छतरपुर, रोहित पाठक। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के राजनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले ग्राम पिपट में एक युवक की आत्महत्या के मामले ने अब बेहद तूल पकड़ लिया है। मृतक देवीदीन कुशवाहा ने फांसी लगाने से पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल कर अपनी गहरी पीड़ा जाहिर की थी, जिसके बाद इलाके में सनसनी फैल गई। बताया जा रहा है कि करीब तीन दिन पहले युवक ने अपने ही घर पर फांसी लगाकर आत्महत्या का प्रयास किया था। घटना के तुरंत बाद गंभीर हालत में उसे उपचार के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया, जहाँ से डॉक्टरों ने उसकी नाजुक हालत को देखते हुए तत्काल ग्वालियर रेफर कर दिया था। आखिरकार जिंदगी और मौत के बीच जूझते हुए शुक्रवार को इलाज के दौरान अस्पताल में युवक ने दम तोड़ दिया।

युवक की मौत की खबर जैसे ही उसके गांव और परिजनों तक पहुँची, पूरे इलाके में भारी आक्रोश फैल गया। न्याय की मांग को लेकर उग्र हुए परिजन मृतक के शव को एक पिकअप वाहन में रखकर सीधे राजनगर थाने पहुँच गए। परिजनों ने स्थानीय पुलिस पर आरोपियों के खिलाफ समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं करने का बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए थाने के घेराव का प्रयास किया और परिसर में जमकर हंगामा काटा। इस दौरान न्याय की गुहार लगा रहे परिजनों और ग्रामीणों ने राजनगर थाने के ठीक सामने मुख्य मार्ग पर शव रखकर चक्काजाम कर दिया। सड़क के बीचों-बीच हुए इस प्रदर्शन के कारण दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और पूरा यातायात बुरी तरह प्रभावित हो गया।

मामले की संवेदनशीलता और बिगड़ते हालातों को देखते हुए आनन-फानन में मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। राजनगर थाना प्रभारी ने आक्रोशित परिजनों के बीच पहुँचकर उनसे काफी देर तक चर्चा की और पूरे मामले में निष्पक्ष जांच के साथ-साथ दोषियों के खिलाफ कड़ी वैधानिक कार्रवाई करने का भरोसा दिलाया। पुलिस अधिकारियों द्वारा दी गई समझाइश और उचित कार्रवाई के आश्वासन के बाद आखिरकार परिजन शांत हुए, जिसके बाद मुख्य मार्ग से जाम हटाया जा सका और यातायात बहाल हुआ। फिलहाल पुलिस इस पूरे संवेदनशील मामले की बारीकी से जांच करने में जुटी हुई है।

इस पूरे घटनाक्रम पर आक्रोश व्यक्त करते हुए ओमप्रकाश कुशवाहा ने पुलिस प्रशासन के रवैये पर बड़े सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार थाने से लेकर डीआईजी दफ्तर तक न्याय के लिए लगातार भटकता रहा और दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हुआ, जो सीधे तौर पर पुलिस की नाकामी को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीती 13 और 14 तारीख को परिजन सुबह 10 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक पुलिस अधीक्षक कार्यालय में एसपी साहब का इंतजार करते रहे, लेकिन पुलिस प्रशासन का दिल बिल्कुल भी नहीं पिघला और आखिरकार उनके भाई की मौत हो गई। उन्होंने रुंधे गले से सवाल उठाया कि अब गरीब परिजन न्याय मांगने के लिए आखिर कहाँ जाएं। ओमप्रकाश ने आगे बताया कि करीब 6 महीने पहले पड़ोसी जोशी परिवार के साथ उनका पुराना विवाद पूरी तरह समाप्त हो चुका था, लेकिन इसके बावजूद अचानक जोशी परिवार के द्वारा मृतक देवीदीन कुशवाहा के खिलाफ छेड़खानी का एक झूठा मुकदमा दर्ज करा दिया गया। इस झूठे केस से परेशान होकर देवीदीन कुशवाहा ने बीती 12 मई को खुद थाने जाकर पुलिस के सामने अपनी बेगुनाही की बात रखने की कोशिश की थी, लेकिन उस वक्त थाने में उसकी फरियाद सुनने वाला कोई नहीं था। आज स्थिति यह हो गई है कि न्याय पाने की उम्मीद में परिवार को थाने के सामने शव रखकर खड़ा होना पड़ रहा है। परिजनों का कहना है कि उन्होंने पूर्व में भी इस संबंध में थाने में आवेदन दिया था, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इतना ही नहीं, जोशी परिवार के लोगों ने मृतक के घर के अंदर घुसकर महिलाओं और पुरुषों के साथ बर्बरतापूर्वक मारपीट भी की थी, पर पुलिस ने उस वक्त भी उनकी एफआईआर दर्ज नहीं की।

घटना को लेकर मृतक की पत्नी ने भी जोशी परिवार पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि वारदात के दिन उनके पति कुएं पर मौजूद थे, तभी अचानक जोशी परिवार के लोग करीब 15 से 20 गुंडों को साथ लेकर वहां आ धमके। इन हमलावरों में मुख्य रूप से नीरज जोशी, राममिलन जोशी सहित अन्य लोग शामिल थे। जब ये लोग जबरन घर के अंदर दाखिल हुए, तो डर के मारे महिलाएं घर से भाग गईं और कुएं की तरफ दौड़ीं। मृतक की पत्नी ने अंदेशा जताया है कि उनके पति ने खुद फांसी लगाई है या फिर उन दबंगों ने उनके साथ मारपीट कर उन्हें फांसी के फंदे पर लटका दिया है, क्योंकि यह पूरी वारदात 12 मई को हुई थी। उन्होंने रोते हुए कहा कि वे न्याय के लिए थाने भी आए थे, लेकिन पुलिस ने उनकी एक न सुनी।

अपनी मौत से ठीक पहले मृतक देवीदीन कुशवाहा ने सोशल मीडिया पर जो दर्दनाक वीडियो जारी किया था, उसमें उसने अपनी मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के नामों का साफ तौर पर खुलासा किया था। वीडियो में देवीदीन ने रोते हुए बताया था कि राममिलन जोशी, नीरज जोशी, मिथलेश जोशी, बती जोशी और छोटू जोशी उसे लगातार प्रताड़ित कर रहे हैं। ये लोग न सिर्फ उसे बल्कि उसके पूरे परिवार को मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान कर रहे हैं और इसी भारी प्रताड़ना की वजह से वह आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर हो रहा है। वीडियो में युवक ने यह भी कहा था कि उक्त लोग उसके घर पर लगातार गुंडे भेजकर जान से मारने की धमकियां दे रहे हैं और मारपीट करवा रहे हैं। उसके ऊपर छेड़छाड़ का पूरी तरह से झूठा आरोप मढ़ा गया है और चारों तरफ से घिर जाने के कारण उसके पास आत्महत्या करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।

इस पूरे मामले में राजनगर थाना प्रभारी नंदकिशोर सोलंकी ने पुलिस का पक्ष रखते हुए बताया कि राजनगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम पिपट में बीते 12 मई को पड़ोस में रहने वाली एक महिला ने मृतक के खिलाफ छेड़खानी संबंधी शिकायत दर्ज कराने का प्रयास किया था, जिसकी पुलिस टीम द्वारा तस्दीक की जा रही थी। इसी तस्दीक की कार्रवाई के बीच देवीदीन कुशवाहा ने अचानक अपने घर पर फांसी लगाकर आत्महत्या का प्रयास कर लिया, जिसे मौके पर मौजूद परिजनों ने समय रहते देख लिया और फंदे से उतारकर बचा लिया था। परिजन उसे तत्काल इलाज के लिए जिला चिकित्सालय ले गए थे, जहाँ हालत गंभीर होने के कारण डॉक्टरों ने उसे ग्वालियर रिफर कर दिया था, लेकिन वहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। थाना प्रभारी ने कहा कि आज परिजन युवक के शव को लेकर थाने आए हैं और मृतक ने सुसाइड से पहले वीडियो में जो बातें कही हैं, उसी के आधार पर आरोपियों के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। पुलिस ने फिलहाल थाने में मर्ग कायम कर लिया है और आक्रोशित परिजनों को समझा-बुझाकर शांत कराया गया है। मामले की विस्तृत विवेचना के उपरांत ही आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक परिजनों ने मृतक का वह वीडियो भी पुलिस को सौंप दिया है, उसे भी आधिकारिक जांच में शामिल कर लिया गया है। वीडियो में जिन-जिन लोगों के नामों का उल्लेख किया गया है, उन सभी के खिलाफ जांच पूरी होते ही सख्त से सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे।