बालाघाट, रितेश सोनी। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैगा आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में मौसमी बीमारियों का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। मलेरिया, डायरिया और टाइफाइड जैसी बीमारियों ने जनजातीय अंचल में गंभीर स्थिति पैदा कर दी है। सबसे अधिक प्रभावित बच्चे हैं, जिन्हें तेज बुखार, शरीर पर दाने और कमजोरी की शिकायत के बाद अस्पतालों में भर्ती कराया जा रहा है। ग्रामीणों का दावा है कि संक्रमण के चलते अब तक पांच बच्चों की मौत हो चुकी है, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।
बैहर और बिरसा विकासखंड के बोंदारी, मच्छुरदा, कुंडेकसा, लिमोटी और जालदा सहित करीब आधा दर्जन बैगा गांव संक्रमण की चपेट में हैं। ग्रामीणों के अनुसार अधिकांश घरों में बच्चे बीमार हैं और स्वास्थ्य सेवाओं की शुरुआती अनदेखी के कारण स्थिति गंभीर होती चली गई। परिजनों का कहना है कि बीमारी की शुरुआत शरीर पर लाल दाने निकलने से होती है, जिसके बाद तेज बुखार, बदन दर्द और कमजोरी बढ़ जाती है।
संक्रमण की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित गांवों में मेडिकल टीमों को तैनात कर दिया है। स्वास्थ्य कर्मी घर-घर जाकर लोगों की जांच कर रहे हैं और संदिग्ध मरीजों के सैंपल लिए जा रहे हैं। जिन बच्चों की हालत गंभीर पाई जा रही है, उन्हें तत्काल जिला अस्पताल रेफर किया जा रहा है। जिला अस्पताल में भर्ती बच्चों का उपचार जारी है और कई बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार भी देखने को मिला है।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों में मलेरिया की रोकथाम, दवा वितरण, फॉगिंग और जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते प्रभावी स्वास्थ्य सुविधाएं और नियमित निगरानी की जाती तो हालात इतने गंभीर नहीं होते। फिलहाल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग बीमारी पर नियंत्रण पाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं, लेकिन आदिवासी अंचल में संक्रमण का खतरा अभी भी पूरी तरह टला नहीं है।




