कोलकाता, 29 मई । असम तृणमूल कांग्रेस के अध्यक्ष अभिजीत मजूमदार ने शुक्रवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी 'तृणमूल मुस्लिम कांग्रेस' में तब्दील हो गई है और उनके जैसे हिंदुओं के लिए यहां कोई जगह नहीं है।
आईएएनएस से बातचीत के दौरान, तृणमूल कांग्रेस की स्थापना से ही इसकी असम इकाई के सदस्य रहे मजूमदार ने दावा किया कि कोई भी 'हिंदू विचारधारा वाला व्यक्ति' पार्टी से जुड़ा नहीं रह सकता।
उनके अनुसार, पार्टी अब 'तृणमूल मुस्लिम कांग्रेस' में बदल चुकी है।
उन्होंने जोर देकर कहा, "मैं हिंदू हूं और ईश्वर में विश्वास रखता हूं, इसलिए मेरी अंतरात्मा ने मुझे इस पार्टी में बने रहने की अनुमति नहीं दी।"
कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में स्नातकोत्तर प्रशिक्षु डॉक्टर के साथ हुए दुष्कर्म और हत्या का जिक्र करते हुए मजूमदार ने कहा कि अब हिंदुओं के खिलाफ अत्याचारों की खबरें भी आ रही हैं।
उन्होंने आगे कहा कि असम विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के एकमात्र विधायक शेरमन अली अहमद हाल ही में हुए राज्य चुनावों से ठीक सात दिन पहले पार्टी में शामिल हुए थे। उन्होंने कहा कि उन्हें (अहमद को) कांग्रेस और अखिल गोगोई की रायजोर दल से निष्कासित कर दिया गया था। इसके अलावा, उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव नहीं लड़ा, बल्कि असम के उस इलाके से चुनाव लड़ा जहां बांग्लादेशी मुसलमान रहते हैं, इसलिए वे जीते।
तृणमूल कांग्रेस छोड़ने का एक और कारण बताते हुए मजूमदार ने आरोप लगाया कि शेरमान अली अहमद की विजय यात्रा के दौरान उन्होंने कहा था कि उन्हें दूसरों की परवाह नहीं है और वे बांग्लादेशी मुसलमानों के लिए काम करेंगे। उन्होंने (अहमद ने) यह भी कहा था कि अगली बार वे उसी इलाके (जहां बांग्लादेशी मुसलमान रहते हैं) से 20 विधायक लाएंगे।
पूर्व तृणमूल नेता ने पार्टी नेतृत्व पर एक विशेष समुदाय का इस्तेमाल करके ध्रुवीकरण के जरिए पश्चिम बंगाल को 'बर्बाद' करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस असम में मुसलमानों का इस्तेमाल करके यही करने की कोशिश कर रही है। इसीलिए पार्टी छोड़ देना ही बेहतर है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि असम में तृणमूल कांग्रेस का कोई भी सदस्य पार्टी कार्यालय में नहीं बैठता।

