लुसाका। जाम्बिया में राष्ट्रपति चुनाव के लिए गुरुवार को वोटिंग जारी है। इस बीच मौजूदा राष्ट्रपति हाकाइंडे हिचिलेमा को अपने दिवंगत राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी और पूर्व राष्ट्रपति एडगर लुंगु की विरासत का सामना करना पड़ रहा है। लुंगु का 2025 में निधन हो गया था, लेकिन उनकी राजनीतिक छाप अब भी चुनावी माहौल में स्पष्ट दिखाई दे रही है।

हिचिलेमा और लुंगु के बीच लंबे समय से राजनीतिक टकराव रहा है। लुंगु के निधन के बाद उनके अंतिम संस्कार और पार्थिव शरीर को लेकर भी विवाद खड़ा हुआ था। लुंगु का परिवार चाहता था कि अंतिम संस्कार सरकार के नियंत्रण से बाहर हो। विपक्षी नेता ब्रायन मुंडुबिले, जो टोंसे अलायंस और लुंगु के समर्थकों के साथ हैं, ने सत्ता में आने पर लुंगु के अवशेषों को वापस लाकर उन्हें सम्मानजनक तरीके से दफनाने का वादा किया है।

स्थानीय मीडिया हाउस न्यूज डिगर्स ने बताया कि हिचिलेमा दूसरी बार राष्ट्रपति पद के लिए मैदान में हैं। उनके समर्थक सरकार की आर्थिक उपलब्धियों को प्रमुख मुद्दा बना रहे हैं। सरकार का दावा है कि उसने महंगाई को घटाकर करीब 6.5 प्रतिशत किया, मुफ्त शिक्षा को आगे बढ़ाया और विदेशी निवेश आकर्षित करने में सफलता हासिल की है।

हालांकि, आम मतदाताओं के लिए रोजमर्रा की आर्थिक मुश्किलें अब भी बड़ी चिंता का विषय हैं। खाद्य असुरक्षा, आय में धीमी वृद्धि और जीवन-यापन की ऊंची लागत ने सरकार की उपलब्धियों को लेकर जनता के बीच असंतोष पैदा किया है। यही असंतोष हिचिलेमा की दोबारा सत्ता में वापसी की राह को मुश्किल बना सकता है।

विपक्ष ने सरकार पर पुलिस के हस्तक्षेप और गिरफ्तारियों के जरिए राजनीतिक दबाव बनाने के आरोप भी लगाए हैं। वहीं हिचिलेमा प्रशासन इन आरोपों को खारिज करते हुए अपने कार्यकाल में मीडिया की स्वतंत्रता में सुधार का दावा करता है।

जाम्बिया के निर्वाचन आयोग के अनुसार, करीब 88 लाख मतदाता अपने मतों का प्रयोग कर रहे हैं। इसमें युवाओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।

हिचिलेमा का अभियान युवाओं को आकर्षित करने के लिए छात्र आवास भत्ते जैसे कदमों पर जोर दे रहा है। ऐसे में चुनाव केवल मौजूदा सरकार के प्रदर्शन पर जनमत संग्रह नहीं, बल्कि लुंगु की राजनीतिक विरासत और उनके समर्थकों के प्रभाव की भी परीक्षा बन गया है।