टीकमगढ़ से वैष्णो देवी तक 2000 किमी की अनोखी यात्रा, बेटी के जीवन के लिए मांगी मन्नत निभा रहे पिता

Advertisement
टीकमगढ़। महाराष्ट्र के अमरावती निवासी देवीदास इन दिनों एक अनोखी और कठिन यात्रा पर हैं। बेटी के स्वस्थ होने की मन्नत पूरी करने के लिए वे माता वैष्णो देवी के दरबार तक करीब 2000 किलोमीटर की दूरी लुढ़कते हुए तय कर रहे हैं। यह यात्रा उनके अटूट विश्वास, समर्पण और पिता के प्रेम की मिसाल बन गई है।
देवीदास ने बताया कि कुछ समय पहले उनकी बेटी को गंभीर रूप से करंट लग गया था। उस वक्त उसकी हालत बेहद नाजुक थी। बेटी की जान बचाने के लिए उन्होंने माता वैष्णो देवी से मन्नत मांगी थी कि यदि बेटी ठीक हो गई, तो वे उनके दरबार तक इस कठिन यात्रा के माध्यम से पहुंचेंगे। बेटी के पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद देवीदास ने अपनी मन्नत निभाने का संकल्प लिया।
अब तक देवीदास करीब 850 किलोमीटर की दूरी तय कर चुके हैं, जबकि लगभग 1200 किलोमीटर की यात्रा अभी बाकी है। इस दौरान उनके हाथों और पैरों में बेड़ियां बंधी हैं, लेकिन इसके बावजूद उनका हौसला और श्रद्धा डगमगाई नहीं है। वे प्रतिदिन करीब 10 किलोमीटर की दूरी तय कर रहे हैं।
देवीदास ने बताया कि उन्होंने अपनी यात्रा अमरावती से शुरू की थी। टीकमगढ़ पहुंचने के बाद उनका अगला पड़ाव झांसी, मथुरा, आगरा, दिल्ली होते हुए जम्मू-कश्मीर है, जहां माता वैष्णो देवी का पावन धाम स्थित है।
यह यात्रा न केवल देवीदास की गहरी आस्था को दर्शाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के दौर में भी विश्वास और श्रद्धा लोगों के जीवन में कितनी अहम भूमिका निभाते हैं। देवीदास का यह संकल्प समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन रहा है।
उनकी इस कठिन और साहसिक यात्रा से यह साफ झलकता है कि संतान के लिए माता-पिता किसी भी हद तक जा सकते हैं। देवीदास की यह यात्रा एक मन्नत भर नहीं, बल्कि विश्वास, धैर्य और अटूट संकल्प की जीवंत मिसाल है।
