वाशिंगटन। अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापक टैरिफ (आयात शुल्क) नीति का बचाव करते हुए कहा है कि इससे दुनिया के कई देशों के साथ व्यापार वार्ता में अमेरिका की स्थिति मजबूत हुई है। उनका दावा है कि इस नीति ने भारत समेत कई प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ समझौते आगे बढ़ाने में मदद की है और अमेरिकी विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्र को फिर से मजबूत करने की सरकार की कोशिशों को भी गति मिली है।द न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में ग्रीर ने कहा कि टैरिफ नीति के खिलाफ कानूनी चुनौतियां और अर्थशास्त्रियों व कारोबारी संगठनों की आलोचना के बावजूद सरकार की रणनीति सफल साबित हो रही है।
जब उनसे पूछा गया कि क्या टैरिफ नीति काम कर रही है, तो उन्होंने कहा, "बिल्कुल। मुझे लगता है कि हमें बड़ी सफलता मिली है। जब भी आप किसी बड़ी नीति में बदलाव करते हैं और बड़े कारोबारी या विशेष हितों को चुनौती देते हैं, तो विरोध होना तय है। कई लोग पुरानी व्यवस्था बनाए रखना चाहते हैं, लेकिन हम उसे बदलना चाहते हैं।"
ग्रीर ने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने तेजी से कदम इसलिए उठाए क्योंकि उसका मानना था कि लगातार बढ़ता अमेरिकी व्यापार घाटा देश की अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर समस्या बन गया है। उनके अनुसार, व्यापक टैरिफ लगाने से अमेरिका को कई देशों के साथ नए व्यापार समझौतों पर बातचीत करने में फायदा मिला।
उन्होंने बताया कि इस नीति की बदौलत अमेरिका ने ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, इंडोनेशिया, भारत और जापान जैसे देशों के साथ व्यापार समझौतों पर बातचीत आगे बढ़ाई।
ग्रीर ने यह भी स्वीकार किया कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के टैरिफ कार्यक्रम के एक बड़े हिस्से को रद्द कर दिया था। हालांकि उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी रणनीति पर कोई पछतावा नहीं है।
उन्होंने कहा, "हमारी नीतियों को अदालत में चुनौती मिलना कोई नई बात नहीं है। हमेशा कुछ लोग ऐसे होंगे जो अमेरिकी कामगारों की कीमत पर अपना फायदा कमाना चाहते हैं और अपने पुराने कारोबारी मॉडल को बचाने के लिए मुकदमे करेंगे।"
ग्रीर के मुताबिक, प्रशासन अब दूसरे कानूनी विकल्पों के जरिए अपनी व्यापार नीति को आगे बढ़ा रहा है और कई दशकों से चली आ रही अमेरिकी व्यापार व्यवस्था में बड़े बदलाव के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा, "आखिरकार हम व्यापार नीति बदलने में सफल हो रहे हैं। व्यापार घाटा कम हो रहा है। कंपनियां फिर से अमेरिका में उत्पादन शुरू कर रही हैं। हम वेतन बढ़ाने में सफल हो रहे हैं। हम इन सभी चीजों में सफल हो रहे हैं। इसलिए मैं अपनी मौजूदा स्थिति और आगे की दिशा से खुश हूं।"
ग्रीर ने स्पष्ट किया कि अमेरिका का उद्देश्य दुनिया को बदलना नहीं, बल्कि व्यापार के नियमों को अपने हित में बदलना है।
उन्होंने कहा, "हम किसी खास देश के खिलाफ नहीं हैं। हमारा लक्ष्य सिर्फ अमेरिका के हितों की रक्षा करना है। अगर जरूरत पड़ी तो दूसरे देशों के खिलाफ भी जरूरी कदम उठाए जाएंगे, लेकिन हमारी प्राथमिकता अमेरिका है।"
टैरिफ नीति पर हो रही राजनीतिक आलोचना को खारिज करते हुए ग्रीर ने कहा कि इस नीति का असर तुरंत नहीं, बल्कि लंबे समय में दिखाई देगा।
उन्होंने कहा, "इस व्यापार नीति का मकसद लोगों की आय बढ़ाना, मैन्युफैक्चरिंग और कृषि उत्पादन को मजबूत करना है। समय के साथ अमेरिकी जनता इसके फायदे देखेगी।"
ग्रीर ने माना कि देश में विनिर्माण क्षमता को दोबारा खड़ा करने में समय लगेगा। हालांकि उनका कहना है कि अभी से सकारात्मक संकेत मिलने शुरू हो गए हैं। उनके अनुसार, फैक्ट्रियों में निवेश बढ़ रहा है, मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में मजदूरी बेहतर हो रही है और औद्योगिक उत्पादन क्षमता में भी सुधार देखने को मिल रहा है।




