किसी के सगे नहीं ट्रंप, प्रशासन के कड़े रुख से नाटो गठबंधन पर मंडराया खतरा

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खनिज संसाधनों से समृद्ध और रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र ग्रीनलैंड पर नियंत्रण पाने के प्रयासों को तेज कर दिया है। व्हाइट हाउस की ओर से की गई हालिया घोषणा ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि राष्ट्रपति इस स्वशासित क्षेत्र के अधिग्रहण को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा की सर्वोच्च प्राथमिकता मान रहे हैं। अमेरिका की इस महत्वाकांक्षी योजना में सैन्य कार्रवाई सहित विभिन्न विकल्पों पर चर्चा शुरू कर दी गई है, जिसके कारण न केवल डेनमार्क बल्कि पूरे यूरोपीय संघ और नाटो गठबंधन के भीतर तनाव चरम पर पहुंच गया है। डेनमार्क ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि अमेरिका का ऐसा कोई भी कदम पिछले 80 वर्षों से कायम ट्रांसअटलांटिक सुरक्षा संबंधों को जड़ से खत्म कर सकता है।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट के अनुसार, ग्रीनलैंड का अधिग्रहण रूस और चीन जैसे वैश्विक प्रतिद्वंद्वियों के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति और उनकी टीम इस विदेश नीति लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है और कमांडर-इन-चीफ के रूप में अमेरिकी सेना का उपयोग करना हमेशा एक विकल्प के तौर पर मेज पर मौजूद है। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन का प्राथमिक और पसंदीदा विकल्प ग्रीनलैंड को डेनमार्क से खरीदना है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सांसदों को इस संबंध में जानकारी देते हुए संकेत दिए हैं कि सैन्य विकल्पों की चर्चा का अर्थ तुरंत आक्रमण नहीं है, बल्कि यह रणनीतिक दबाव बनाने की एक प्रक्रिया हो सकती है। इस घटनाक्रम पर डेनमार्क और ग्रीनलैंड की प्रतिक्रिया अत्यंत तीखी रही है।
ग्रीनलैंड की प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक निल्सन ने दो टूक शब्दों में कहा है कि ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है और इस द्वीप के भविष्य का फैसला केवल वहां के 57,000 निवासी ही कर सकते हैं। डेनमार्क के अधिकारियों का तर्क है कि यदि अमेरिका सैन्य बल का उपयोग करता है, तो यह नाटो के अनुच्छेद 5 का सीधा उल्लंघन होगा, जिसके तहत एक सदस्य देश पर हमला सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाता है। यूरोपीय देशों—ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, पोलैंड और स्पेन—ने एक संयुक्त बयान जारी कर डेनमार्क की क्षेत्रीय अखंडता का पुरजोर समर्थन किया है।
स्थानीय स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर भारी आक्रोश है। ग्रीनलैंड के व्यापारिक संगठनों का मानना है कि आधुनिक और सभ्य दुनिया में किसी क्षेत्र को सैन्य शक्ति के बल पर हथियाने की बात करना पूरी तरह अस्वीकार्य है। दूसरी ओर, ट्रंप प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी स्टीफन मिलर ने बेहद सख्त लहजा अपनाते हुए कहा है कि ग्रीनलैंड के मुद्दे पर कोई भी देश अमेरिका से सैन्य मुकाबला करने की स्थिति में नहीं है। कनाडा ने भी इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए कहा है कि किसी भी क्षेत्र की संप्रभुता का निर्णय वहां के नागरिकों का मौलिक अधिकार है। वर्तमान में ग्रीनलैंड के पिटुफिक स्पेस बेस पर अमेरिका की सीमित सैन्य उपस्थिति पहले से है, लेकिन पूर्ण नियंत्रण की यह नई जिद अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को एक अनिश्चित और खतरनाक मोड़ पर ले आई है।
