विदिशा, वाजिद कुरैशी। जिले की सिरोंज तहसील के ग्राम मुरादपुर से शिक्षा व्यवस्था की गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है, जहां बिना भवन और बिना नियमित संचालन के ही स्कूल चलने का दावा किया जा रहा है। ग्रामीणों की शिकायत पर जब मीडिया टीम मौके पर पहुंची तो स्थिति चौंकाने वाली मिली—गांव में न तो कोई स्कूल भवन मौजूद है और न ही बच्चों की पढ़ाई का कोई इंतजाम दिखा।


ग्रामीणों के अनुसार, पहले एक चौकीदार के छोटे कमरे में 1000 रुपए प्रतिमाह किराए पर स्कूल संचालित होता था, लेकिन किराया न मिलने के कारण वह व्यवस्था बंद हो गई। इसके बाद भोपाल रोड किनारे 500 रुपए मासिक किराए पर एक अन्य कमरे में स्कूल चलाने की कोशिश हुई, लेकिन वहां भी भुगतान न होने से स्कूल बंद हो गया।


सेल्फी के भरोसे “स्कूल संचालन”


आरोप है कि स्कूल प्रभारी शबाना खानम और शिक्षिका सुनंदा शर्मा रोजाना “स्कूल जाने” के नाम पर घर से निकलती हैं, लेकिन भवन न होने के कारण सड़क किनारे खड़े होकर फोटो (सेल्फी) लेकर विभागीय ग्रुप में अपलोड कर देती हैं और वापस लौट जाती हैं। यह सिलसिला लंबे समय से जारी बताया जा रहा है।


बच्चों का भविष्य अधर में


स्कूल के बंद रहने से गांव के बच्चों की शिक्षा पूरी तरह प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि दोनों शिक्षिकाएं कई बार सार्वजनिक स्थानों पर आपसी विवाद करती नजर आती हैं, जिससे गांव का माहौल भी खराब हो रहा है।


मर्ज के बाद भी नहीं बनी व्यवस्था


जानकारी के अनुसार, मुरादपुर स्कूल को एक वर्ष पूर्व सांदीपनी स्कूल में मर्ज कर दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद न तो शिक्षिकाओं का स्थानांतरण हुआ और न ही स्पष्ट प्रशासनिक व्यवस्था बनाई गई।


अधिकारियों में जिम्मेदारी से बचने की होड़


इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते नजर आ रहे हैं। बीआरसी जितेन श्रीवास्तव का कहना है कि यह स्कूल अब उनके अधीन नहीं है और CM Rise योजना के अंतर्गत आता है। वहीं सांदीपनी स्कूल के प्राचार्य महेश ताम्रकार का कहना है कि उन्होंने कई बार वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।


जांच और कार्रवाई पर टिकी निगाहें


बिना स्कूल संचालन के ही उपस्थिति और फोटो के आधार पर वेतन लेने के आरोप ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करता है या फिर यह “सेल्फी वाला स्कूल” यूं ही चलता रहेगा।