एंटीबायोटिक लेने से शिशुओं में खतरनाक बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा

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प्रेग्नेंसी के दौरान एंटीबायोटिक लेने से नवजात शिशुओं में एक खतरनाक बैक्टीरियल संक्रमण, ग्रुप-बी स्ट्रेप्टोकोकस (जीबीएस), का जोखिम बढ़ सकता है। आमतौर पर यह बैक्टीरिया वयस्कों में बिना नुकसान के आंतों या जननांगों में मौजूद रहता है, लेकिन नवजातों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों में यह जानलेवा साबित हो सकता है।
एक नई अंतरराष्ट्रीय रिसर्च ने एंटीबायोटिक दवाओं के इस्तेमाल को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। जीबीएस संक्रमण से सेप्सिस, मेनिन्जाइटिस और निमोनिया जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं, जो नवजात के जीवन के लिए बड़ा खतरा बन जाती हैं। स्वीडन के करोलिंस्का इंस्टीट्यूट और बेल्जियम की यूनिवर्सिटी ऑफ एंटवर्प सहित कई अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के शोधकर्ताओं ने इस विषय पर व्यापक अध्ययन किया। शोध में पाया गया कि गर्भावस्था के दौरान, खासतौर पर तीसरी तिमाही की शुरुआत में एंटीबायोटिक लेने से जन्म के पहले चार हफ्तों के भीतर शिशु में जीबीएस संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
रिपोर्ट के अनुसार, प्रसव से लगभग चार हफ्ते पहले एंटीबायोटिक के संपर्क में आई माताओं के बच्चों में यह जोखिम अधिक देखा गया, विशेषकर उन मामलों में जहां जोखिम-आधारित इंट्रापार्टम प्रोफिलैक्सिस का लाभ नहीं मिला। इस अध्ययन के लिए 2006 से 2016 के बीच स्वीडन में हुए सभी सिंगलटन जीवित जन्मों का विश्लेषण किया गया। कुल 10,95,644 नवजातों के आंकड़ों से पता चला कि करीब 24.5 प्रतिशत माताओं ने गर्भावस्था के दौरान किसी न किसी रूप में एंटीबायोटिक का इस्तेमाल किया था। शोध में यह भी सामने आया कि एंटीबायोटिक के संपर्क में आए बच्चों में जीबीएस संक्रमण की दर 1,000 जन्मों पर 0.86 रही, जबकि जिन बच्चों की माताओं ने ये दवाएं नहीं ली थीं, उनमें यह दर 0.66 दर्ज की गई। यह अंतर खास तौर पर उन नवजातों में ज्यादा पाया गया, जिनमें पहले से जीबीएस से जुड़े कोई स्पष्ट जोखिम कारक मौजूद नहीं थे।
शोधकर्ताओं का कहना है कि यह पहला ऐसा अध्ययन है, जिसने गर्भावस्था में एंटीबायोटिक उपयोग और नवजात में जीबीएस संक्रमण के बीच सीधे संबंध को विस्तार से जांचा है। इसके नतीजे पहले के नॉर्डिक अध्ययनों से भी मेल खाते हैं, जिनमें गर्भ में एंटीबायोटिक के संपर्क के बाद बच्चों में आगे चलकर संक्रमण का खतरा बढ़ने की बात कही गई थी। अध्ययन का एक अहम निष्कर्ष यह भी रहा कि प्रसव के बेहद नजदीक दी गई जीबीएस-रोधी एंटीबायोटिक दवाएं नवजात को पूरी तरह सुरक्षित नहीं कर पातीं। शोधकर्ताओं ने सलाह दी है कि जिन गर्भवती महिलाओं में जीबीएस से जुड़े स्पष्ट जोखिम कारक नहीं हों, वहां एंटीबायोटिक का इस्तेमाल सोच-समझकर और सीमित किया जाना चाहिए।
