इस्लामाबाद। पाकिस्तान के मानवाधिकार परिषद (एचआरसी) ने शनिवार को पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के उस बयान की कड़ी आलोचना की, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के रावलाकोट और मीरपुर के लोगों की कश्मीरी पहचान पर सवाल उठाया था।यह विवाद तब शुरू हुआ जब ख्वाजा आसिफ ने एक टीवी इंटरव्यू के दौरान कहा कि रावलाकोट और मीरपुर के रहने वाले लोग 'असल कश्मीरी नहीं हैं।'
इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मानवाधिकार परिषद ने कहा कि सरकारी पदों पर बैठे लोगों को ऐसे संवेदनशील मामलों में पूरी जिम्मेदारी, सावधानी और सम्मान के साथ बोलना चाहिए।
परिषद ने पाकिस्तान सरकार से मांग की कि वह इस मामले पर उचित सफाई दे और यह सुनिश्चित करे कि भविष्य में इस तरह के बयान दोबारा न दिए जाएं।
उधर, पीओके के नेता फैसल मुमताज राठौर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर रक्षा मंत्री पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा, "जम्मू-कश्मीर के लोगों को अपनी पहचान के लिए पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ या किसी और से प्रमाण की जरूरत नहीं है। उनके जैसे पुराने सोच वाले नेता लोगों को करीब लाने के बजाय समाज में विभाजन पैदा कर रहे हैं।"
राठौर ने कहा कि अपने इस गलत बयान पर लोगों की नाराजगी देखने के बाद अब रक्षा मंत्री पीओके की प्रशासनिक व्यवस्था में कमियां निकालकर बात को घुमाने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, "सर, अपने वरिष्ठ अधिकारियों से पूछिए, वे आपको बताएंगे कि हमने शासन कितना अच्छी तरह चलाया है। बेहतर होता कि आप अपने मूल बयान के लिए माफी मांगते, बजाय इसके कि शासन को दोष देकर बात टालने की कोशिश करते।"
यह पूरा विवाद ऐसे समय सामने आया है जब पीओके में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। इन प्रदर्शनों के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कई निर्दोष नागरिकों की मौत होने की खबरें सामने आई हैं।
कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और दुनिया भर में रहने वाले कश्मीरी प्रवासियों ने इन मौतों की निंदा की है। उन्होंने पीओके में पाकिस्तानी अधिकारियों पर लगाए जा रहे मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच और ध्यान देने की मांग की है।
इस सप्ताह की शुरुआत में ब्रिटेन में रहने वाले कश्मीरी प्रवासियों ने लंदन में ब्रिटिश संसद के बाहर प्रदर्शन किया। इसके बाद वे 10 डाउनिंग स्ट्रीट, जो ब्रिटेन के प्रधानमंत्री का आधिकारिक निवास है, तक मार्च करते हुए गए। प्रदर्शनकारियों ने पीओके में कथित खाद्य आपूर्ति रोकने और नागरिकों की मौतों के खिलाफ आवाज उठाई।
प्रदर्शन के दौरान उन्होंने ब्रिटेन सरकार से अपील की कि वह पीओके में कथित गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों के मामले में हस्तक्षेप करे।
सभा को संबोधित करते हुए एक प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से लगाए गए कथित प्रतिबंधों के कारण कई इलाकों में खाने-पीने का सामान और दवाइयां नहीं पहुंच पा रही हैं, जिससे लोगों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा, "लोग भूख से मर रहे हैं। कई लोग अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ रहे हैं। यह बिल्कुल स्वीकार नहीं किया जा सकता। ब्रिटेन में 10 लाख से ज्यादा कश्मीरी रहते हैं। ऐसे में आपकी भी जिम्मेदारी बनती है। इंसानियत के लिए आपको दखल देना चाहिए।"
उन्होंने ब्रिटेन सरकार से पाकिस्तान के अधिकारियों से बात कर इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की।

