छतरपुर, सुबोध त्रिपाठी। टीकमगढ़ और छतरपुर जिले की सीमा पर बहने वाली धसान नदी गुरुवार को रणक्षेत्र में तब्दील हो गई। टीकमगढ़ जिले में रेत कंपनी द्वारा किस्त जमा न करने के कारण फरवरी माह से ईटीपी (Electronic Transit Pass) बंद होने के बावजूद, माफिया धड़ल्ले से अवैध उत्खनन कर रहे थे। गुरुवार सुबह झांसी की खनिज टीम द्वारा खकोरा घाट पर की गई अचानक छापेमारी से खनन माफियाओं में हड़कंप मच गया। इस कार्रवाई के दौरान अवैध उत्खनन में लगे लिफ्टर आनन-फानन में नदी के रास्ते छतरपुर जिले की सीमा में घुस गए, जिन्हें छतरपुर खनिज विभाग ने मुस्तैदी दिखाते हुए जब्त कर लिया है।
झांसी की टीम का छापा और छतरपुर विभाग की घेराबंदी
जैसे ही झांसी की खनिज टीम ने खकोरा घाट पर दबिश दी, नावों पर लगे रेत निकालने वाले लिफ्टर पकड़े जाने के डर से भागने लगे। सूचना मिलते ही छतरपुर जिला खनिज अधिकारी अमित मिश्रा के नेतृत्व में खनिज निरीक्षक मुनेंद्र पटेल और उनकी टीम सक्रिय हुई। छतरपुर की टीम ने अपनी सीमा में प्रवेश कर चुके इन लिफ्टरों को घेरकर पकड़ लिया। विभाग ने इन भारी मशीनों को जब्त कर संबंधित थाने में रखवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
सियासी गलियारों में हलचल: 'माननीयों' के दबाव की चर्चा
अवैध रेत उत्खनन पर हुई इस बड़ी कार्रवाई के बाद अब मामला राजनीतिक रंग लेता दिख रहा है। सूत्रों के अनुसार, टीकमगढ़ के रेत माफिया कार्रवाई से बचने के लिए एक कद्दावर कांग्रेस विधायक की शरण में पहुँच गए हैं। चर्चा यह भी है कि विधायक के इशारे पर सत्तापक्ष के कुछ रसूखदार समर्थकों द्वारा छतरपुर खनिज विभाग पर मानसिक दबाव बनाया जा रहा है ताकि जब्त किए गए लिफ्टरों को बिना किसी ठोस कार्रवाई के छोड़ दिया जाए।
ईटीपी बंद, फिर भी कैसे चल रहा था 'खेल'?
हैरानी की बात यह है कि टीकमगढ़ जिले में आधिकारिक रूप से रेत का उत्खनन और परिवहन बंद है। फरवरी माह से ईटीपी जारी न होने का अर्थ है कि वहां से निकलने वाली रेत की हर ट्रॉली अवैध है। इसके बावजूद धसान नदी के सीने को मशीनों से छलनी किया जा रहा था। अब देखना यह होगा कि खनिज विभाग इन रसूखदार माफियाओं और राजनीतिक दबाव के आगे झुकता है या नियमानुसार कड़ी कार्रवाई कर रेत चोरी पर लगाम लगाता है।



