बैतूल, सुरेन्द्र बावने। जिले के चिचोली विकासखंड के कनारी गांव के आदिवासी (कोरकू) परिवारों ने वन भूमि से बेदखली की आशंका को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। अपनी मांगों को लेकर ग्रामीण अपने बच्चों के साथ बैतूल स्थित वन विद्यालय पहुंचे और अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई।


ग्रामीणों का कहना है कि गांव के करीब 18 परिवार कई वर्षों से लगभग 50 एकड़ वन भूमि पर खेती कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। उनका आरोप है कि वन विभाग की कार्रवाई के चलते उन्हें इस भूमि से हटाए जाने का खतरा बना हुआ है। यदि उन्हें खेती वाली जमीन से बेदखल किया गया तो उनके सामने रोजगार, आवास और बच्चों के पालन-पोषण का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।


प्रभावित परिवारों ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख के नाम ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि यदि उन्हें वर्तमान भूमि से हटाया जाता है तो सरकार वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराए। ग्रामीणों ने बताया कि खेती ही उनकी आय का मुख्य स्रोत है और बुवाई का मौसम निकट होने के कारण उनकी चिंता और बढ़ गई है।


विरोध प्रदर्शन के दौरान ग्रामीण अपने बच्चों को साथ लेकर पहुंचे और प्रतीकात्मक रूप से कहा कि यदि उनकी आजीविका का एकमात्र साधन छिन जाता है तो वे बच्चों की शिक्षा, भोजन और अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं कर पाएंगे। इसी पीड़ा को दर्शाने के लिए उन्होंने बच्चों की जिम्मेदारी वन विभाग को सौंपने की बात भी कही।


प्रदर्शन का नेतृत्व सामाजिक कार्यकर्ता राजेश साहू ने किया। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों की आजीविका खेती पर निर्भर है, इसलिए किसी भी प्रकार की कार्रवाई से पहले उनके पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।


मामले में अधिकारियों ने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और शिकायतों की जांच कर नियमानुसार उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।