बंधुआ मजदूर परिवारों को पुलिस प्रशासन ने कराया मुक्त

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बकस्वाहा, राजू दुबे। बम्होरी क्षेत्र के कई परिवारों को इंदौर में बंधुआ मजदूरी में झोंक दिए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। पुलिस एवं प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई से 18 मजदूरों को सुरक्षित उनके गृह क्षेत्र लाया गया है, जबकि शेष मजदूरों और उनके बच्चों को लाने की प्रक्रिया जारी है।
मिली जानकारी के अनुसार सुरेन्द्र नागवंशी परिवार, निवासी ग्राम खतरिया, ग्राम पंचायत देवरी, थाना बकस्वाहा ने बताया कि बम्होरी क्षेत्र के कुल 18 लोग मजदूरी के लिए इंदौर गए थे। उन्हें 400 रुपये प्रतिदिन मजदूरी का आश्वासन दिया गया था, लेकिन इंदौर पहुंचने के बाद हालात बदल गए। मजदूरों से लगातार 75 दिनों तक सुबह 5 बजे से रात 9 बजे तक काम कराया गया और दिन में केवल एक बार भोजन दिया जाता था। मजदूरी भी नियमित रूप से नहीं दी गई।
सभी बंधक मजदूरों ने बताया कि पड़ावरा निवासी राधा वाई और राजकुमार के कहने पर वे इंदौर गए थे, जहां दिलीप प्रजापति द्वारा काम कराया जाता था। आरोप है कि दिलीप प्रजापति ने मजदूरों को बंधुआ बनाकर रखा और उन्हें बाहर जाने की अनुमति नहीं दी।
इस दौरान एक हृदयविदारक घटना भी सामने आई। मालतो आदिवासी ने बताया कि उनके छह माह के पुत्र आकाश की बीमारी के दौरान उचित इलाज नहीं मिल सका, जिससे उसकी मौत हो गई। इस घटना से मजदूरों में भारी आक्रोश और भय व्याप्त है।
बंधुआ मजदूरी का शिकार हुए लोगों में कमल नागवंशी, हकम नागवंशी, परम नागवंशी, सुरेन्द्र नागवंशी, सुती नागवंशी, रेना नागवंशी, चिरो नागवंशी, मीना नागवंशी, राजकुमार नागवंशी, मालतो नागवंशी और खुशबू नागवंशी सहित अन्य शामिल हैं। इनके अलावा लगभग 8 अन्य मजदूर और उनके बच्चे अभी इंदौर में फंसे हुए हैं।
तहसीलदार भरत पांडे ने बताया कि सभी मजदूरों को सुरक्षित लाया जा रहा है। शेष लोगों को भी जल्द ही वापस लाया जाएगा तथा मामले की जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
