भोपाल। मध्य प्रदेश में लंबे समय से लंबित पड़े सहकारिता चुनाव को लेकर सरकार ने सक्रियता बढ़ा दी है। करीब 50 लाख किसानों की सदस्यता वाली प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के चुनाव इस साल के अंत तक कराए जाने की संभावना जताई जा रही है। इस दिशा में प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं, वहीं राजनीतिक दल भी अपनी रणनीति बनाने में जुट गए हैं।


प्रदेश में सहकारिता चुनाव आखिरी बार वर्ष 2013 में कराए गए थे, जिनका कार्यकाल 2018 तक रहा। इसके बाद विधानसभा और लोकसभा चुनाव सहित अन्य कारणों से ये चुनाव लगातार टलते रहे। इस दौरान कांग्रेस और भाजपा, दोनों ही सरकारों के कार्यकाल में यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।


जानकारी के अनुसार, सरकार ‘कृषि कल्याण वर्ष’ के दौरान इन चुनावों को आयोजित कर किसानों को सहकारी संस्थाओं में प्रतिनिधित्व देने की योजना बना रही है। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव किसानों को साधने के उद्देश्य से इस पहल को आगे बढ़ा सकते हैं।


विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी पंचायती राज चुनावों से पहले सहकारिता और कृषि उपज मंडियों के चुनाव कराकर सरकार ग्रामीण और किसान वर्ग में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। सहकारिता क्षेत्र में सक्रिय समितियों और जिला सहकारी बैंकों के चुनाव से ग्रामीण राजनीति में भी हलचल बढ़ने की संभावना है।