इंदौर | मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की आर्थिक गतिविधियों को जोड़ने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग-52 (इंदौर-मुंबई हाईवे) आने वाले वर्षों में पूरी तरह हाईटेक और नए स्वरूप में नजर आएगा। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) इस व्यस्ततम मार्ग को सिक्स लेन (6-Lane) में अपग्रेड करने की महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रहा है। इसके लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जा रही है, जिसे दिसंबर 2026 तक दिल्ली मुख्यालय को सौंपने का लक्ष्य रखा गया है। इस मेगा प्रोजेक्ट से इंदौर से मुंबई के बीच का सफर न केवल बेहद तेज और आरामदायक होगा, बल्कि दुर्घटनाओं पर भी अंकुश लगेगा।
खलघाट में नर्मदा नदी पर बनेगा तीसरा पुल
इस पूरी परियोजना का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण आकर्षण खलघाट क्षेत्र में नर्मदा नदी पर बनने वाला एक नया अत्याधुनिक पुल होगा। वर्तमान में खलघाट में यातायात के लिए दो पुल काम कर रहे हैं, लेकिन बढ़ते वाहनों के दबाव के कारण यहाँ अक्सर जाम की स्थिति निर्मित हो जाती है।
पुलों का नया ट्रैफिक फॉर्मूला:
योजना के मुताबिक, वर्ष 2010 में बने मौजूदा पुल के समानांतर एक नया तीन लेन (3-Lane) का पुल बनाया जाएगा। नया पुल बनने के बाद दोनों बड़े पुलों का उपयोग इंदौर और मुंबई की अलग-अलग दिशाओं के वन-वे ट्रैफिक के लिए किया जाएगा। वहीं, करीब 40 साल पुराने हो चुके सबसे पहले पुल को भारी वाहनों के लिए बंद कर केवल स्थानीय और ग्रामीण यातायात के लिए सुरक्षित रखा जाएगा।
बिजासन घाट के खतरनाक मोड़ होंगे सीधे, सुधरेंगे ब्लैक स्पॉट्स
सिक्स लेन परियोजना में सड़क चौड़ीकरण के साथ-साथ यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इसके तहत NHAI पूरे हाईवे पर दुर्घटना संभावित 'ब्लैक स्पॉट्स' की पहचान कर उन्हें स्थायी रूप से सुधारेगा। बिजासन घाट का री-डिजाइन: मध्य प्रदेश-महाराष्ट्र सीमा पर स्थित खतरनाक बिजासन घाट के तीखे मोड़ों को नए सिरे से डिजाइन किया जाएगा ताकि भारी वाहनों और ट्रकों के पलटने का खतरा खत्म हो सके। लोकल ट्रैफिक के लिए पुख्ता इंतजाम: हाईवे से जुड़े शहरी और अर्ध-शहरी कस्बों में मुख्य ट्रैफिक को स्थानीय वाहनों से अलग करने के लिए सर्विस रोड, फ्लाईओवर और अंडरपास (CUP) का जाल बिछाया जाएगा।
व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को मिलेगी नई रफ्तार
NHAI अधिकारियों के अनुसार, जल्द ही इस पूरे रूट पर विस्तृत जियो-टेक्निकल और ट्रैफिक सर्वे शुरू होने जा रहा है, जिसके आधार पर फाइनल अलाइनमेंट और डिजाइन तैयार होगा। इस कॉरिडोर के विकसित होने से इंदौर और मुंबई के बीच माल परिवहन (लॉजिस्टिक्स) की लागत और समय में भारी कमी आएगी। हाईवे पर आधुनिक साइन बोर्ड, बेहतर लाइटिंग, एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS) और मजबूत जल निकासी व्यवस्था भी इस परियोजना का हिस्सा होंगे। बढ़ती आबादी और व्यावसायिक वाहनों की संख्या को देखते हुए यह प्रोजेक्ट दोनों राज्यों के बीच सड़क संपर्क को एक नया मील का पत्थर साबित करेगा।

