खाकी का रौब और ठगी का खेल; सागर में पकड़ी गई 'नकली डीएसपी' की फौज

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सागर, शाहगढ़। सागर जिले के शाहगढ़ से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ असली पुलिस ने 'नकली पुलिस' के एक शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह इतना शातिर था कि इसमें एक आरोपी फर्जी डीएसपी (DSP) बना घूम रहा था, जबकि दो अन्य आरोपी उसके 'गनमैन' और 'आरक्षक' बनकर साथ चल रहे थे।
ठगी की वारदात को अंजाम देने के लिए इन्होंने एक नई सफेद बोलेरो गाड़ी का इस्तेमाल किया, जिस पर नंबर तक नहीं था। इनका इरादा बुंदेलखंड के युवाओं को होमगार्ड में नौकरी लगवाने का झांसा देकर लाखों रुपये ऐंठना था।
कैफे पर हुई डील और युवक के शक ने बिगाड़ा खेल
इस फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ शाहगढ़ के एक 'चायगढ़ कैफे' पर हुआ। गिरोह के सदस्य एक स्थानीय युवक को जाल में फंसाकर नौकरी के बदले 1 लाख रुपये की मांग कर रहे थे। बातचीत के दौरान युवक को उनकी वर्दी और लहजे पर संदेह हुआ। युवक ने बिना देर किए चतुराई दिखाई और इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दे दी। थाना प्रभारी संदीप खरे ने पुलिस टीम के साथ तत्काल कैफे पर दबिश दी और घेराबंदी कर तीनों फर्जी पुलिसकर्मियों को दबोच लिया।
ग्वालियर से बुंदेलखंड तक फैला जालसाजी का नेटवर्क
पकड़े गए आरोपियों की पहचान शिवम चतुर्वेदी (गढ़ाकोटा), राजकुमार ठाकुर और सतीश सिंह ठाकुर (जबलपुर) के रूप में हुई है। पुलिस पूछताछ में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है कि यह गिरोह पहले भी ग्वालियर-चंबल अंचल में इसी तरह फर्जी अधिकारी बनकर ठगी करते हुए ग्वालियर क्राइम ब्रांच द्वारा पकड़ा जा चुका है। जेल से बाहर आने के बाद इन्होंने अपना इलाका बदल लिया और अब बुंदेलखंड के युवाओं को बरगलाने की कोशिश कर रहे थे।
दस्तावेज और वाहन जब्त, जांच जारी
असली पुलिस ने आरोपियों के पास से फर्जी दस्तावेज, मोबाइल फोन और बिना नंबर की बोलेरो गाड़ी जब्त कर ली है। थाना प्रभारी संदीप खरे के अनुसार, गिरोह ने पहले भी कई युवाओं से बड़ी रकम ऐंठी है। फिलहाल आरोपियों से कड़ी पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनके नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं और इन्होंने अब तक कितने बेरोजगार युवाओं को अपना शिकार बनाया है।


