मुंबई। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) आधार की बढ़ती स्वीकार्यता को देखते हुए अपने तकनीकी ढांचे को बड़े स्तर पर मजबूत करने की तैयारी कर रहा है। यूआईडीएआई के चेयरमैन नीलकंठ मिश्रा ने बुधवार को कहा कि वर्तमान में आधार प्रणाली प्रतिदिन लगभग 10 करोड़ प्रमाणीकरण (ऑथेंटिकेशन) संभाल रही है और इसे बढ़ाकर 25 से 30 करोड़ प्रमाणीकरण प्रतिदिन तक ले जाने की तैयारी की जा रही है।मुंबई में आयोजित 'ग्लोबल फिनटेक फेस्टिवल 2026' में बोलते हुए मिश्रा ने कहा कि आधार के उपयोग की रफ्तार उम्मीदों से कहीं अधिक तेज रही है। उन्होंने कहा, "आधार प्रमाणीकरण जिस गति से बढ़ रहा है, उसे देखकर मैं भी आश्चर्यचकित हूं। अभी हम प्रतिदिन लगभग 10 करोड़ प्रमाणीकरण कर रहे हैं और अब 25 से 30 करोड़ प्रतिदिन की क्षमता के लिए तैयारी कर रहे हैं।"
उन्होंने बताया कि आधार का उपयोग करने वाली संस्थाओं की संख्या अब 600 से अधिक हो चुकी है। उन्होंने कहा कि आधार की लोकप्रियता का मुख्य कारण इसकी सुविधा, विश्वसनीयता और कम लागत पर दूरस्थ पहचान सत्यापन की क्षमता है।
उन्होंने कहा, "किसी भी अर्थव्यवस्था की दक्षता बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर सहयोग आवश्यक होता है और सहयोग के लिए विश्वास सबसे महत्वपूर्ण तत्व है। आधार ने कम लागत पर और दूरस्थ स्थानों के बीच भी भरोसे की व्यवस्था स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।"
नीलकंठ मिश्रा ने बताया कि यूआईडीएआई अब कागजी प्रक्रियाओं को कम करके डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देने पर भी ध्यान दे रहा है। इसी दिशा में आधार ऐप के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है। कुछ सप्ताह पहले जहां ऐप डाउनलोड की संख्या लगभग 5 करोड़ थी, वहीं अब यह बढ़कर करीब 6 करोड़ तक पहुंच गई है।
उन्होंने आगे कहा कि आधार ऐप के माध्यम से उपयोगकर्ता मोबाइल नंबर, पता जैसी जानकारियां अपडेट कर सकते हैं और इसके लिए उन्हें आधार सेवा केंद्र जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। इससे नागरिकों को अधिक सुविधा और समय की बचत होती है।
यूआईडीएआई ने आधार की भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अगले दस वर्षों के लिए एक तकनीकी रोडमैप भी तैयार किया है, जिसके लिए एक आधार विजन समिति का गठन किया गया है, जो उभरती तकनीकों और साइबर सुरक्षा से जुड़े जोखिमों का आकलन कर रही है।
मिश्रा ने कहा कि आने वाले समय में साइबर सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक होगी। इसी को ध्यान में रखते हुए यूआईडीएआई पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी को लागू करने की दिशा में काम कर रहा है। उनका कहना है कि वर्तमान सार्वजनिक और निजी कुंजी आधारित एन्क्रिप्शन प्रणालियों को अगले 3-5 वर्षों में नई तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए भविष्य की सुरक्षा जरूरतों के अनुसार तैयारी की जा रही है।
यूआईडीएआई आधार प्रणाली को और सुरक्षित बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई)-आधारित धोखाधड़ी पहचान तंत्र भी लागू कर रहा है, जिसमें चेहरे और उंगलियों की पहचान के दौरान लाइवनेस टेस्टिंग जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रमाणीकरण वास्तविक व्यक्ति द्वारा ही किया जा रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि डिजिटल सुरक्षा के क्षेत्र में यह लगातार चलने वाली प्रतिस्पर्धा है। मिश्रा ने कहा, " यह बिल्ली और चूहे का खेल है। असल में, धोखेबाज लगातार अधिक चालाक होते जा रहे हैं, लेकिन हम भी चालाक होते जा रहे हैं और अपनी प्रणालियों को उतनी ही तेजी से अधिक सक्षम बना रहे हैं।"




