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मध्य प्रदेशछतरपुरखजुराहो में बिखरी दक्षिण भारत की शास्त्रीय आभा: भरतनाट्यम, कथकली और कुचिपुड़ी से सजी नृत्यभूमि

खजुराहो में बिखरी दक्षिण भारत की शास्त्रीय आभा: भरतनाट्यम, कथकली और कुचिपुड़ी से सजी नृत्यभूमि

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24 फ़रवरी 2026, 06:22 am IST
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खजुराहो, तुलसीदास सोनी | मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित 52वें अंतरराष्ट्रीय खजुराहो नृत्य समारोह के चौथे दिन दक्षिण भारतीय शास्त्रीय नृत्य शैलियों की गरिमा और आध्यात्मिक ऊँचाइयों का अद्भुत संगम देखने को मिला। ऐतिहासिक मंदिरों की ओट में सजे भव्य मंच पर भरतनाट्यम, कथकली और कुचिपुड़ी की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को कला और साधना की गहन अनुभूति कराई।


कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्व अपर मुख्य सचिव श्री जे.एस. कंसोटिया, उस्ताद अलाउद्दीन खाँ अकादमी के निदेशक श्री प्रकाश सिंह ठाकुर एवं उप निदेशक श्री शेखर करहाड़कर द्वारा कलाकारों के आत्मीय स्वागत के साथ हुआ।


नव्या नायर का भरतनाट्यम: भक्ति और सौंदर्य का समन्वय

चौथे दिवस की पहली प्रस्तुति चेन्नई की सुप्रसिद्ध नृत्यांगना एवं अभिनेत्री सुश्री नव्या नायर की रही। उन्होंने अपनी प्रस्तुति का आरंभ 'दरूवर्णम' से किया, जिसमें देवी मीनाक्षी की कथा को भावपूर्ण मुद्राओं में पिरोया गया। राग खमाज और आदि ताल में निबद्ध इस रचना के बाद उन्होंने 'पूर्वी तिल्लाना' के साथ समापन किया। उनके सधे हुए पद संचालन और देह-यष्टि के सौंदर्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके साथ गायन में सुश्री प्रीति महेश और मृदंगम पर श्री प्रबल जीत ने संगत की।


कथकली: महाभारत के प्रसंगों से जीवंत हुआ मंच

दूसरी प्रस्तुति में केरल की प्राचीन नृत्य शैली कथकली का वैभव दिखाई दिया। संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित गुरु कोट्टक्कल नंदकुमारन नायर एवं साथियों ने 'सुभद्राहरणम्' प्रसंग प्रस्तुत किया। आकर्षक वेशभूषा और विशिष्ट मुखाभिनय के माध्यम से अर्जुन का संन्यासी वेश, सुभद्रा से प्रेम और श्रीकृष्ण की चतुराई को मंच पर जीवंत कर दिया गया। चेंडा और मद्दलम् की थाप ने इस शौर्य गाथा को और अधिक प्रभावशाली बनाया।


कुचिपुड़ी: 'नवदुर्गा' के दिव्य स्वरूपों का दर्शन

शाम का समापन पद्मश्री डॉ. जी. पद्मजा रेड्डी (हैदराबाद) की कुचिपुड़ी प्रस्तुति से हुआ। उन्होंने अपनी विशेष नृत्य-नाटिका 'नवदुर्गा' के माध्यम से देवी के नौ रूपों—शैलपुत्री से लेकर सिद्धिदात्री तक—की शक्ति, करुणा और आध्यात्मिक तेज को साकार किया। जैसे ही मंच पर नवदुर्गा के स्वरूप उभरे, सम्पूर्ण परिसर देवीमय आलोक से प्रकाशित हो उठा।


बॉक्स समाचार: आयोजकों का सहयोग यह गरिमामय आयोजन उस्ताद अलाउद्दीन खाँ संगीत एवं कला अकादमी द्वारा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र (नागपुर), म.प्र. पर्यटन विभाग तथा जिला प्रशासन-छतरपुर के सहयोग से संपन्न हो रहा है।

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