भोपाल। मध्य प्रदेश के शहरी परिवहन को पूरी तरह आधुनिक, स्मार्ट और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'पीएम-ई बस सेवा योजना' जुलाई 2026 से जमीन पर उतरने जा रही है। इस योजना के तहत प्रदेश के प्रमुख शहरों में पहली बार अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक एसी (AC) बसें सड़कों पर दौड़ती नजर आएंगी। दो चरणों में लागू होने वाली इस योजना से न केवल शहरों का ट्रैवल सिस्टम बदलेगा, बल्कि आम जनता को बेहद सस्ती, सुरक्षित और आरामदायक यात्रा का विकल्प भी मिलेगा।
दो चरणों में जुड़ेगा पूरा प्रदेश: इंदौर से होगी शुरुआत
इस वृहद परियोजना को राज्य में व्यवस्थित ढंग से लागू करने के लिए चरणों में विभाजित किया गया है:
- पहला चरण: योजना की शुरुआत सबसे पहले प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर से होने जा रही है। इसके तुरंत बाद राजधानी भोपाल और जबलपुर में भी ई-बसों का संचालन शुरू कर दिया जाएगा।
- दूसरा चरण: पहले चरण के सफल क्रियान्वयन के बाद दूसरे चरण में ग्वालियर, उज्जैन और सागर शहरों को भी इस आधुनिक नेटवर्क से जोड़ दिया जाएगा।
प्रमुख शहरों का रूट और बस प्लान
- इंदौर: शहर में कुल 150 ई-बसें चलाई जाएंगी, जिन्हें 8 प्रमुख रूटों पर संचालित किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी देना और कम खर्च में लंबी दूरी का सफर तय कराना है।
- भोपाल: राजधानी में लगभग 100 ई-बसों का संचालन किया जाएगा। ये बसें शहर के 10 अलग-अलग रूटों पर दौड़ेंगी, जिससे आम जनता को भीड़भाड़ से राहत मिलेगी और प्रमुख रहवासी व व्यावसायिक क्षेत्र आपस में जुड़ सकेंगे।
- जबलपुर: इस शहर के लिए भी 100 ई-बसों की मंजूरी दी गई है। स्थानीय आवश्यकता के अनुसार तय रूटों पर चलने वाली ये सभी बसें पूरी तरह एयर कंडीशंड (AC) होंगी और आधुनिक डिजिटल सुविधाओं से लैस होंगी।
'स्मार्ट ट्रैवल' और 'ग्रीन मोबिलिटी': योजना की खास बातें
1. डिजिटल और कैशलेस सफर
ई-बस सेवा को पूरी तरह हाईटेक और डिजिटल बनाया गया है। यात्रियों को अब टिकट के लिए बसों में लंबी लाइनों या छुट्टे पैसों की झंझट से मुक्ति मिलेगी। टिकट बुकिंग और पास की सुविधा मोबाइल ऐप के जरिए उपलब्ध होगी, जिससे समय की बचत के साथ-साथ पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी।
2. ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट (GCC) मॉडल
इस पूरी परियोजना का संचालन और रखरखाव ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट मॉडल के तहत एक निजी कंपनी द्वारा किया जाएगा। वही कंपनी बसों के रखरखाव, ड्राइवर और अन्य स्टाफ की व्यवस्था संभालेगी। सरकार (केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी के साथ) कंपनी को प्रति किलोमीटर के आधार पर भुगतान करेगी, जिससे सेवा की गुणवत्ता हमेशा बेहतरीन बनी रहेगी।
3. आधुनिक डिपो और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर
ई-बसों की निर्बाध आवाजाही के लिए चिन्हित छह शहरों में आधुनिक डिपो और चार्जिंग स्टेशन तैयार किए जा रहे हैं। इंदौर, भोपाल और ग्वालियर जैसे महानगरों में कई चार्जिंग पॉइंट स्थापित किए जा रहे हैं। बसों को तेजी से चार्ज करने के लिए हाई टेंशन बिजली लाइनें और नए सब-स्टेशन भी विशेष रूप से विकसित किए जा रहे हैं।
बड़ा लाभ: इस योजना का मुख्य उद्देश्य मध्य प्रदेश के शहरी इलाकों में तेजी से बढ़ते वायु और ध्वनि प्रदूषण को कम करना है। शुरुआती दौर में इन बसों का किराया बेहद किफायती रखा गया है ताकि समाज का हर वर्ग आसानी से इस 'ग्रीन और क्लीन' मोबिलिटी का लाभ उठा सके।


