नई दिल्ली। हाल के कुछ वर्षों में भारत-इजरायल के रिश्तों में काफी सुधार हुआ है। इजरायली राजदूत रुवेन अजार मानते हैं कि पिछले दो वर्षों में भारत और इजरायल के संबंधों में तेजी से विस्तार हुआ है। दोनों देश मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर बातचीत आगे बढ़ा रहे हैं और रक्षा, कृषि, हाई-टेक, बुनियादी ढांचे तथा वित्तीय सहयोग के क्षेत्र में भी साझेदारी मजबूत हो रही है। आईएएनएस से बातचीत में अजार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व शैली, पश्चिम एशिया संकट, मक्का डिफेंस पैक्ट जैसे अहम मुद्दों पर भी विचार साझा किए।

भारत -इजरायल व्यापार संबंधों को लेकर अजार ने कहा, "इजरायल ने अपने बाजार को पहले ही काफी हद तक खोल दिया है और दोनों देशों के बाजारों के आकार में बड़ा अंतर है। ऐसे में हाई-टेक क्षेत्र में सहयोग की काफी संभावनाएं हैं।" अजार के अनुसार, भारत और इजरायल के बीच द्विपक्षीय निवेश संधि पर हस्ताक्षर और एफटीए से इजरायली कंपनियों को भारत में निवेश के लिए सकारात्मक संकेत मिलेगा।

उन्होंने कहा, "रक्षा और कृषि में हमारा सहयोग बढ़ रहा है। हमने इजरायल में भारतीय कामगारों की संख्या दोगुनी कर दी है। हम भारतीय कंपनियों को इजरायल की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से जोड़ने और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाने पर भी काम कर रहे हैं।"

इजरायली राजदूत ने कहा कि प्रस्तावित एफटीए से दोनों देशों के बीच व्यापार के पारंपरिक मुद्दों के अलावा तकनीकी और निवेश सहयोग को भी बढ़ावा मिलेगा।

वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए अजार ने कहा, पीएम मोदी ने भारत के विकास में परिवर्तनकारी भूमिका निभाई है।"

उन्होंने भारत में बुनियादी ढांचे के विकास, आर्थिक वृद्धि, सुधारों और युवा पीढ़ी के सशक्तीकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत अब दुनिया के लिए पहले से अधिक खुला है। इजरायल में प्रधानमंत्री मोदी का जिस तरह से स्वागत किया गया और संसद (नेसेट) में उनका दिया भाषण उल्लेखनीय था। इजरायल के लोग पीएम मोदी की उसी तरह प्रशंसा करते हैं, जैसे दुनिया के कई अन्य देशों में उनके प्रति सम्मान है।"

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अजार ने ईरानी रणनीति की आलोचना की। उन्होंने कहा कि ईरान अंतरराष्ट्रीय समुदाय और अमेरिका पर दबाव बनाने के लिए होर्मुज का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन यह उसके लिए "बहुत अविवेकपूर्ण" कदम है।

उन्होंने कहा कि कई देश अब ऐसी पाइपलाइन परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं, जिनसे होर्मुज पर निर्भरता कम की जा सके। इनमें इराक से तुर्की और सीरिया होते हुए भूमध्यसागर तक जाने वाली प्रस्तावित पाइपलाइन, सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन तथा इराक से यूएई तक प्रस्तावित पाइपलाइन जैसी परियोजनाएं शामिल हैं।

हमास को लेकर अपने रुख पर इजरायल कायम है। गाजा शांति योजना के सवाल पर अजार ने कहा, " इजरायल ने शांति योजना को खारिज नहीं किया है।" ट्रंप के पीस बोर्ड की योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इजरायल उस पर बातचीत करता रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हमास के पूरी तरह निरस्त्रीकरण के बिना इजरायल "येलो लाइन" से पीछे नहीं हटेगा।

इजरायली दूत ने आगे कहा, " इजरायल गाजा के लिए ऐसा भविष्य चाहता है, जहां आतंकवाद का कोई खतरा न हो और ऐसी सरकार हो जो नई पीढ़ी को शांति के लिए तैयार करे, न कि भविष्य में इजरायल के खिलाफ युद्ध के लिए।"

पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच बढ़ते सहयोग को संभावित "मुस्लिम नाटो" के रूप में देखे जाने पर अजार ने कहा कि फिलहाल इस आकलन को बढ़ा-चढ़ाकर देखा जा रहा है। उन्होंने सऊदी अरब और तुर्की के बीच पुराने मतभेदों का उल्लेख किया और कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में ईरान से बढ़ता खतरा दोनों देशों के सहयोग का प्रमुख कारण हो सकता है।

अजार ने कहा कि पिछले कई दशकों में क्षेत्र में कई संगठन बने हैं, लेकिन अभी तक कोई भी नाटो जैसी क्षमता वाले संगठन में तब्दील नहीं हुआ है।

इजरायल में मौजूदा स्थिति पर अजार ने कहा कि देश इस समय स्थिर है और बड़ी संख्या में लोग बेन गुरियन हवाईअड्डे से आवाजाही कर रहे हैं।

उन्होंने दावा किया कि इजरायल ने ईरान की परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। उनके अनुसार, ईरान की सैन्य उत्पादन क्षमता को भारी क्षति हुई है, हालांकि भूमिगत सुरंगों में कुछ क्षमता अब भी मौजूद हो सकती है।

अजार ने कहा कि इन घटनाक्रमों के बाद क्षेत्र में शक्ति संतुलन इजरायल के पक्ष में बदला है। उन्होंने कहा, "हमारा आकलन है कि हमने ईरान और ईरान के नेतृत्व वाले धुरी तंत्र को काफी हद तक कमजोर किया है।"

हालांकि, ईरान की सैन्य स्थिति और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को लेकर राजदूत के दावों को इजरायल के आधिकारिक दृष्टिकोण के रूप में देखा जाना चाहिए।