भोपाल। मध्य प्रदेश की सियासत में जल्द ही एक बड़ा संगठनात्मक फेरबदल देखने को मिल सकता है। हरियाणा के समालखा में हाल ही में संपन्न हुई राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक के बाद, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर नए संगठन महामंत्रियों और क्षेत्रीय प्रभारियों की नियुक्ति को लेकर चर्चाएं चरम पर हैं। संघ के शताब्दी वर्ष (100 वर्ष) के उपलक्ष्य में बनाई गई रणनीति के तहत, भाजपा के संगठनात्मक ढांचे को और अधिक सुदृढ़ और अनुशासित बनाने के लिए संघ अपने 50 अनुभवी प्रचारकों को पार्टी में नई और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपने जा रहा है।


समालखा बैठक का 'अदृश्य' एजेंडा और एमपी का रोल

समालखा में हुई इस उच्च स्तरीय बैठक में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले की उपस्थिति में संगठन के विस्तार पर गहरा मंथन हुआ। सूत्रों के अनुसार, मध्य प्रदेश में संभागीय संगठन महामंत्रियों के खाली पदों को भरने और वर्तमान पदस्थ पदाधिकारियों की भूमिकाओं की समीक्षा करने का निर्णय लिया गया है। इस कवायद का मुख्य उद्देश्य सरकार और संगठन के बीच किसी भी प्रकार के 'कम्युनिकेशन गैप' को खत्म करना और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की पकड़ को मजबूत करना है।


50 प्रचारकों का 'पावर ट्रांजेक्शन'

संघ की इस नई रणनीति के तहत करीब 50 प्रचारकों को भाजपा के विभिन्न प्रदेशों और केंद्रीय इकाइयों में प्रतिनियुक्ति पर भेजा जा रहा है। ये प्रचारक मुख्य रूप से संगठन महामंत्री (Organization Secretary) जैसे पदों पर तैनात किए जाएंगे, जो पार्टी की नीतियों और संघ की विचारधारा के बीच सेतु का काम करेंगे। मध्य प्रदेश में भी कुछ नए चेहरों को संभागीय स्तर पर कमान दी जा सकती है, जिससे आगामी चुनावों और संगठन के विस्तार को नई दिशा मिलेगी।


जमीनी पकड़ और शताब्दी वर्ष का लक्ष्य

शताब्दी वर्ष (2025-26) के दौरान संघ का लक्ष्य है कि भाजपा का सांगठनिक ढांचा न केवल शहरों बल्कि सुदूर ग्रामीण अंचलों तक पूरी तरह सक्रिय रहे। समालखा बैठक में इसी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रचारकों की नई खेप को राजनीतिक रणभूमि में उतारने का रोडमैप तैयार किया गया है।


मध्य प्रदेश पर प्रभाव:

नई नियुक्तियां: प्रदेश के कई संभागों में लंबे समय से लंबित संगठन महामंत्रियों की नियुक्तियां अब जल्द हो सकेंगी।

तालमेल: मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष के साथ संगठन की समन्वय समितियों में नए चेहरों का दखल बढ़ेगा।

रणनीति: 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को निचले स्तर (बूथ लेवल) तक पूरी तरह रिपेयर करने की तैयारी है।