियों की पहचान की जाती है जो लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की सुचारू आवाजाही में बाधा बन सकते हैं। इस योजना के तहत टेक्सटाइल क्लस्टर, फार्मास्यूटिकल हब, रक्षा गलियारे, इलेक्ट्रॉनिक्स पार्क, औद्योगिक गलियारे, मत्स्य क्लस्टर और कृषि क्षेत्र जैसे आर्थिक जोनों को भी शामिल किया गया है, ताकि एकीकृत इंफ्रास्ट्रक्चर योजना तैयार की जा सके। उदाहरण के तौर पर, बिहार के खगड़िया-पूर्णिया कॉरिडोर को पांच पीएम गतिशक्ति आर्थिक नोड्स से जोड़ने की योजना बनाई गई है, जिनमें टेक्सटाइल क्लस्टर, मेगा फूड पार्क और फिशिंग/सीफूड पार्क शामिल हैं। इसके साथ 11 लॉजिस्टिक्स नोड्स को भी जोड़ा जाएगा, जिससे क्षेत्र में माल और यात्रियों की आवाजाही तेज होने की उम्मीद है। सरकार का कहना है कि भारत जिस पैमाने पर बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रहा है, वहां सड़क, रेलवे, बंदरगाह, हवाई अड्डे, जलमार्ग और उपयोगिता सेवाओं के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता है। विभिन्न नेटवर्क की संयुक्त योजना से लागत और समय दोनों की बचत होती है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए 13 अक्टूबर 2021 को पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान की शुरुआत की गई थी। इसने विभिन्न मंत्रालयों, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के डेटा को एक साझा जीआईएस-आधारित प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया। पांच वर्षों में यह पहल देशव्यापी योजना ढांचे के रूप में विकसित हो चुकी है। पीएम गतिशक्ति छह प्रमुख सिद्धांतों पर आधारित है, जिनमें एकीकृत विकास, मल्टीमॉडल अवसंरचना, लास्ट-माइल कनेक्टिविटी, भूमि अधिग्रहण में तेजी, कम मंजूरियां और पर्यावरणीय प्रभाव को कम करना शामिल हैं। योजना के मुख्य सात इंफ्रास्ट्रक्चर इंजन हैं - सड़क, रेलवे, बंदरगाह, जलमार्ग, हवाई अड्डे, मास ट्रांजिट और लॉजिस्टिक्स अवसंरचना। राष्ट्रीय मास्टर प्लान में 58 केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के साथ-साथ सभी 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को शामिल किया गया है। इससे विभिन्न क्षेत्रों की परियोजनाओं का एक साथ मूल्यांकन और योजना बनाना संभव हो सका है। पीएम गतिशक्ति पब्लिक प्लेटफॉर्म पर 230 स्वीकृत डेटासेट उपलब्ध हैं, जिनका उपयोग साइट चयन, कनेक्टिविटी मैपिंग, अलाइनमेंट प्लानिंग और अनुपालन जांच के लिए किया जा सकता है। 12 अक्टूबर तक 23,493 से अधिक डेटा लेयर इस साझा जीआईएस-आधारित प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं, जो इंफ्रास्ट्रक्चर योजना और निर्णय प्रक्रिया को अधिक डेटा-आधारित और प्रभावी बनाते हैं।

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वैश्विक अस्थिरता बढ़ने से भारतीय शेयर बाजार लाल निशान में बंद; सेंसेक्स 72,000 के नीचे

वैश्विक अस्थिरता बढ़ने से भारतीय शेयर बाजार लाल निशान में बंद; सेंसेक्स 72,000 के नीचे

मुंबई। भारतीय शेयर बाजार सोमवार के कारोबारी सत्र में लाल निशान में बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 547.65 अंक या 0.76 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 71,924.68 और निफ्टी 157.10 अंक या 0.70 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 22,363.35 पर था। बाजार में बिकवाली का सबसे अधिक दबाव एफएमसीजी और सरकारी बैंकिंग स्टॉक्स में देखा गया। सूचकांकों में निफ्टी एफएमसीजी 1.67 प्रतिशत और निफ्टी पीएसयू बैंक 1.18 प्रतिशत की कमजोरी के साथ टॉप लूजर्स थे। इसके अलावा, निफ्टी इन्फ्रा, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी आईटी, निफ्टी कंजप्शन, निफ्टी कमोडिटीज और निफ्टी ऑयल एंड गैस सबसे ज्यादा गिरने वाले सूचकांकों में शामिल थे। दूसरी तरफ निफ्टी मीडिया, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी ऑटो, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग, निफ्टी फार्मा, निफ्टी पीएसई और निफ्टी एनर्जी हरे निशान में थे। लार्जकैप के उलट मिडकैप और स्मॉलकैप में खरीदारी देखी गई। निफ्टी स्मॉलैकप 100 इंडेक्स 272.10 अंक या 1.42 प्रतिशत की बढ़त के साथ 19,425.80 और निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 47.25 अंक की मामूली तेजी के साथ 58,834.55 पर बंद हुआ। सेंसेक्स पैक में बीईएल, एमएंडएम, कोटक महिंद्रा बैंक, एचसीएल टेक, बजाज फाइनेंस, सन फार्मा और टाइटन गेनर्स थे। आईटीसी, टेक महिंद्रा, एचयूएल, एलएंडटी, एसबीआई, टीसीएस, भारती एयरटेल, बजाज फिनसर्व, अल्ट्राटेक सीमेंट, इंडिगो, टाटा स्टील, इन्फोसिस, आईसीआईसीआई बैंक, मारुति सुजुकी, एशियन पेंट्स, एचडीएफसी बैंक, ट्रेंट, एक्सिस बैंक, एनटीपीसी, इटरनल और पावर ग्रिड लूजर्स थे। जानकारों ने कहा कि 10-साल के बॉन्ड यील्ड के तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचने और बाहरी अनिश्चितताओं के कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली से सेंटीमेंट कमजोर होने के कारण भारतीय बाजार सत्र की शुरुआती बढ़त को बनाए नहीं रख पाए। आरबीआई द्वारा ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की डॉलर की जरूरतों के लिए एक स्पेशल विंडो खोलने और हेजिंग नियमों को सख्त करने के बाद रुपए में रिकवरी आई, जिससे करेंसी पर दबाव कम करने में मदद मिली। उन्होंने आगे कहा कि आरबीआई द्वारा अतिरिक्त लिक्विडिटी को सोखने के लिए दैनिक सीआरआर मेंटेनेंस की जरूरत को बढ़ाने के बाद बैंकिंग शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट आई, जबकि निवेशक आगे और मॉनेटरी टाइटनिंग की गुंजाइश के संकेतों के लिए घरेलू सीपीआई महंगाई के आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, मध्य पूर्व में तनाव एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है, क्योंकि सऊदी और क्षेत्रीय एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हूती हमलों के जारी रहने से संभावित आपूर्ति में रुकावट और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।

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भारत के वित्तीय सेवा क्षेत्र में सौदों का मूल्य 2026 की तीसरी तिमाही में दोगुने से अधिक बढ़कर 7.3 अरब डॉलर रहा

भारत के वित्तीय सेवा क्षेत्र में सौदों का मूल्य 2026 की तीसरी तिमाही में दोगुने से अधिक बढ़कर 7.3 अरब डॉलर रहा

नई दिल्ली। भारत के वित्तीय सेवा क्षेत्र में 2026 की तीसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में 7.3 अरब डॉलर के 67 सौदे दर्ज किए गए। यह जानकारी सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई।ग्रांट थॉर्नटन भारत की रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान सौदों का कुल मूल्य तिमाही-दर-तिमाही आधार पर 129 प्रतिशत बढ़ा, जबकि सौदों की संख्या मामूली रूप से 65 से बढ़कर 67 हो गई। सौदों के मूल्य में इस तेज वृद्धि के पीछे बड़े मूल्य वाले विलय एवं अधिग्रहण (एमएंडए) सौदे और सार्वजनिक बाजार में पूंजी जुटाने की गतिविधियों की अहम भूमिका रही। इनमें दो बड़े आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) भी शामिल थे। आईपीओ और क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (क्यूआईपी) को छोड़कर विलय एवं अधिग्रहण (एमएंडए) और प्राइवेट इक्विटी/वेंचर कैपिटल (पीई/वीसी) गतिविधियों के तहत 3 अरब डॉलर के 58 सौदे हुए। 2026 की तीसरी तिमाही में एमएंडए सौदों का मूल्य पिछली तिमाही की तुलना में 54 प्रतिशत बढ़ा। साथ ही, सार्वजनिक बाजार के माध्यम से पूंजी जुटाने की गतिविधियों में मजबूती आई, वहीं पीई/वीसी निवेश में सौदों की संख्या और मूल्य, दोनों में गिरावट दर्ज की गई। फिनटेक, बैंकिंग और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) का संयुक्त रूप से कुल सौदों की संख्या में लगभग 67 प्रतिशत योगदान रहा। यह प्रौद्योगिकी आधारित वित्तीय प्लेटफॉर्म और ऋण कारोबार में निवेशकों के लगातार बने हुए विश्वास को दर्शाता है। ग्रांट थॉर्नटन भारत में फाइनेंशियल सर्विसेज रिस्क एडवाइजरी के पार्टनर और एनबीएफसी इंडस्ट्री लीडर विवेक अय्यर ने कहा, “जैसे-जैसे पूंजी निवेश के मामले में चयनात्मक रुख बढ़ रहा है, वैसे-वैसे ग्रोथ को टिकाऊ रिटर्न में बदलने की क्षमता यह तय करेगी कि किन वित्तीय कंपनियों को निवेश मिलेगा।" उन्होंने कहा कि अधिक लागत वाले माहौल में मजबूत फंडिंग मॉडल, बेहतर यूनिट इकोनॉमिक्स और नियामकीय चुनौतियों से निपटने की क्षमता उतनी ही महत्वपूर्ण होगी, जितना कि कारोबार का विस्तार करने का अवसर। उन्होंने आगे कहा, “भारत के वित्तीय इकोसिस्टम में विकास की अभी भी काफी संभावनाएं हैं, लेकिन अगले चरण में उन कारोबारों को फायदा होगा जो केवल तेजी से नहीं, बल्कि टिकाऊ तरीके से आगे बढ़ सकते हैं।” 2026 की तीसरी तिमाही में एमएंडए गतिविधियों के तहत 2.3 अरब डॉलर के 23 सौदे दर्ज किए गए। हालांकि, पिछली तिमाही की तुलना में सौदों की संख्या में 4 प्रतिशत की गिरावट आई, लेकिन एक बड़े सौदे के कारण कुल मूल्य में 54 प्रतिशत की वृद्धि हुई। घरेलू सौदों की कुल संख्या में 78 प्रतिशत हिस्सेदारी रही, लेकिन सौदों के कुल मूल्य में उनका योगदान केवल 9 प्रतिशत था। वहीं, विदेश से भारत में किए गए तीन सौदों का एमएंडए के कुल मूल्य में लगभग 90 प्रतिशत योगदान रहा। विदेशों में भारतीय कंपनियों की ओर से किए गए सौदों की गतिविधियां भी धीमी रहीं। दूसरी तिमाही में ऐसे सात सौदे हुए थे, जबकि तीसरी तिमाही में इनकी संख्या घटकर दो रह गई।

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